केरल के नए डीजीपी रवाडा चंद्रशेखर पीएम मोदी के करीबी? कांग्रेस नेता ने लगाया CPM-BJP डील का आरोप
अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) के महासचिव और सांसद केसी वेणुगोपाल ने केरल सरकार पर नए डीजीपी की नियुक्ति को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि नितिन अग्रवाल, जो डीजीपी पद के लिए सबसे प्रमुख दावेदार थे उन्हें इसलिए हटाया गया क्योंकि..
कन्नूर। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) के महासचिव और सांसद केसी वेणुगोपाल ने केरल सरकार पर नए डीजीपी की नियुक्ति को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि नितिन अग्रवाल, जो डीजीपी पद के लिए सबसे प्रमुख दावेदार थे उन्हें इसलिए हटाया गया क्योंकि केंद्र सरकार खासकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी—उन्हें पसंद नहीं करते।
वेणुगोपाल ने कहा कि नितिन अग्रवाल को बीएसएफ के महानिदेशक पद से भी इसी कारण हटाया गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि केरल सरकार ने केंद्र की नाराज़गी से बचने के लिए उन्हें डीजीपी की दौड़ से बाहर किया और दूसरे नंबर पर रहे रवादा चंद्रशेखर को नियुक्त किया, जो कथित रूप से पीएम मोदी के बेहद करीबी माने जाते हैं।
वेणुगोपाल का बड़ा आरोप
“नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार नितिन अग्रवाल को पसंद नहीं करते। मैं उन्हें व्यक्तिगत रूप से जानता हूं, जब मैं विधायक था तब वह एसपी थे। वे एक ईमानदार अफसर हैं, और पिनराई विजयन सरकार को ऐसे अफसर नहीं चाहिए। रवादा चंद्रशेखर प्रधानमंत्री के नजदीकी हैं। वह खुफिया ब्यूरो में स्पेशल डायरेक्टर रहे हैं और पीएम की सुरक्षा की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। उनकी नियुक्ति **सीपीएम और बीजेपी के बीच दूसरे समझौते का हिस्सा है।”
हालांकि वेणुगोपाल ने यह भी कहा कि उन्हें नए डीजीपी से कोई व्यक्तिगत आपत्ति नहीं है, लेकिन उन्होंने सीएम पिनराई विजयन पर आरोप लगाया कि वे कूथूparambu गोलीकांड के पीड़ितों को भुलाकर खुद को बचाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि इस नियुक्ति की स्वतंत्र जांच होनी चाहिए, ताकि पूरे मामले की सच्चाई सामने आ सके।
डीजीपी नियुक्ति पर पहले से चल रहा विवाद
सीपीएम के वरिष्ठ नेता पी जयाराजन सबसे पहले रवादा की नियुक्ति के खिलाफ सामने आए थे। उन्होंने 1994 के कूथू parambu पुलिस फायरिंग मामले का ज़िक्र करते हुए आपत्ति जताई, जिसमें पांच DYFI कार्यकर्ता मारे गए थे। जयाराजन के अनुसार, रवाडा उस समय इस घटना से जुड़े थे।
हालांकि, 2012 में केरल हाईकोर्ट ने रवाडा को इस मामले में बरी कर दिया था। उस समय नितिन अग्रवाल भी एक अन्य विवाद में शामिल थे, जब उन्होंने RSS-CPM झड़प के दौरान CPM कार्यकर्ताओं पर कथित हमला किया था।
जयाराजन ने कहा, “चाहे नियुक्ति योग्यता के आधार पर हुई हो, लेकिन सरकार को इस विषय पर **स्पष्टीकरण देना चाहिए।”
सरकार की सफाई
सीपीएम राज्य सचिव एमवी गोविंदन ने कहा कि रवाडा को जांच आयोग की रिपोर्ट के आधार पर अदालत ने बरी किया था। फायरिंग की घटना से दो दिन पहले ही उन्होंने चार्ज संभाला था और उन्हें पर्याप्त जानकारी नहीं थी।
उन्होंने कहा, “पार्टी सरकार के फैसले के साथ खड़ी है। जयाराजन की टिप्पणी को आलोचना न समझा जाए।” वहीं, मंत्री केएन वासवन ने कहा कि संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) द्वारा शॉर्टलिस्ट किए गए तीन उम्मीदवारों में रवाडा चंद्रशेखर सबसे योग्य थे।
यह मामला सिर्फ एक नियुक्ति का नहीं, बल्कि राजनीतिक समीकरण, दलगत समझौतों और भविष्य की रणनीति का भी संकेत दे सकता है। कांग्रेस जहां इसे सीपीएम और बीजेपी की मिलीभगत बता रही है, वहीं सरकार इसे कानूनी और योग्यता आधारित चयन बता रही है।
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