पीएम मोदी के लिए संविधान ‘पवित्र’: शशि थरूर के बयान से सियासी हलचल तेज
कांग्रेस के साथ अपने संबंधों को लेकर चल रही अटकलों के बीच पार्टी सांसद शशि थरूर ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भारतीय संविधान को “पवित्र” मानते हैं। थरूर ने संविधान की मजबूती को रेखांकित करते हुए कहा कि यह ऐसा दस्तावेज़ है जिसने “समय की कसौटी पर खुद..
नयी दिल्ली। कांग्रेस के साथ अपने संबंधों को लेकर चल रही अटकलों के बीच पार्टी सांसद शशि थरूर ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भारतीय संविधान को “पवित्र” मानते हैं। थरूर ने संविधान की मजबूती को रेखांकित करते हुए कहा कि यह ऐसा दस्तावेज़ है जिसने “समय की कसौटी पर खुद को साबित किया है।”
कोझिकोड में आयोजित केरल लिटरेचर फेस्टिवल के दौरान एक सवाल के जवाब में थरूर ने संविधान की मजबूती पर विस्तार से बात की। उन्होंने कहा कि संविधान ने लगातार आने वाली सरकारों का दौर देखा है, जिसमें मौजूदा सरकार भी शामिल है“जिसके वैचारिक पूर्वज राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) में संविधान को खुलकर खारिज कर चुके थे।”
अपने जवाब में थरूर ने प्रधानमंत्री मोदी के उस बयान का भी उल्लेख किया, जिसमें मोदी ने संविधान को अपनी “एकमात्र पवित्र पुस्तक” बताया था। थरूर के मुताबिक, यह बयान संविधान की स्थायी सत्ता और महत्व को दर्शाता है।
कांग्रेस से दूरी की अटकलों पर प्रतिक्रिया देते हुए तिरुवनंतपुरम से सांसद थरूर ने कहा कि पार्टी के साथ उनका सार्वजनिक मतभेद केवल एक ही मुद्दे पर रहा है—ऑपरेशन सिंदूर।
उन्होंने कहा, “मैंने किसी भी स्तर पर संसद में पार्टी के रुख का उल्लंघन नहीं किया है। जिस एकमात्र मुद्दे पर सिद्धांत के आधार पर सार्वजनिक मतभेद हुआ, वह ऑपरेशन सिंदूर है, जहां मैंने बहुत कड़ा रुख अपनाया और उसके लिए मैं किसी तरह की माफी नहीं मांगता।”
थरूर ने आगे कहा कि ऑपरेशन सिंदूर को लेकर भारत के कूटनीतिक प्रयासों के तहत वह बाद में सरकार के एक आउटरीच प्रतिनिधिमंडल का भी नेतृत्व कर चुके हैं। पाकिस्तान के साथ हुए संघर्षविराम (सीजफायर) के मुद्दे पर भी उन्होंने कांग्रेस से अलग राय रखी थी, जबकि पार्टी ने इस फैसले की आलोचना की थी।
इसके अलावा, पाकिस्तान के साथ संघर्षविराम के बाद मोदी सरकार की आलोचना के लिए 1971 के बांग्लादेश मुक्ति संग्राम में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की भूमिका को लेकर चलाए गए सोशल मीडिया अभियान में भी थरूर का रुख कांग्रेस से अलग रहा।
एएनआई से बातचीत में उन्होंने कहा, “हमने बहुत नुकसान झेला है—पूंछ के लोगों से पूछिए कि कितने लोग मारे गए हैं। यह कोई ऐसी जंग नहीं थी, जिसे हम लंबे समय तक जारी रखना चाहते थे। हमारा उद्देश्य आतंकियों को सबक सिखाना था और वह सबक सिखा दिया गया है।”
एक भारतीय के रूप में थरूर ने 1971 की जीत पर गर्व जताते हुए उसे “एक महान उपलब्धि” बताया, लेकिन साथ ही दोनों संघर्षों के उद्देश्यों में अंतर पर जोर दिया।
उन्होंने कहा, “1971 में भारत एक नैतिक उद्देश्य के लिए लड़ रहा था, लोगों को मुक्त कराने के लिए। 2025 में मकसद पाकिस्तान में पनप रहे आतंकियों को सबक सिखाना और उनके आतंकी ठिकानों को ध्वस्त करना था।” थरूर ने यह भी जोड़ा कि आज पाकिस्तान की सैन्य क्षमताएं और संभावित नुकसान, अतीत की तुलना में कहीं अधिक हैं।
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