इंसुलिन रेजिस्टेंस सुधारें और वर्तमान रोगों से मुक्ति पाएं

हमारा देश इस समय एक बहुत ही बड़े क्राइसिस से गुजर रहा है, जिसकी चपेट में आज नहीं तो कल सभी आने वाले हैं, वह है मोटापा..जिसकी चिंता हाल ही मैं देश के यशस्वी प्रधानमंत्री जी ने भी की है। सन 1990 में 3 करोड़ लोग मोटापे से ग्रसित थे लेकिन 2024 तक इनकी संख्या 35 करोड़ तक हो गई है। विडंबना यह है कि कोई भी व्यक्ति मोटापे को एक बीमारी नहीं मानता जबकि वे विभिन्न प्रकार के रोगों की चपेट में प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से..

इंसुलिन रेजिस्टेंस सुधारें और वर्तमान रोगों से मुक्ति पाएं
02-09-2025 - 04:13 PM
02-09-2025 - 04:14 PM

बढ़ता मोटापा और जीवनशैलीजनित रोग: हमारा देश इस समय एक बहुत ही बड़े क्राइसिस से गुजर रहा है, जिसकी चपेट में आज नहीं तो कल सभी आने वाले हैं, वह है मोटापा..जिसकी चिंता हाल ही मैं देश के यशस्वी प्रधानमंत्री जी ने भी की है। सन 1990 में 3 करोड़ लोग मोटापे से ग्रसित थे लेकिन 2024 तक इनकी संख्या 35 करोड़ तक हो गई है। विडंबना यह है कि कोई भी व्यक्ति मोटापे को एक बीमारी नहीं मानता जबकि वे विभिन्न प्रकार के रोगों की चपेट में प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से अनायास ही आ रहे हैं जैसे कि...

•       हाइपरटेंशन

•       प्री डायबिटीज

•       डायबिटीज

•       न्यूरोपैथी

•       नेफ्रोपैथी

•       कार्डियोवैस्कुलर डिजीज

•       सेरेब्रोवैस्कुलर डिजीज

•       स्ट्रोक

•       एम्पुटेशन ऑफ लिंब

•       रेटिनोपैथी

•       स्लीप डिस्पनिया (खर्राटे लेना)

•       अल्जाइमर डिजीज

•       इर्रिटेबल बाउल सिंड्रोम

•       डिस्लीपीडीमिया

•       उच्च एलडीएल

•       उच्च ट्राइग्लिसराइड

•       कैंसर आदि I

इन बीमारियों का मुख्य कारण है, इंसुलिन रेजिस्टेंस

इंसुलिन रेजिस्टेंस अर्थात् रक्त में शर्करा नियंत्रित करने वाले हार्मोन की क्षमता में कमी होना। उदाहरण के लिए: पहले एक समोसा खाने से उत्पन्न शुगर को नियंत्रित करने में 1 यूनिट इंसुलिन पर्याप्त था। लेकिन, अब उसी शुगर को नियंत्रित करने के लिए 2–3 यूनिट इंसुलिन चाहिए। इससे पैंक्रियाज को अतिरिक्त इंसुलिन बनाना पड़ता है जिससे उसकी उत्पादन क्षमता कम होती जाती है। एक समय ऐसा आता है जब पैंक्रियाज थककर इंसुलिन बनाना बंद कर देता है और तब डॉक्टर गोली के बजाय इंसुलिन इंजेक्शन लगाने की सलाह देते हैं।

आधुनिक चिकित्सा की सीमाएँ: डॉक्टर मित्र इन तथ्यों से भलीभांति परिचित हैं लेकिन विश्व में इंसुलिन रेजिस्टेंस की कोई दवा अभी तक नहीं बनी है। इसलिए वे केवल जीवनशैली में परिवर्तन और मोटापा कम करने पर हल्का-सा बल देते हैं। अधिकांश डॉक्टर मरीज पर ही दोष डालते हैं कि वह ज्यादा खाता है और उसे अपराधबोध से ग्रसित कर देते हैं। परिणामस्वरूप रोगी सभी दवाइयाँ लेने के उपरान्त भी धीरे-धीरे जीवनशैलीजनित बीमारियों का शिकार होता जाता है और अपनी गाढ़ी कमाई उपचार अथवा कॉर्पोरेट अस्पतालों में खर्च कर देता है।

हाइपरइंसुलिनेमिया से छुटकारा कैसे पाएं: आखिर रोगों का मारा बेचारा रोगी क्या करे?

उपाय है और सटीक उपाय है। किसी भी तरह से इंसुलिन के उत्पादन पर रोक लगाएं, जिससे हाइपरइंसुलिनेमिया से छुटकारा पाया जा सके और बीमारियों से मुक्ति मिल सके। इसके लिए सबसे पहले भोजन का सही संयोजन-नियोजन करना अनिवार्य है। यदि हम भोजन में उचित मात्रा में..

•       प्रोटीन

•       फैट

•       नियंत्रित कार्बोहाइड्रेट

का सेवन करें, तो इंसुलिन के बार-बार उत्पादन पर रोक लगाई जा सकती है ।

मेरा एक व्यावहारिक और सफल प्रयोग – गैल इंडिया लिमिटेड

भारत सरकार की नवरत्न कंपनी गैल इंडिया लिमिटेड में मेरी नियुक्ति ऑक्युपेशनल हेल्थ कंसल्टेंट के रूप में हुई। मुझे कर्मचारियों का कोलेस्ट्रॉल पैनल और इंसुलिन रेजिस्टेंस सुधारने की जिम्मेदारी दी गई। मैंने सभी का 8–10 वर्षों का स्वास्थ्य डाटा का अध्ययन किया। वैज्ञानिक पद्धति से जीवनशैली एवं आहार का प्रोटोकॉल बनाया और रोगियों की सहमति से लागू करने पर उल्लेखनीय परिणाम प्राप्त हुए।

Tags:

What's Your Reaction?

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow

डॉक्टर छोटे लाल जैन डॉक्टर छोटे लाल जैन, गुजरात सरकार के चिकित्सा सेवा विभाग से सेवानिवृत्त चिकित्सक हैं और उन्होंने लंबे समय तक गेल (इंडिया) लिमिटेड में भी चिकित्सकीय सेवाएं दी हैं।