सुप्रीम कोर्ट द्वारा चुनावी बॉन्ड रद्द के जाने के बावजूद भाजपा की तिजोरी और भरी
फरवरी 2024 में चुनावी बॉन्ड को रद्द किए जाने का भाजपा की वित्तीय स्थिति पर नकारात्मक असर पड़ने के बजाय, 2024-25 में उसकी दान-राशि और बढ़ गई। अकेले चुनावी ट्रस्टों (Electoral Trusts) ने इस अवधि में भाजपा को 3,577 करोड़ रुपये से अधिक की राशि..
नयी दिल्ली। फरवरी 2024 में चुनावी बॉन्ड को रद्द किए जाने का भाजपा की वित्तीय स्थिति पर नकारात्मक असर पड़ने के बजाय, 2024-25 में उसकी दान-राशि और बढ़ गई। अकेले चुनावी ट्रस्टों (Electoral Trusts) ने इस अवधि में भाजपा को 3,577 करोड़ रुपये से अधिक की राशि वितरित की।
वित्त वर्ष 2023-24 में भाजपा को स्वैच्छिक योगदान के रूप में कुल 3,967 करोड़ रुपये प्राप्त हुए थे, जिनमें से 1,686 करोड़ रुपये चुनावी बॉन्ड के जरिए और 856 करोड़ रुपये ट्रस्टों के माध्यम से आए थे। चुनावी बॉन्ड समाप्त होने के बाद भी, पार्टीवार योगदान का पूरा ब्योरा सार्वजनिक किए बिना आंशिक गुमनामी बनाए रखने के इच्छुक कॉरपोरेट दानदाताओं ने चुनावी ट्रस्ट (ईटी) के रास्ते को अपनाया और भाजपा को शीर्ष लाभार्थी बनाए रखा।
चुनाव आयोग (ईसी) की वेबसाइट पर उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, चुनावी ट्रस्टों के जरिए वितरित लगभग 4,276 करोड़ रुपये के कुल योगदान में से 83.6% हिस्सा केंद्र में सत्तारूढ़ भाजपा को मिला। 2023-24 की तुलना में यह इस मार्ग से भाजपा को मिलने वाले कॉरपोरेट दान में चार गुना से भी अधिक की वृद्धि दर्शाता है। कांग्रेस को 7.3% और तृणमूल कांग्रेस को 3.6% योगदान प्राप्त हुआ।
चुनावी ट्रस्टों के माध्यम से मिलने वाला दान, राजनीतिक दलों को प्राप्त कुल योगदान का केवल एक हिस्सा है। अन्य स्रोतों में व्यक्तिगत दानदाता, कॉरपोरेट, संस्थान और कल्याणकारी निकाय शामिल हैं, जो सीधे दान देते हैं। पिछले कुछ वर्षों में गैर-ट्रस्ट दान की राशि लगातार ट्रस्टों से मिलने वाले योगदान से अधिक रही है।
वित्त वर्ष 2024-25 में ट्रस्टों के माध्यम से भाजपा को प्राप्त 3,577.5 करोड़ रुपये में से 2,180.7 करोड़ रुपये प्रूडेंट इलेक्टोरल ट्रस्ट (ईटी) से, 757.6 करोड़ रुपये प्रोग्रेसिव ईटी से, 460 करोड़ रुपये एबी जनरल ईटी से, 150 करोड़ रुपये न्यू डेमोक्रेटिक ईटी से, 30.1 करोड़ रुपये हार्मनी ईटी से, 21 करोड़ रुपये ट्रायम्फ ईटी से, 5 करोड़ रुपये जयभारत ईटी से, 3 करोड़ रुपये समाज ईटी से, 9.5 लाख रुपये जनकल्याण ईटी से और 7.75 लाख रुपये आइन्ज़िगार्टिग ईटी से मिले।
कांग्रेस को 2024-25 में प्रूडेंट से 216.3 करोड़ रुपये, प्रोग्रेसिव से 77.3 करोड़ रुपये, एबी जनरल ईटी से 15 करोड़ रुपये, न्यू डेमोक्रेटिक ईटी से 5 करोड़ रुपये और जनकल्याण ईटी से 9.5 लाख रुपये प्राप्त हुए। इस तरह 2024-25 में कांग्रेस को मिले कुल 517 करोड़ रुपये के योगदान में से 313 करोड़ रुपये से अधिक ट्रस्ट मार्ग से आए।
