हॉर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने की आशंका को कम आंका? ईरान के कदम से ट्रंप प्रशासन घिरा
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump के प्रशासन ने यह अनुमान काफी कम लगाया था कि अमेरिकी सैन्य हमलों के जवाब में ईरान Strait of Hormuz को बंद करने जैसा बड़ा कदम उठा सकता..
वॉशिंगटन। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump के प्रशासन ने यह अनुमान काफी कम लगाया था कि अमेरिकी सैन्य हमलों के जवाब में ईरान Strait of Hormuz को बंद करने जैसा बड़ा कदम उठा सकता है। यही वजह है कि अब इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग में संकट के बाद वॉशिंगटन को आर्थिक और ऊर्जा प्रभावों से निपटने के लिए जल्दबाजी में रणनीति बनानी पड़ रही है।
सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार, आंतरिक चर्चाओं से जुड़े अधिकारियों ने बताया कि Pentagon और अमेरिकी National Security Council ने ईरान के खिलाफ चल रहे सैन्य अभियान की योजना बनाते समय इस संभावना का पूरा आकलन नहीं किया था।
अब हालात ऐसे बन गए हैं जिन्हें कुछ अधिकारियों ने “सबसे खराब स्थिति” बताया है क्योंकि वैश्विक तेल आपूर्ति पर दबाव बढ़ गया है और ऊर्जा बाजारों में अस्थिरता पैदा हो गई है।
रणनीतिक योजना में कमी
सूत्रों के मुताबिक, सैन्य अभियान शुरू होने से पहले की बैठकों में अमेरिकी ट्रेजरी और ऊर्जा विभाग के अधिकारी मौजूद तो थे, लेकिन आम तौर पर ऐसे फैसलों में जो विस्तृत आर्थिक विश्लेषण और विभागों के बीच समन्वय होता है, वह इस बार कम रहा।
अमेरिकी ट्रेजरी सचिव Scott Bessent और ऊर्जा सचिव Chris Wright योजना और क्रियान्वयन की प्रक्रिया में शामिल थे।
रिपोर्ट के अनुसार ट्रंप की सीमित सलाहकार समूह पर निर्भर रहने की शैली के कारण विभिन्न सरकारी एजेंसियों के बीच संभावित आर्थिक परिणामों पर व्यापक चर्चा नहीं हो सकी।
कुछ वरिष्ठ अधिकारियों ने बंद कमरे में सांसदों को यह भी स्वीकार किया कि ईरान द्वारा जलडमरूमध्य बंद करने की संभावना के लिए पूरी तैयारी नहीं की गई थी।
कूटनीतिक और ऊर्जा क्षेत्र में हैरानी
हॉर्मुज में पैदा हुई स्थिति से कई राजनयिक, पूर्व अमेरिकी आर्थिक अधिकारी और ऊर्जा क्षेत्र के विशेषज्ञ हैरान हैं।
एक पूर्व अमेरिकी अधिकारी ने कहा, “दशकों से अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा नीति का मूल सिद्धांत यही रहा है कि इस तरह की स्थिति को रोकने की योजना हमेशा तैयार रहे। इसलिए यह देखकर मैं हैरान हूं।”
जहाजों को सैन्य सुरक्षा नहीं
क्षेत्र में काम कर रही शिपिंग कंपनियों ने तेल टैंकरों को सुरक्षा देने के लिए अमेरिकी नौसेना से बार-बार सैन्य एस्कॉर्ट की मांग की है, लेकिन अब तक इसे मंजूरी नहीं मिली है।
उद्योग से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक, अमेरिकी सैन्य अधिकारियों ने कहा है कि उन्हें अभी तक जहाजों को एस्कॉर्ट देने का आदेश नहीं मिला है और नौसेना के जहाजों के लिए खतरा अभी भी बहुत अधिक है।
सैन्य जोखिम
अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि ईरान के ड्रोन, मिसाइल और समुद्री बारूदी सुरंगें (सी माइंस) हॉर्मुज जैसे संकरे समुद्री मार्ग से गुजरने वाले जहाजों के लिए बड़ा खतरा हैं।
सैन्य अभ्यासों में पहले ही यह चेतावनी दी गई थी कि संघर्ष की स्थिति में जहाज हॉर्मुज, Bab-el-Mandeb Strait और Red Sea जैसे चोक पॉइंट्स में फंस सकते हैं, जिससे वे हमलों के लिए आसान लक्ष्य बन जाएंगे।
ऊर्जा सचिव क्रिस राइट ने भी स्वीकार किया कि फिलहाल नौसेना की क्षमता सीमित है। उन्होंने कहा, “यह जल्द होगा, लेकिन अभी नहीं। हम इसके लिए पूरी तरह तैयार नहीं हैं।”
ईरान का दबाव बनाने का संकेत
इस बीच ईरान के नए सर्वोच्च नेता Mojtaba Khamenei ने संकेत दिया है कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य को बंद रखना दुश्मनों पर दबाव बनाने का एक “रणनीतिक उपकरण” हो सकता है।
यह बयान ऐसे समय आया है जब वैश्विक ऊर्जा बाजार पहले से ही चिंतित हैं, क्योंकि मध्य-पूर्व से तेल और एलएनजी की बड़ी मात्रा इसी समुद्री मार्ग से गुजरती है।
ट्रंप ने कम करके बताया असर
बाजारों में उतार-चढ़ाव के बावजूद ट्रंप ने आर्थिक प्रभाव को कम करके बताया। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा, “अमेरिका दुनिया का सबसे बड़ा तेल उत्पादक है। इसलिए जब तेल की कीमतें बढ़ती हैं तो हम ज्यादा कमाते हैं।”
ट्रंप ने कहा कि उनका मुख्य उद्देश्य ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना है।
आपात कदमों पर विचार
तेल बाजार में दबाव कम करने के लिए अमेरिकी प्रशासन कई आपात कदमों पर विचार कर रहा है।
- समुद्र में फंसे रूसी तेल के शिपमेंट पर अस्थायी रूप से प्रतिबंध हटाया गया है।
- Jones Act में अस्थायी छूट देने पर विचार किया जा रहा है, ताकि ऊर्जा उत्पादों की आपूर्ति आसान हो सके।
- गर्मियों के दौरान ईंधन उत्पादन नियमों में ढील देने के विकल्प भी देखे जा रहे हैं।
हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि ये कदम वैश्विक तेल आपूर्ति में आई बाधाओं के प्रभाव को पूरी तरह कम नहीं कर पाएंगे।
ऊर्जा विशेषज्ञ Clayton Seigle के मुताबिक, “ये उपाय बहुत सीमित राहत दे सकते हैं, क्योंकि असली समस्या दुनिया भर में कच्चे तेल और रिफाइंड ईंधन की आपूर्ति को लेकर बढ़ती चिंता है।”
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