बीजेपी ने खड़गे को बताया 'रबर स्टैम्प अध्यक्ष', 'हाईकमान' टिप्पणी को लेकर किया हमला
भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने मंगलवार को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे पर जोरदार हमला बोला। खड़गे ने हाल ही में कर्नाटक के मुख्यमंत्री बदलने की अटकलों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि "फैसला पार्टी के हाईकमान द्वारा लिया जाएगा"। इस टिप्पणी को लेकर बीजेपी ने कांग्रेस अध्यक्ष को "कमजोर और रबर स्टैम्प" करार दिया..
नयी दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने मंगलवार को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे पर जोरदार हमला बोला। खड़गे ने हाल ही में कर्नाटक के मुख्यमंत्री बदलने की अटकलों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि "फैसला पार्टी के हाईकमान द्वारा लिया जाएगा"। इस टिप्पणी को लेकर बीजेपी ने कांग्रेस अध्यक्ष को "कमजोर और रबर स्टैम्प" करार दिया और कहा कि कांग्रेस की 'पहली परिवार' यानी गांधी परिवार ने उन्हें केवल नाममात्र का अध्यक्ष बना दिया है।
बीजेपी नेता सीआर केसवन ने कहा, “मल्लिकार्जुन खड़गे जी की निराशाजनक स्वीकारोक्ति स्पष्ट रूप से उजागर करती है कि कांग्रेस की पहली परिवार ने किस तरह उन्हें एक कमजोर, शक्तिहीन, रबर स्टैम्प अध्यक्ष बना दिया है। खड़गे जी की विवश टिप्पणी कांग्रेस पार्टी की दलित-विरोधी मानसिकता को उजागर करती है और दिखाती है कि पार्टी में दलितों की गरिमा के लिए कोई सम्मान नहीं है।”
सीआर केसवन ने पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष सीताराम केसरी और गांधी परिवार के बीच कथित तनाव का भी हवाला देते हुए आरोप लगाया कि कांग्रेस में हमेशा पहली परिवार के हित सर्वोपरि होते हैं।
उन्होंने कहा, “कांग्रेस ने सीताराम केसरी जी का जिस तरह से अपमान किया था, उसे भुलाया नहीं जा सकता। कांग्रेस के लिए केवल गांधी-नेहरू परिवार के हित मायने रखते हैं। अब सवाल यह है कि खड़गे जी ने जब कहा कि 'हाईकमान फैसला करेगा', तो उसका सही मतलब क्या था? यह गांधी परिवार की तिकड़ी को स्पष्ट करना चाहिए।”
बता दें कि सोमवार को खड़गे ने बेंगलुरु में पत्रकारों से बातचीत के दौरान कर्नाटक में मुख्यमंत्री परिवर्तन की अटकलों पर कहा था, "यह मामला पार्टी हाईकमान के हाथ में है। कोई नहीं जानता कि हाईकमान में क्या चल रहा है। यह उन्हीं पर निर्भर करता है कि वे क्या कार्रवाई करें। लेकिन कोई भी व्यक्ति अनावश्यक रूप से मुद्दा न बनाए।”
यह बयान ऐसे समय में आया है जब खड़गे स्वयं पार्टी के सर्वोच्च पद पर हैं, जिससे उनकी टिप्पणी को लेकर सवाल उठने लगे हैं कि क्या वे स्वतंत्र निर्णय लेने में सक्षम हैं या नहीं।
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