एसबीआई को उम्मीद – जून की मौद्रिक समीक्षा में आरबीआई करेगा 50 बेसिस पॉइंट की बड़ी दर कटौती

भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) 6 जून को होने वाली आगामी मौद्रिक नीति बैठक में रेपो रेट में 50 बेसिस पॉइंट की बड़ी कटौती की घोषणा कर सकता है..

एसबीआई को उम्मीद – जून की मौद्रिक समीक्षा में आरबीआई करेगा 50 बेसिस पॉइंट की बड़ी दर कटौती
03-06-2025 - 11:44 AM
22-04-2026 - 05:53 PM

मुंबई। भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) 6 जून को होने वाली आगामी मौद्रिक नीति बैठक में रेपो रेट में 50 बेसिस पॉइंट की बड़ी कटौती की घोषणा कर सकता है। एसबीआई का मानना है कि यह कदम एक नए कर्ज चक्र की शुरुआत कर सकता है और समग्र आर्थिक विकास को समर्थन देगा।

रिपोर्ट में कहा गया, "हम जून 2025 की नीति में 50 बेसिस पॉइंट की दर कटौती की उम्मीद करते हैं, क्योंकि एक बड़ी दर कटौती कर्ज चक्र को फिर से सक्रिय कर सकती है।" एसबीआई का यह भी अनुमान है कि पूरे नरमी चक्र के दौरान कुल दर कटौती 100 बेसिस पॉइंट तक पहुंच सकती है।

रिपोर्ट में यह भी जोर दिया गया है कि वर्तमान में बैंकिंग प्रणाली में तरलता (लिक्विडिटी) लंबे समय से अधिशेष स्थिति में बनी हुई है। परिणामस्वरूप, बैंक अपनी देनदारियों को तेजी से समायोजित कर रहे हैं, जहां बचत खातों पर ब्याज दरें पहले ही न्यूनतम स्तर 2.70 प्रतिशत पर आ चुकी हैं। इसके साथ ही फरवरी 2025 से अब तक फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) की दरों में भी 30 से 70 बेसिस पॉइंट तक की कटौती हो चुकी है।

एसबीआई को उम्मीद है कि दर कटौती का यह प्रभावी संप्रेषण (transmission) आगे भी जारी रहेगा, जो आने वाले महीनों में आर्थिक गतिविधियों को समर्थन देगा।

रिपोर्ट के अनुसार, घरेलू वित्तीय परिस्थितियां अब स्थिर हो गई हैं और मुद्रास्फीति आरबीआई की सहनशीलता सीमा के भीतर बनी हुई है। मजबूत व्यापक आर्थिक (macroeconomic) आधारों के मद्देनज़र, मौद्रिक नीति का फोकस अब विकास की गति को बनाए रखने की दिशा में होना चाहिए।

भारतीय जीडीपी
रिपोर्ट के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2024-25 की चौथी तिमाही में भारत की जीडीपी 7.4 प्रतिशत की दर से बढ़ी है, जो पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में दर्ज 8.4 प्रतिशत की तुलना में थोड़ी कमी है। यह वृद्धि मुख्य रूप से पूंजी निर्माण (capital formation) में सालाना 9.4 प्रतिशत की बढ़ोतरी के कारण हुई है।

एसबीआई ने कुछ सकारात्मक व्यापक आर्थिक कारकों का भी हवाला दिया है, जैसे कि भारतीय मौसम विभाग द्वारा सामान्य से बेहतर मानसून का पूर्वानुमान, अच्छी फसल पैदावार और वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में नरमी। इन सभी कारणों को ध्यान में रखते हुए बैंक ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) आधारित मुद्रास्फीति का अनुमान घटाकर लगभग 3.5 प्रतिशत कर दिया है, जिसमें और गिरावट की संभावना जताई गई है।

इसके अलावा, रिपोर्ट में भारतीय रिजर्व बैंक की ताजा वार्षिक रिपोर्ट का हवाला देते हुए घरेलू परिवारों की बचत में सुधार की बात कही गई है, जिससे यह उम्मीद जताई गई है कि आर्थिक विस्तार के लिए पर्याप्त पूंजी उपलब्ध रहेगी और मांग आधारित मुद्रास्फीति नहीं बढ़ेगी।

कुल मिलाकर, मुद्रास्फीति नियंत्रण में है और तरलता की स्थिति भी मजबूत है। ऐसे में एसबीआई द्वारा "जम्बो" दर कटौती की सिफारिश यह दर्शाती है कि बैंक को आगामी वित्त वर्ष में आरबीआई की विकास और मूल्य स्थिरता के बीच संतुलन बनाने की क्षमता पर पूरा भरोसा है।

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THE NEWS THIKANA, संपादकीय डेस्क यह द न्यूजठिकाना डॉट कॉम की संपादकीय डेस्क है। डेस्क के संपादकीय सदस्यों का प्रयास रहता है कि अपने पाठकों को निष्पक्षता और निर्भीकता के साथ विभिन्न विषयों के सच्चे, सटीक, विश्वसनीय व सामयिक समाचारों के अलावाआवश्यक उल्लेखनीय विचारों को भी सही समय पर अवगत कराएं।