भारत-अमेरिका व्यापार समझौता अंतिम चरण में, पाकिस्तान यह समझने में जुटा कि आगे क्या होगा..
भारत और अमेरिका के बीच नए व्यापार समझौते को लेकर लंबे समय से चल रही बातचीत अब लगभग खत्म होने वाली है। दोनों देशों के अधिकारियों के अनुसार, यह डील अब “फाइनल स्टेज” में है और नवंबर खत्म होने से पहले इसके साइन होने की प्रबल संभावना है। नयी दिल्ली में यह उम्मीद बढ़ गई है कि जैसे ही यह समझौता लागू होगा, अमेरिका द्वारा भारतीय उत्पादों पर लगाए गए लगभग 50% तक के भारी टैरिफ में बड़ी कमी..
नयी दिल्ली। भारत और अमेरिका के बीच नए व्यापार समझौते को लेकर लंबे समय से चल रही बातचीत अब लगभग खत्म होने वाली है। दोनों देशों के अधिकारियों के अनुसार, यह डील अब “फाइनल स्टेज” में है और नवंबर खत्म होने से पहले इसके साइन होने की प्रबल संभावना है।
नयी दिल्ली में यह उम्मीद बढ़ गई है कि जैसे ही यह समझौता लागू होगा, अमेरिका द्वारा भारतीय उत्पादों पर लगाए गए लगभग 50% तक के भारी टैरिफ में बड़ी कमी आएगी।
दक्षिण एशिया में हलचल – पाकिस्तान की बढ़ी चिंता
संभावित टैरिफ कटौती ने पूरे दक्षिण एशिया में नई गणनाएँ शुरू कर दी हैं। खास तौर पर पाकिस्तान इस समझौते के हर पहलू पर असामान्य रूप से नज़र रखे हुए है।
इस्लामाबाद में राजनयिकों का मानना है कि यह समझौता बताएगा कि अगले दशक में अमेरिका अपनी आर्थिक रणनीति को दक्षिण एशिया में किस दिशा में ले जाना चाहता है।
यदि डील सुचारु रूप से आगे बढ़ती है, तो भारत-अमेरिका व्यापार 2030 तक 500 अरब डॉलर तक पहुँच सकता है, जिसने सभी पड़ोसी देशों का ध्यान खींचा है।
पाकिस्तान के डॉन अख़बार ने एक राजनयिक के हवाले से लिखा, “पाकिस्तान और अन्य दक्षिण एशियाई देश उम्मीद कर रहे हैं कि यह समझौता अमेरिका को पूरे क्षेत्र के साथ व्यापार बढ़ाने के लिए प्रेरित करेगा।”
इसके साथ ही पाकिस्तान चाहता है कि अमेरिका छोटे दक्षिण एशियाई देशों को भी वही आर्थिक प्राथमिकता दे, जो भारत को दी जा रही है।
US–Pakistan व्यापार बयान क्यों रुका है?
इसी वजह से अमेरिका-पाकिस्तान व्यापार पर संयुक्त बयान अभी भी जारी नहीं हुआ है।
पाकिस्तानी राजनयिक अभी भी US Trade Representative (USTR) दफ्तर के साथ अंतिम बिंदुओं पर बातचीत कर रहे हैं।
दोनों तरफ के अधिकारी उन “छूटे हुए सिरों” (loose ends) पर काम कर रहे हैं जिन्हें फाइनल किए बिना बयान जारी करना संभव नहीं।
इस्लामाबाद का मुख्य सवाल
क्या भारत को मिलने वाली अमेरिका की नयी टैरिफ छूटें,
क्या पाकिस्तान भी अमेरिकी कच्चे माल से बने उत्पादों पर उसी तरह इस्तेमाल कर पाएगा?
इस सवाल का जवाब मिलना अभी बाकी है—इसीलिए पाकिस्तान फिलहाल चुप रहना पसंद कर रहा है।
एक सूत्र ने कहा, “पाकिस्तान किसी भी घोषणा में जल्दबाज़ी नहीं कर रहा। वे भारत-अमेरिका समझौते के अंतिम रूप लेने का इंतज़ार कर रहे हैं।”
पाकिस्तान के वित्त मंत्री मुहम्मद औरंगज़ेब, जो अक्टूबर में वर्ल्ड बैंक मीटिंग्स के लिए अमेरिका गए थे, कह चुके हैं कि दो-चार हफ्तों में पाकिस्तान-अमेरिका व्यापार पर एक आधिकारिक बयान जारी किया जाएगा।
भारत पर अमेरिकी टैरिफ में भारी गिरावट की तैयारी
अमेरिका ने 1 अगस्त को पाकिस्तानी उत्पादों पर 19% टैरिफ लगाया था, जबकि भारत पर 50% टैरिफ लागू है यानी पाकिस्तान को एक दुर्लभ व्यापारिक बढ़त मिली हुई है।
पहले यह टैरिफ भारत के लिए 26% था लेकिन जब भारत ने रूस से तेल आयात बढ़ाया, तो इसे दोगुना बढ़ाकर 50% कर दिया गया।
अब भारत द्वारा रूस से तेल खरीद में कमी किए जाने के बाद, अमेरिकी अधिकारी कथित तौर पर टैरिफ कम करने को तैयार हो गए हैं जो अंतिम व्यापार समझौते के बाद लागू हो सकता है।
आने वाले सप्ताह तय करेंगे भविष्य
अब मामला बस अंतिम मोड़ पर है। वॉशिंगटन और नयी दिल्ली तैयार हैं, और इस्लामाबाद भी इंतज़ार कर रहा है क्योंकि भारत-अमेरिका समझौता यह स्पष्ट करेगा कि अमेरिका की नयी आर्थिक पहुँच में पाकिस्तान और पूरे दक्षिण एशिया के लिए कितनी जगह बचेगी।
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