राजस्थान हाईकोर्ट में मामलों की लंबित स्थिति पर मुख्य न्यायाधीश की चिंता
राजस्थान हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति एम.एम. श्रीवास्तव ने बुधवार को मामलों की लंबित स्थिति और न्यायाधीशों की कमी को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की..
जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति एम.एम. श्रीवास्तव ने बुधवार को मामलों की लंबित स्थिति और न्यायाधीशों की कमी को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की।
राजस्थान हाईकोर्ट बार एसोसिएशन द्वारा आयोजित सम्मान समारोह को संबोधित करते हुए न्यायमूर्ति श्रीवास्तव ने कहा कि "हाईकोर्ट में लंबित मामलों की स्थिति कोई रहस्य नहीं है। वर्तमान में जितने न्यायाधीश कार्यरत हैं, वे लंबित मामलों के निपटारे के लिए पर्याप्त नहीं हैं।"
उन्होंने कहा कि इस स्थिति का सीधा असर न्यायिक प्रणाली की गति पर पड़ रहा है और हर न्यायाधीश पर अत्यधिक कार्यभार आ गया है।
हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 24 के तहत भरण-पोषण आदेश: फैसला सुरक्षित
मुख्य न्यायाधीश एम.एम. श्रीवास्तव, न्यायमूर्ति महेंद्र गोयल और न्यायमूर्ति सुदेश बंसल की खंडपीठ ने बुधवार को हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 24 के तहत भरण-पोषण आदेश की प्रकृति को लेकर महत्वपूर्ण सुनवाई की।
यह मामला इस सवाल से जुड़ा था कि क्या धारा 24 के तहत दिया गया भरण-पोषण आदेश "अंतरिम" माना जाएगा या "अंतिम" आदेश?
वरिष्ठ अधिवक्ताओं के अनुसार, अगर यह अंतरिम आदेश माना जाए तो इसके खिलाफ पुनरीक्षण याचिका (revision) दायर की जा सकती है। लेकिन, अगर यह अंतिम आदेश हो तो इसके खिलाफ अपील (appeal) दायर करना होगा।
खंडपीठ ने इस संवैधानिक प्रश्न पर फैसला सुरक्षित रख लिया है।
सरकारी वकीलों को अनावश्यक स्थगन से बचने का निर्देश
राज्य सरकार ने बुधवार को हाईकोर्ट को जानकारी दी कि उसने सभी लोक अभियोजकों (Public Prosecutors) को निर्देश जारी किए हैं कि वे सांसदों और विधायकों के विरुद्ध दर्ज मामलों में अनावश्यक स्थगन (adjournments) न मांगे।
यह निर्देश हाईकोर्ट द्वारा स्वतः संज्ञान लेकर शुरू किए गए मामले की सुनवाई के दौरान आया।
मुख्य न्यायाधीश श्रीवास्तव और न्यायमूर्ति इंद्रजीत सिंह की खंडपीठ ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 12 मई की तारीख तय की है और राज्य सरकार को निर्देश की प्रति अदालत में प्रस्तुत करने को कहा है।
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