प्रूडेंट ने राजनीतिक दलों को दान देने वाले सबसे बड़े ट्रस्ट के रूप में अपनी स्थिति बरकरार रखी। उसने पिछले वित्त वर्ष में 15 दलों को कुल 2,668 करोड़ रुपये वितरित किए। टाटा समूह से जुड़े प्रोग्रेसिव ईटी का स्थान काफी पीछे रहा, जिसने 2024-25 में कुल 915 करोड़ रुपये का योगदान दिया, जिसमें से 757 करोड़ रुपये भाजपा को, 77 करोड़ रुपये कांग्रेस को और 10 करोड़ रुपये आठ अन्य दलों को दिए गए।
प्रूडेंट की 2,668 करोड़ रुपये की राशि का वितरण इस प्रकार हुआ—भाजपा को 2,180.7 करोड़ रुपये; कांग्रेस को 216.3 करोड़ रुपये; तृणमूल कांग्रेस को 92 करोड़ रुपये; वाईएसआर कांग्रेस पार्टी को 88 करोड़ रुपये; तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) को 40 करोड़ रुपये; आम आदमी पार्टी (आप) को 16.4 करोड़ रुपये; भारत धर्म जन सेना को 10 करोड़ रुपये; बीआरएस, जेडीयू, बीजेडी और आजसू को 5-5 करोड़ रुपये; सिक्किम डेमोक्रेटिक फ्रंट को 2.5 करोड़ रुपये; एलजेपी और एनसीपी को 1-1 करोड़ रुपये; तथा प्रजा शांति पार्टी को 50 लाख रुपये।
एबी जनरल ईटी ने भाजपा को 460 करोड़ रुपये और कांग्रेस को 15 करोड़ रुपये के कॉरपोरेट दान दिए। महिंद्रा समूह समर्थित न्यू डेमोक्रेटिक ईटी ने अपने कुल 160 करोड़ रुपये के योगदान में से 150 करोड़ रुपये भाजपा को दिए, जबकि कांग्रेस और शिवसेना-यूबीटी को 5-5 करोड़ रुपये मिले। ट्रायम्फ ईटी ने भाजपा को 21 करोड़ रुपये और तेलुगु देशम पार्टी को 4 करोड़ रुपये दिए। हार्मनी ईटी ने भाजपा को 30.1 करोड़ रुपये, शिवसेना-यूबीटी को 3 करोड़ रुपये और एनसीपी-शरद पवार को 2 करोड़ रुपये का योगदान दिया। जन प्रगति इलेक्टोरल ट्रस्ट ने शिवसेना को 1 करोड़ रुपये दिए।
2024-25 में कांग्रेस को प्राप्त कुल राशि, 2023-24 में चुनावी बॉन्ड के जरिए मिले 828 करोड़ रुपये से काफी कम रही, हालांकि यह 2022-23 (जो कि आम चुनाव का वर्ष नहीं था) में बॉन्ड से मिली 171 करोड़ रुपये की आय से अधिक थी। इसी तरह, तृणमूल कांग्रेस को 2024-25 में मिले 184.5 करोड़ रुपये—जिनमें से 153.5 करोड़ रुपये ट्रस्टों के माध्यम से आए—2023-24 में बॉन्ड से मिले 612 करोड़ रुपये के मुकाबले कहीं कम रहे। बीजेडी, जिसे 2023-24 में बॉन्ड के जरिए 245.5 करोड़ रुपये मिले थे, उसे 2024-25 में कुल 60 करोड़ रुपये का दान मिला, जिसमें 35 करोड़ रुपये ट्रस्टों से थे। बीआरएस को न केवल 2023-24 में बॉन्ड से मिले 495 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ, बल्कि ट्रस्टों से मिलने वाली उसकी राशि भी घटकर 2023-24 के 85 करोड़ रुपये से 2024-25 में 15 करोड़ रुपये रह गई।
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