"हम ग्रीन कार्ड बदलने वाले हैं": ट्रंप टीम की H-1B वीज़ा में बड़े बदलाव की तैयारी ..भारतीयों पर असर
डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन अमेरिका के H-1B वीज़ा और ग्रीन कार्ड सिस्टम में बड़े बदलाव की योजना बना रहा है। इसका संकेत है कि अब यह व्यवस्था वेतन आधारित (wage-based) और मेरिट आधारित (merit-driven) चयन प्रणाली की ओर..
वॉशिंगटन। डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन अमेरिका के H-1B वीज़ा और ग्रीन कार्ड सिस्टम में बड़े बदलाव की योजना बना रहा है। इसका संकेत है कि अब यह व्यवस्था वेतन आधारित (wage-based) और मेरिट आधारित (merit-driven) चयन प्रणाली की ओर झुकेगी।
अमेरिकी वाणिज्य सचिव हॉवर्ड लुटनिक ने सोमवार को बताया कि वे इन प्रस्तावित सुधारों में शामिल हैं। इसके तहत मौजूदा लॉटरी सिस्टम खत्म कर एक अधिक चयनात्मक मॉडल लाने की योजना है।
लुटनिक ने कहा, “हम ग्रीन कार्ड बदलने जा रहे हैं। आज औसत अमेरिकी की आय 75,000 डॉलर है और ग्रीन कार्ड पाने वाले की औसत आय 66,000 डॉलर है। हम ऐसा क्यों कर रहे हैं? ये तो जैसे सबसे निचले स्तर के लोगों को चुनना है।”
The current H1B visa system is a scam that lets foreign workers fill American job opportunities.
Hiring American workers should be the priority of all great American businesses. Now is the time to hire American. pic.twitter.com/l27HEhF7C3 — Howard Lutnick (@howardlutnick) August 26, 2025
उन्होंने आगे कहा, “इसीलिए डोनाल्ड ट्रंप इसमें बदलाव करने जा रहे हैं। यही ‘गोल्ड कार्ड’ का मकसद है। इसके जरिए हम सर्वश्रेष्ठ लोगों को चुनेंगे और अब इसका समय आ गया है।”
लुटनिक ने X (ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए मौजूदा H-1B सिस्टम को “एक धोखा” बताया, जो विदेशी कामगारों को अमेरिकी नौकरियां भरने देता है। उन्होंने लिखा, “सभी महान अमेरिकी कंपनियों की प्राथमिकता अमेरिकी कर्मचारियों को नौकरी देना होना चाहिए।”
प्रस्तावित बदलाव क्या हैं?
- H-1B लॉटरी खत्म होगी और इसके स्थान पर वेतन-आधारित आवंटन प्रणाली लागू होगी। यानी अधिक वेतन वाले आवेदकों को पहले वीज़ा मिलेगा।
- इस प्रभाव के लिए ड्राफ्ट नियम को इस महीने की शुरुआत में अमेरिकी ऑफिस ऑफ इन्फॉर्मेशन एंड रेग्युलेटरी अफेयर्स ने मंजूरी दी है।
- “गोल्ड कार्ड” योजना— यह अभी शुरुआती चरण में है और मौजूदा ग्रीन कार्ड प्रक्रिया का विकल्प होगी। इसका लक्ष्य उच्च-कुशल और उच्च-आय वाले व्यक्तियों को आकर्षित करना है।
- यह कदम ट्रंप की “अमेरिका फर्स्ट” नीति के अनुरूप है।
भारतीयों पर असर
- भारतीय पेशेवर H-1B वीज़ा के सबसे बड़े लाभार्थी हैं। अमेरिकी डेटा के अनुसार, हर साल जारी किए गए नए H-1B वीज़ा का 70% से अधिक हिस्सा भारतीय नागरिकों को मिलता है।
- बदलाव के बाद, कम वेतन पर काम करने वाले भारतीय पेशेवरों को अमेरिका में अवसर मिलना कठिन हो सकता है।
- वहीं, उच्च आय और उच्च कौशल वाले भारतीय विशेषज्ञों के लिए “गोल्ड कार्ड” नई संभावना ला सकता है।
आलोचना और बहस
- H-1B को सीमित करने या समाप्त करने की संभावना पर सोशल मीडिया में बहस छिड़ गई है।
- आलोचकों का कहना है कि इससे अमेरिकी कंपनियों को नुकसान होगा क्योंकि वे कुशल विदेशी प्रतिभा तक नहीं पहुँच पाएंगी।
- विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी स्थिति में नौकरियां भारत जैसे देशों में रिमोट हायरिंग या आउटसोर्सिंग के जरिए शिफ्ट हो सकती हैं बजाय इसके कि अमेरिकी नागरिक उन पदों को भरें।
I have to be honest, and it hurts, but I think we are losing this one. Too many have convinced themselves that if we just end the H-1B, all Americans will have amazing jobs and there won't be any corruption.
Those of us willing to think know what will actually happen: jobs… https://t.co/m6P7XBZXCZ — Anna K. Gorisch (@AnnaGorisch) August 25, 2025
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