‘500 रुपये दीजिए, सह-मालिक बनिए’: अमूल जैसे सहकारी मॉडल पर भारत टैक्सी, 50 रुपये के योगदान से 1.25 लाख करोड़ की अमूल का उदाहरण
केंद्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह ने सोमवार को भारत टैक्सी की शुरुआत की। यह एक सहकारी राइड-हेलिंग प्लेटफॉर्म है, जो ड्राइवरों को मुनाफे में हिस्सेदारी और सेवा का सह-मालिक बनने का अवसर देता..
केंद्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह ने सोमवार को भारत टैक्सी की शुरुआत की। यह एक सहकारी राइड-हेलिंग प्लेटफॉर्म है, जो ड्राइवरों को मुनाफे में हिस्सेदारी और सेवा का सह-मालिक बनने का अवसर देता है।
दिल्ली-एनसीआर और गुजरात के कैब व ऑटो ड्राइवरों के साथ आयोजित टाउनहॉल कार्यक्रम में अमित शाह ने बताया कि यह प्लेटफॉर्म अपने कुल मुनाफे का 80 प्रतिशत हिस्सा ड्राइवरों को तय करेगा, जो उनके द्वारा तय की गई किलोमीटर दूरी के आधार पर वितरित होगा। शेष 20 प्रतिशत सहकारी पूंजी (कोऑपरेटिव कैपिटल) को मजबूत करने के लिए रखा जाएगा।
उन्होंने कहा, “मैंने मौजूदा कंपनियों से पूछा कि क्या उन्होंने ड्राइवरों के लिए कोई न्यूनतम बेस रेट तय किया है। उन्होंने कहा—नहीं। हम यह सुनिश्चित करेंगे कि आपकी न्यूनतम कमाई सुरक्षित रहे। इसके अलावा जो भी अतिरिक्त कमाई होगी, उसका लाभ भी आपको ही मिलना चाहिए।”
‘अमूल जैसा’ सहकारी मॉडल
अमित शाह ने भारत टैक्सी की संरचना की तुलना अमूल डेयरी सहकारी संस्था से की और इसे श्रमिक-स्वामित्व वाले व्यवसाय का सफल उदाहरण बताया।
उन्होंने कहा, “करीब 36 लाख महिलाओं ने सिर्फ 50-50 रुपये का योगदान देकर अमूल को 1.25 लाख करोड़ रुपये का संगठन बनाया। निजी कंपनियों में मुनाफा मालिकों के पास जाता है, जबकि अमूल में मुनाफे का बड़ा हिस्सा उत्पादकों को वापस मिलता है। भारत टैक्सी भी मोबिलिटी सेक्टर में इसी सोच पर काम करेगी।”
उन्होंने बताया कि ड्राइवर 500 रुपये का एक शेयर खरीदकर भारत टैक्सी के सह-मालिक बन सकते हैं। जैसे-जैसे सदस्यता बढ़ेगी, ड्राइवरों को सहकारी संस्था के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स में प्रतिनिधित्व भी मिलेगा।
शाह ने कहा, “अगर कोई फैसला ड्राइवरों के खिलाफ जाता है, तो आपका प्रतिनिधि उस पर सवाल उठाएगा और आपके हितों की रक्षा करेगा।”
विस्तार योजना और रोलआउट
अमित शाह के अनुसार, भारत टैक्सी का लक्ष्य दो वर्षों में 15 करोड़ ड्राइवरों को जोड़ने और तीन वर्षों में नगर निगम वाले सभी शहरों तक विस्तार करने का है। फिलहाल यह सेवा दिल्ली-एनसीआर और राजकोट में संचालित हो रही है।
उन्होंने यह भी कहा कि मुनाफा-साझेदारी प्रणाली को पूरी तरह स्थिर होने में लगभग तीन साल लग सकते हैं और ड्राइवरों से शुरुआती चरण में धैर्य बनाए रखने की अपील की।
बड़े एग्रीगेटर्स को मिलेगी चुनौती
5 फरवरी को आठ प्रमुख सहकारी संगठनों के समर्थन से लॉन्च की गई भारत टैक्सी ने आधिकारिक शुरुआत से पहले दो महीने का पायलट प्रोजेक्ट पूरा किया। अब इसका लक्ष्य देशभर में विस्तार करना है।
भारत टैक्सी का मकसद ओला, उबर और रैपिडो जैसे बड़े एग्रीगेटर्स को सीधी चुनौती देना है। जहां मौजूदा प्लेटफॉर्म ड्राइवरों से 25–30 प्रतिशत तक कमीशन वसूलते हैं, वहीं भारत टैक्सी फिलहाल कोई कमीशन नहीं काटती, और खुद को ड्राइवर-स्वामित्व व मुनाफा-साझेदारी पर आधारित एक सहकारी विकल्प के रूप में पेश कर रही है।
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