IAS एसोसिएशन ने CEC ज्ञानेश कुमार के परिवार पर हुए ट्रोलिंग की निंदा की
इंडियन एडमिनिस्ट्रेटिव सर्विस (IAS) एसोसिएशन ने शुक्रवार को मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के परिवार को लेकर सोशल मीडिया पर हो रही ट्रोलिंग की कड़ी निंदा की। यह विवाद उस समय उठा जब कांग्रेस नेता राहुल गांधी समेत विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग पर “वोट चोरी” (vote chori) के आरोप..
नयी दिल्ली। इंडियन एडमिनिस्ट्रेटिव सर्विस (IAS) एसोसिएशन ने शुक्रवार को मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के परिवार को लेकर सोशल मीडिया पर हो रही ट्रोलिंग की कड़ी निंदा की। यह विवाद उस समय उठा जब कांग्रेस नेता राहुल गांधी समेत विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग पर “वोट चोरी” (vote chori) के आरोप लगाए।
एसोसिएशन ने X पर लिखा, “CEC के परिवार, जो खुद भी प्रतिष्ठित सिविल सेवक हैं, पर की जा रही अनुचित आलोचना चिंता का विषय है। इस तरह के व्यक्तिगत हमलों की हम कड़ी निंदा करते हैं। हम सार्वजनिक सेवा में गरिमा और ईमानदारी के पक्षधर हैं।”
ज्ञानेश कुमार और परिवार पर निशाना
CEC ज्ञानेश कुमार (1988 बैच, केरल कैडर) जनवरी 2024 में सहकारिता मंत्रालय में सचिव पद से सेवानिवृत्त हुए थे। मार्च 2024 में उन्हें चुनाव आयुक्त बनाया गया और इस साल फरवरी में उन्होंने CEC का कार्यभार संभाला। हाल ही में उनकी बेटियों समेत परिवार को सोशल मीडिया पर निशाना बनाया गया।
राहुल गांधी का आरोप – “वोट चोरी”
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने बिहार के स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) अभ्यास और कर्नाटक की एक लोकसभा सीट पर 2024 चुनाव में गड़बड़ी का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि चुनाव आयोग बीजेपी को फायदा पहुँचाने के लिए “vote theft” कर रहा है।
CEC का पलटवार
ज्ञानेश कुमार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा, “या तो राहुल गांधी हलफनामा दें और अपने आरोप साबित करें या फिर देश से माफी माँगें। तीसरा कोई विकल्प नहीं है। सात दिन में हलफनामा नहीं आया तो ये सभी आरोप बेबुनियाद माने जाएंगे।”
कांग्रेस का तीखा हमला
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने शुक्रवार को चुनाव आयोग पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा..
- “चुनाव आयोग केंद्र सरकार के दबाव में काम कर रहा है।”
- “65 लाख लोगों के वोट छीने जा रहे हैं।”
- “SIR अभ्यास में दलितों और ओबीसी मतदाताओं के नाम जानबूझकर हटाए गए।”
रमेश ने कहा कि जब लोकतंत्र और संविधान ही खतरे में हैं तो शून्यकाल और प्रश्नकाल का क्या मतलब रह जाता है?
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