₹42 करोड़ के बाढ़ राहत घोटाले में श्रीनगर के राजस्व अधिकारियों के खिलाफ CBI ने दर्ज की FIR
श्रीनगर। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने शनिवार को बताया कि उसने श्रीनगर के डिप्टी कमिश्नर कार्यालय के कुछ राजस्व अधिकारियों के खिलाफ ₹42 करोड़ की सरकारी राहत राशि में हेराफेरी के आरोप में एफआईआर..
श्रीनगर। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने शनिवार को बताया कि उसने श्रीनगर के डिप्टी कमिश्नर कार्यालय के कुछ राजस्व अधिकारियों के खिलाफ ₹42 करोड़ की सरकारी राहत राशि में हेराफेरी के आरोप में एफआईआर दर्ज की है।
CBI अधिकारियों ने कहा कि यह मामला 2014 की बाढ़ के बाद व्यापारियों को दी गई राहत राशि के वितरण में हुए एक बड़े घोटाले से जुड़ा है। इस घोटाले में डिप्टी कमिश्नर कार्यालय श्रीनगर के अधिकारी, राजस्व विभाग के कर्मचारी और कुछ निजी व्यक्ति शामिल हैं।
CBI श्रीनगर की ओर से दर्ज FIR संख्या 04/2025 में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (2006 और 1988, जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम 2019 के तहत संशोधित) और रणबीर दंड संहिता (Svt. 1989) की विभिन्न धाराएं — 5(1)(d), 5(2), 13(1)(a), 13(2), 420, 120-B तथा 318 BNS — लगाई गई हैं।
CBI की प्रारंभिक जांच में बड़ा फर्जीवाड़ा उजागर
CBI द्वारा की गई गुप्त जांच में यह पाया गया कि सरकारी राहत राशि प्राप्त करने के लिए फर्जी दस्तावेज और झूठी सूचनाओं का इस्तेमाल किया गया था। यह राशि 2014 की बाढ़ से प्रभावित दुकानदारों के लिए दी जानी थी।
जांच में सामने आया कि DC कार्यालय श्रीनगर और उसके अधीनस्थ तहसील कार्यालयों ने ₹31.54 करोड़ से ₹42 करोड़ तक की अव्ययित (unspent) राहत राशि टंकीपोरा श्रीनगर की एडिशनल ट्रेजरी में जमा की थी।
फर्जी संगठनों और नामों का सहारा
जांच के अनुसार, राहत पाने के लिए दो काल्पनिक संगठनों —
- अल-फलाह शॉपकीपर्स एसोसिएशन और
- फ्लड अफेक्टेड कोऑर्डिनेशन कमेटी श्रीनगर
— ने फर्जी आवेदन जमा किए। इन संगठनों ने 1,503 लोगों को गैर-बीमित बाढ़ पीड़ित व्यापारी बताकर सूची पेश की थी। इन आवेदनों के साथ न कोई एफिडेविट संलग्न था और न ही उचित सत्यापन किया गया।
CBI ने पाया कि DC कार्यालय और तहसील सेंट्रल शालटेंग के अधिकारियों ने दलालों — तारिक अहमद मलिक और तारिक अहमद शेख — के साथ मिलकर साजिश रची। उन्होंने कई बार एक ही परिवार के लोगों के नामों को दोहराकर फर्जी सूची तैयार की।
गैर-मौजूद संगठनों से राशि दिलवाई गई
जांच में पुष्टि हुई कि जिन दो संगठनों के नाम पर सूची दी गई थी, वे अस्तित्व में ही नहीं थे। इन फर्जी संगठनों के माध्यम से सरकार को सूची सौंपी गई और भारी राहत राशि की धोखाधड़ी से बंदरबांट की गई।
CBI की यह कार्रवाई इस बात की ओर संकेत करती है कि 2014 के बाढ़ राहत वितरण में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार हुआ, जिसमें सरकारी अधिकारी और निजी व्यक्ति दोनों शामिल थे। आगे की जांच जारी है।
What's Your Reaction?