‘चेहरा पसंद नहीं, केस लगवाओ’: पीएम-सीएम हटाने वाले बिलों पर राहुल गांधी का हमला
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने बुधवार को केंद्र सरकार के नए विधेयकों पर कड़ा प्रहार किया। इन विधेयकों के तहत प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों के मंत्रियों को 30 दिन से अधिक की गिरफ्तारी/हिरासत की स्थिति में पद से हटाने का प्रस्ताव..
नयी दिल्ली। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने बुधवार को केंद्र सरकार के नए विधेयकों पर कड़ा प्रहार किया। इन विधेयकों के तहत प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों के मंत्रियों को 30 दिन से अधिक की गिरफ्तारी/हिरासत की स्थिति में पद से हटाने का प्रस्ताव है।
राहुल गांधी ने कहा, "हम मध्यकालीन दौर में लौट रहे हैं, जब राजा अपनी मर्ज़ी से किसी को भी हटा सकता था। यहाँ चुने हुए प्रतिनिधि की कोई अहमियत नहीं बचती। उसे आपका चेहरा पसंद नहीं, तो वह ईडी से केस लगवा देगा और 30 दिनों में चुना हुआ प्रतिनिधि ख़त्म कर दिया जाएगा।"
बिलों में क्या है?
- संविधान (130वां संशोधन) विधेयक — पीएम, राज्यों और दिल्ली एनसीटी पर लागू।
- जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक।
- केंद्र शासित प्रदेश शासन (संशोधन) विधेयक।
इन तीनों में यह प्रावधान है कि अगर किसी पीएम, सीएम या मंत्री को ऐसे आरोप पर 30 दिनों से अधिक हिरासत में रखा जाता है, जिसकी सज़ा पाँच साल या उससे ज़्यादा हो सकती है, तो उन्हें पद छोड़ना होगा।
विपक्ष का विरोध क्यों?
विपक्षी दलों का कहना है कि यह विधेयक केवल आरोपों के आधार पर कार्रवाई की बात करता है, न कि दोषसिद्धि के आधार पर।
- ममता बनर्जी (मुख्यमंत्री, पश्चिम बंगाल) ने ट्वीट किया—
“मैं इसे सुपर-इमरजेंसी से भी आगे का कदम मानती हूँ। यह भारत में लोकतंत्र और संघीय ढांचे को हमेशा के लिए ख़त्म करने का प्रयास है। यह लोकतंत्र की मौत की घंटी है।” - असदुद्दीन ओवैसी (AIMIM सांसद) ने कहा कि ये विधेयक “सत्ता के विभाजन” (विधानमंडल, कार्यपालिका और न्यायपालिका) के सिद्धांत का उल्लंघन करते हैं।
- कांग्रेस नेताओं मनीष तिवारी और केसी वेणुगोपाल ने भी इसका विरोध किया।
विपक्ष का तर्क है कि यह “दोष सिद्ध होने से पहले निर्दोष माने जाने” के प्रावधान को बदल देगा। यानी किसी भी सिटिंग पीएम, सीएम या मंत्री को केवल गिरफ्तारी या 30 दिनों की हिरासत पर ही पद से हटाया जा सकता है।
सदन में हंगामा
गृह मंत्री अमित शाह ने बुधवार को ये तीनों बिल संसद में पेश किए, जिसके बाद विपक्षी सांसदों ने कड़ा विरोध जताया।
- विपक्षी सदस्यों ने बिल की प्रतियाँ फाड़ दीं।
- कई सांसद सदन के वेल में आकर नारेबाज़ी करने लगे।
- सरकार ने बिलों को संयुक्त संसदीय समिति (JPC) को भेजने का निर्णय लिया।
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