उज्जैन के तराना में शुक्रवार की नमाज़ के बाद सांप्रदायिक झड़पें, पथराव और आगजनी; 5 आरोपी गिरफ्तार
उज्जैन जिले के तराना कस्बे में शुक्रवार की नमाज़ के बाद सांप्रदायिक झड़पें भड़क उठीं। यह हिंसा एक दिन पहले बजरंग दल से जुड़े एक कार्यकर्ता पर हुए हमले के बाद क्षेत्र में बढ़े तनाव के बीच..
उज्जैन जिले के तराना कस्बे में शुक्रवार की नमाज़ के बाद सांप्रदायिक झड़पें भड़क उठीं। यह हिंसा एक दिन पहले बजरंग दल से जुड़े एक कार्यकर्ता पर हुए हमले के बाद क्षेत्र में बढ़े तनाव के बीच हुई।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, 22 जनवरी की शाम करीब 7:00 से 7:30 बजे के बीच सोहेल ठाकुर नामक व्यक्ति पर कई लोगों ने कथित तौर पर हमला किया। इस हमले में सोहेल ठाकुर के सिर में गंभीर चोट आई, जिसके बाद उन्हें पहले स्थानीय अस्पताल ले जाया गया और फिर बेहतर इलाज के लिए उज्जैन रेफर किया गया।
इसके अगले दिन, दो समुदायों से जुड़े लोग हाथों में लाठी, डंडे और तलवारें लेकर सड़कों पर उतर आए। दोनों पक्षों की ओर से पथराव की खबरें सामने आईं और कई वाहनों में आग लगा दी गई। हिंसा के दौरान दोपहिया वाहन और एक बस को भी आग के हवाले कर दिया गया। बाद में दमकल विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर आग पर काबू पाया।
पुलिस के अनुसार, इस मामले में नामजद छह आरोपियों में से अब तक पांच को गिरफ्तार कर लिया गया है। आरोप है कि इन लोगों ने एक हिंदू संगठन से जुड़े नेता पर जानलेवा हमला किया था।
विश्व हिंदू परिषद (VHP) के नेता विष्णु पाटीदार ने बताया कि वीएचपी कार्यकर्ता सोहेल ठाकुर पर पीछे से डंडों से हमला किया गया। उन्होंने कहा कि चार से पांच नामजद आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है और अब तक पांच गिरफ्तारियां हो चुकी हैं।
हालांकि, पाटीदार ने यह भी बताया कि सिर पर वार करने वाला मुख्य आरोपी अब भी फरार है। उन्होंने कहा कि प्रशासन को पहले ही चेताया गया था कि त्वरित कार्रवाई की अपेक्षा है और इस संबंध में अधिकारियों से बातचीत जारी है।
वहीं, बस चालक शेख पप्पू खान ने बताया कि उनकी बस यात्रियों को लेकर बस स्टैंड की ओर जा रही थी और उनका किसी से कोई विवाद नहीं था। उन्होंने आरोप लगाया कि जब वह बस को सुरक्षित स्थान पर ले जाने की कोशिश कर रहे थे, तभी पीछे से बस पर हमला किया गया।
खान के मुताबिक, बस को पूरी तरह से क्षतिग्रस्त कर दिया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि उनकी बस को ही क्यों निशाना बनाया गया। उन्होंने यह भी दावा किया कि मौके पर हिंदू और मुस्लिम पहचान से जुड़े नारे लगाए गए और करीब 25 मिनट तक वह वहीं अकेले पड़े रहे, जिसके बाद किसी तरह मदद मिलने पर वह घर लौट सके।
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