साल 2025 में भारत के बिजली क्षेत्र ने रचे नये कीर्तिमान
वर्ष 2025 में देश के बिजली क्षेत्र ने ऊर्जा उत्पादन, पारेषण (ट्रांसमिशन) और वितरण के क्षेत्र में ऐतिहासिक उपलब्धियां हासिल कीं। ऊर्जा मंत्रालय की एक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, भारत ने 2025-26 वित्त वर्ष के दौरान रिकॉर्ड 242.49 गीगावाट (GW) की अधिकतम बिजली मांग को सफलतापूर्वक पूरा किया, जबकि राष्ट्रीय ऊर्जा कमी घटकर मात्र 0.03 प्रतिशत रह..
नयी दिल्ली। वर्ष 2025 में देश के बिजली क्षेत्र ने ऊर्जा उत्पादन, पारेषण (ट्रांसमिशन) और वितरण के क्षेत्र में ऐतिहासिक उपलब्धियां हासिल कीं। ऊर्जा मंत्रालय की एक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, भारत ने 2025-26 वित्त वर्ष के दौरान रिकॉर्ड 242.49 गीगावाट (GW) की अधिकतम बिजली मांग को सफलतापूर्वक पूरा किया, जबकि राष्ट्रीय ऊर्जा कमी घटकर मात्र 0.03 प्रतिशत रह गई।
यह कमी 2013-14 के दौरान दर्ज 4.2 प्रतिशत की ऊर्जा कमी की तुलना में एक बड़ी गिरावट है। बुनियादी ढांचे के विकास और ग्रामीण व शहरी दोनों उपभोक्ताओं के लिए सतत ऊर्जा उपलब्धता पर जोर के साथ इस क्षेत्र ने मजबूत प्रगति दिखाई है।
आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, 30 नवंबर 2025 तक भारत की कुल स्थापित विद्युत उत्पादन क्षमता 509.743 गीगावाट तक पहुंच गई, जो 2014 की तुलना में 104.4 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाती है। अक्टूबर 2025 तक गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित स्रोतों की हिस्सेदारी कुल क्षमता का 51 प्रतिशत हो गई, जिससे भारत ने अपने राष्ट्रीय निर्धारित योगदान (NDC) लक्ष्य को 2030 की समयसीमा से पांच वर्ष पहले ही हासिल कर लिया।
अप्रैल 2014 से अब तक ग्रिड में लगभग 178 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता जोड़ी गई, जिसमें 130 गीगावाट सौर ऊर्जा और 33 गीगावाट पवन ऊर्जा शामिल है। प्रति व्यक्ति बिजली खपत में भी तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई और यह 2024-25 में बढ़कर 1,460 किलोवाट-घंटा (kWh) तक पहुंच गई, जो पिछले एक दशक की तुलना में 52.6 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाती है।
तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था की जरूरतों को पूरा करने के लिए सरकार ने 2025-26 वित्त वर्ष में 13.32 गीगावाट नई कोयला आधारित तापीय क्षमता को मंजूरी दी। दिसंबर 2025 के अंत तक घरेलू बिजली संयंत्रों में कोयले का भंडार 5.17 करोड़ टन रहा, जिसे मार्च 2026 तक बढ़ाकर 6.6 करोड़ टन करने का लक्ष्य रखा गया है।
मंत्रालय ने मई 2025 में स्वीकृत संशोधित शक्ति (SHAKTI) नीति के तहत कोयला आवंटन प्रक्रिया को भी सरल बनाया, जिसमें लिंकिज व्यवस्था को केवल दो विंडो तक सीमित कर दिया गया, ताकि ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ को बढ़ावा मिल सके। जलविद्युत क्षेत्र में भी उल्लेखनीय प्रगति हुई, जहां 800 मेगावाट की पार्बती-II परियोजना को चालू किया गया और अरुणाचल प्रदेश में 700 मेगावाट की तातो-II परियोजना को मंजूरी दी गई।
राष्ट्रीय विद्युत योजना 2023-2032 के तहत बुनियादी ढांचे का विस्तार एक प्रमुख प्राथमिकता बना हुआ है। इस योजना का लक्ष्य 458 गीगावाट की अधिकतम बिजली मांग को पूरा करना है। इसके तहत पारेषण नेटवर्क को 4.98 लाख सर्किट किलोमीटर से बढ़ाकर 2032 तक 6.48 लाख सर्किट किलोमीटर करने का अनुमान है।
वर्ष 2025 के दौरान मंत्रालय ने 6,511 सर्किट किलोमीटर नई पारेषण लाइनों को जोड़ा और 38,849 करोड़ रुपये की लागत वाली अंतर-राज्य पारेषण परियोजनाओं को मंजूरी दी। संशोधित राइट ऑफ वे (RoW) दिशानिर्देशों के तहत टावर बेस के लिए भूमि मूल्य पर मुआवजा बढ़ाकर 200 प्रतिशत कर दिया गया, जिससे परियोजनाओं के तेजी से क्रियान्वयन में मदद मिली।
वितरण क्षेत्र में, संशोधित वितरण क्षेत्र योजना (Revamped Distribution Sector Scheme) के जरिए समग्र तकनीकी एवं वाणिज्यिक (AT&C) हानियों को घटाकर 16.16 प्रतिशत तक लाया गया। 19 करोड़ से अधिक प्रीपेड स्मार्ट मीटरों को मंजूरी दी गई और ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति बढ़कर औसतन 22.6 घंटे प्रतिदिन तक पहुंच गई।
सरकार ने जनजातीय क्षेत्रों के विद्युतीकरण को भी प्राथमिकता दी और पीएम-जनमन (PM-JANMAN) जैसी पहलों के तहत घरों के लिए 6,522 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की। ऊर्जा संरक्षण के मोर्चे पर, मंत्रालय ने कार्बन क्रेडिट ट्रेडिंग योजना को अधिसूचित किया और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSMEs) को ऊर्जा दक्ष तकनीकों को अपनाने में सहायता के लिए 1,000 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ ADEETIE कार्यक्रम की शुरुआत की।
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