डीके शिवकुमार ने मांगी केंद्र की मदद, महाराष्ट्र द्वारा आलमट्टी बांध की ऊंचाई बढ़ाने का विरोध
कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने सोमवार को आलमट्टी बांध की ऊंचाई बढ़ाने के प्रस्ताव पर महाराष्ट्र के विरोध के बीच केंद्र सरकार से मदद मांगी और राज्य के सभी सांसदों तथा केंद्रीय मंत्रियों से कर्नाटक के हितों की रक्षा के लिए..
बेंगलुरु। कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने सोमवार को आलमट्टी बांध की ऊंचाई बढ़ाने के प्रस्ताव पर महाराष्ट्र के विरोध के बीच केंद्र सरकार से मदद मांगी और राज्य के सभी सांसदों तथा केंद्रीय मंत्रियों से कर्नाटक के हितों की रक्षा के लिए एकजुट होने की अपील की। शिवकुमार सिंचाई मंत्री का प्रभार भी संभालते हैं।
विधान सौध में पत्रकारों से बात करते हुए शिवकुमार ने बताया कि महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने 9 मई को कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया को पत्र लिखा था, जिसमें चेतावनी दी गई थी कि यदि आलमट्टी बांध की ऊंचाई बढ़ाई गई, तो महाराष्ट्र के सांगली और कोल्हापुर जिलों में बाढ़ आ सकती है।
शिवकुमार ने सोशल मीडिया मंच एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, "हम अपने पड़ोसी राज्य से टकराव नहीं चाहते, लेकिन जो कानूनी और न्यायसंगत रूप से हमारा है, उस पर हमें अडिग रहना होगा।"
उन्होंने कहा, "यह पत्र हमारे लिए चौंकाने वाला था। 2010 में जब कृष्णा ट्राइब्यूनल ने फैसला सुनाया था, तब महाराष्ट्र ने कोई आपत्ति नहीं जताई थी। बल्कि, उन्होंने तो बांध की ऊंचाई बढ़ाने के समर्थन में शपथ पत्र तक दायर किया था। फिर अब अचानक ये विरोध क्यों?"
कृष्णा ट्राइब्यूनल का आदेश और कर्नाटक का अधिकार
शिवकुमार ने बताया कि कृष्णा ट्राइब्यूनल ने कर्नाटक को बांध की ऊंचाई 524 मीटर तक बढ़ाने की अनुमति दी थी। इसलिए राज्य को पूरा अधिकार है कि वह इस परियोजना को लागू करे।
उन्होंने कहा कि यदि परियोजना में और देरी हुई तो भूमि अधिग्रहण जैसी लागतें बढ़ जाएंगी, जिसे उन्होंने लगभग 1 लाख करोड़ रुपये बताया।
केंद्र से अपील और पीएम से मुलाकात की योजना
शिवकुमार ने सभी कर्नाटक के सांसदों और केंद्रीय मंत्रियों से अनुरोध किया कि वे पार्टी की सीमाओं से ऊपर उठकर राज्य के हितों की रक्षा करें। उन्होंने कहा, "मैं हाथ जोड़कर अपील करता हूं कि हमारे सभी सांसद इस मुद्दे पर एकजुट हों। केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय में वी. सोम्मन्ना मंत्री हैं, मुझे उम्मीद है कि वे हमारी चिंताओं को उचित रूप से पेश करेंगे।"
शिवकुमार ने यह भी कहा कि कर्नाटक सरकार जल्द ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय जल शक्ति मंत्री से मुलाकात करेगी, ताकि 2013 से लंबित गजट अधिसूचना को जारी किया जा सके, जो बांध की ऊंचाई बढ़ाने के लिए जरूरी है।
“यह राजनीतिक नहीं, तकनीकी मामला है”
शिवकुमार ने कहा, "यह कोई राजनीतिक मुद्दा नहीं है। महाराष्ट्र की आपत्तियों का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है। वहां बाढ़ आती है तो उसे वे खुद सुलझाएं। कर्नाटक ने बहुत धैर्य रखा है।"
उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र के पत्र और कर्नाटक की प्रतिक्रिया की प्रति सभी कर्नाटक सांसदों को भेजी जाएगी।
पृष्ठभूमि
आलमट्टी बांध कर्नाटक की एक प्रमुख जल परियोजना है, जिससे सिंचाई, जल आपूर्ति और ऊर्जा उत्पादन में मदद मिलती है। इसके ऊंचाई बढ़ाने का प्रस्ताव लंबे समय से लंबित है, जिस पर अब महाराष्ट्र के विरोध के चलते विवाद फिर उभर आया है।
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