क्या लापरवाही बनी रणथंभौर में रेंज ऑफिसर की मौत की वजह?
रणथंभौर टाइगर रिजर्व में एक दर्दनाक घटना में रेंज ऑफिसर देवेंद्र चौधरी की मौत हो गई। बताया जा रहा है कि एक टाइगर ने उन पर हमला किया और उन्हें मुंह में दबाकर जंगल के भीतर ले गया। बाद में उनका शव बरामद किया गया। अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या यह सिर्फ एक दुर्भाग्यपूर्ण हादसा था, या फिर वन विभाग की किसी गंभीर चूक का परिणाम?
रणथंभौर टाइगर रिजर्व में एक दर्दनाक घटना में रेंज ऑफिसर देवेंद्र चौधरी की मौत हो गई। बताया जा रहा है कि एक टाइगर ने उन पर हमला किया और उन्हें मुंह में दबाकर जंगल के भीतर ले गया। बाद में उनका शव बरामद किया गया। अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या यह सिर्फ एक दुर्भाग्यपूर्ण हादसा था, या फिर वन विभाग की किसी गंभीर चूक का परिणाम?
बीते वर्ष एक वरिष्ठ इतिहासकार ने रणथंभौर सफारी के दौरान कई असामान्य चीजें देखीं। खासकर पदम तालाब, राजबाग और मलिक तालाब के आसपास के क्षेत्र में, जोगी महल गेट के पास कुछ टाइगर झाड़ियों में दीवार के करीब बैठे नजर आए। उन्होंने पाया कि इन बाघों की नजर दीवार के पीछे बने एक कमरे पर टिकी हुई थी, जहां से भैंस की आवाजें आ रही थीं। दरअसल, वनकर्मी वहां एक जिंदा भैंस को रखकर उसे ‘एरोहेड’ नामक बाघिन के लिए चारे के रूप में इस्तेमाल कर रहे थे।
इस स्थिति पर विशेषज्ञों ने पहले ही चेतावनी दी थी कि बाघों को इस तरह इंसानों के करीब लाना भारी पड़ सकता है। इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, रेंज ऑफिसर देवेंद्र की मौत भी ऐसे ही एक इलाके में महज़ कुछ मीटर की दूरी पर हुई।
विशेषज्ञों की राय: सीधे तौर पर लापरवाही का नतीजा
वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि यह पूरी घटना वन विभाग की लापरवाही का प्रत्यक्ष परिणाम है। रणथंभौर किला, जोगी महल और गणेश मंदिर के आस-पास लगभग 5 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में 15 बाघ सक्रिय हैं। यह क्षेत्र पर्यटकों और तीर्थयात्रियों की आम आवाजाही वाला है। उनमें से 9 बाघों को जिंदा चारे की आदत लग चुकी है, जिनमें 6 बाघ तो शुरुआत से ही ऐसे ही पाले गए हैं। कई वर्षों तक भैंस के बछड़ों को नियमित अंतराल पर इन बाघों के लिए छोड़ा गया, जिससे उनका व्यवहार बदल गया।
पिछले महीने एक बाघिन द्वारा गार्ड पर हमला और एक बच्चे की हत्या के बावजूद उसे अन्यत्र भेजने का सुझाव खारिज कर दिया गया था। वन विभाग ने बाघों के आक्रामक व्यवहार के कई संकेतों को नजरअंदाज कर दिया।
बाघों में इंसानों का पीछा करने की आदत
एरोहेड नाम की बाघिन ने तीन अन्य बाघों के साथ चौथा शावक जन्मा था। उसके शावकों की सुरक्षा के मद्देनजर अगस्त 2023 से उसे जिंदा चारा देना शुरू किया गया। अब उसके तीन युवा शावक भी मुख्य मार्गों पर भटकने लगे हैं, जहां तीर्थयात्री और पर्यटक नियमित आते हैं। इनमें से एक बाघिन ‘कंकती’ सबसे ज्यादा निडर साबित हुई। 13 अप्रैल को उसने जोगी महल के बाहर एक गार्ड बाबू पर हमला कर दिया, लेकिन गार्ड ने उसे पहचान कर आवाज लगाई जिससे वह बच गया।
वाल्मीकि थापर की चेतावनी: खतरनाक बाघों पर कार्रवाई जरूरी
प्रसिद्ध वन्यजीव विशेषज्ञ वाल्मीकि थापर, जो पिछले लगभग 50 वर्षों से रणथंभौर में बाघों पर अध्ययन कर रहे हैं, कहते हैं कि यदि कोई बाघ मानव पर हमला करता है, तो उसे अन्यत्र भेजना आवश्यक है। बाघों का संरक्षण आवश्यक है, लेकिन नरभक्षी बाघों को जंगल में खुला छोड़ना ठीक नहीं। कुछ बाघ बेहद खतरनाक हत्यारे बन जाते हैं और उन्हें उसी तरह नियंत्रित करना चाहिए जैसे मानव अपराधियों को किया जाता है। यही तरीका है जिससे इंसानों और बाघों का भविष्य सुरक्षित रह सकता है।
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