केंद्रीय बजट 2026–27: प्रमुख बिंदु

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार, 1 फरवरी 2026 को संसद में वित्त वर्ष 2026–27 का केंद्रीय बजट प्रस्तुत किया। यह बजट वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं, आपूर्ति शृंखला में पुनर्संरेखण और बदलते निवेश परिदृश्य की पृष्ठभूमि में पेश किया गया है, साथ ही सतत विकास और राजकोषीय अनुशासन के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दोहराता

केंद्रीय बजट 2026–27: प्रमुख बिंदु
02-02-2026 - 10:04 AM

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार, 1 फरवरी 2026 को संसद में वित्त वर्ष 2026–27 का केंद्रीय बजट प्रस्तुत किया। यह बजट वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं, आपूर्ति शृंखला में पुनर्संरेखण और बदलते निवेश परिदृश्य की पृष्ठभूमि में पेश किया गया है, साथ ही सतत विकास और राजकोषीय अनुशासन के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दोहराता है।

बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य “आकांक्षाओं को उपलब्धियों में और संभावनाओं को प्रदर्शन में बदलना” है। उन्होंने इस बजट को युवा शक्ति–आधारित बजट बताया, जिसमें घरेलू विनिर्माण को मजबूत करने, उच्च-विकास सेवाओं के विस्तार और दीर्घकालिक आर्थिक विस्तार के प्रमुख चालक के रूप में बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ करने पर जोर दिया गया है।

देश की विकास यात्रा पर प्रकाश डालते हुए वित्त मंत्री ने कहा, “हमने व्यापक संरचनात्मक सुधारों, राजकोषीय विवेक और मौद्रिक स्थिरता को अपनाया है, साथ ही सार्वजनिक निवेश पर मजबूत जोर बनाए रखा है। आत्मनिर्भरता को मार्गदर्शक मानते हुए हमने घरेलू विनिर्माण क्षमता, ऊर्जा सुरक्षा को सुदृढ़ किया है और महत्वपूर्ण आयात निर्भरताओं को कम किया है।”
उन्होंने आगे कहा, “हमने यह सुनिश्चित किया है कि सरकार के प्रत्येक कदम से नागरिकों को लाभ मिले। इसके लिए रोजगार सृजन, कृषि उत्पादकता, घरेलू क्रय शक्ति और सार्वभौमिक सेवाओं के समर्थन हेतु सुधार किए गए हैं।”

यह बजट नियामक स्पष्टता, व्यापार सुगमता और लक्षित सुधारों के महत्व को रेखांकित करता है, ताकि दीर्घकालिक पूंजी आकर्षित की जा सके और वैश्विक बाजारों के साथ भारत का एकीकरण गहरा हो।

केंद्रीय बजट 2026–27 के प्रमुख फोकस क्षेत्र

बजट का मूल विषय

1. युवा शक्ति–आधारित विकास:
कौशल विकास, रोजगार और उद्यम सृजन के माध्यम से भारत के जनसांख्यिकीय लाभांश को उत्पादक क्षमता में बदलना।

2. इस वर्ष के बजट को दिशा देने वाले तीन कर्तव्य

  • वैश्विक अस्थिरता के बीच उत्पादकता, प्रतिस्पर्धात्मकता और लचीलापन बढ़ाकर आर्थिक विकास को तेज और सतत बनाना।
  • मानव पूंजी, कौशल और संस्थागत क्षमताओं को सशक्त कर आकांक्षाओं की पूर्ति और क्षमता निर्माण।
  • सबका साथ, सबका विकास को आगे बढ़ाते हुए क्षेत्रों, समुदायों और क्षेत्रों में समान अवसर सुनिश्चित करना।

3. निवेश-आधारित विकास पर जोर

  • रणनीतिक और उभरते क्षेत्रों में विनिर्माण का विस्तार।
  • एमएसएमई को विकास भागीदार और आपूर्ति शृंखला के आधार स्तंभ के रूप में सशक्त करना।
  • सेवाओं को विकास, रोजगार और निर्यात के प्रमुख चालक के रूप में मजबूत करना।

4. भारत के निवेश पारिस्थितिकी तंत्र को सुदृढ़ करना

  • निजी निवेश को प्रोत्साहित करने हेतु निरंतर सार्वजनिक पूंजीगत व्यय।
  • टियर–II और टियर–III शहरों में बुनियादी ढांचे के माध्यम से क्षेत्रीय विकास।
  • दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा, जलवायु प्रौद्योगिकियां और संसाधन लचीलापन।

5. व्यापार सुगमता और पूंजी प्रवाह में सुधार

  • नियामक सरलीकरण, कर स्पष्टता और भरोसे-आधारित अनुपालन।
  • एफडीआई, पोर्टफोलियो निवेश और वैश्विक एकीकरण को बढ़ावा देने के उपाय।
  • 2025 में राज्यों का निवेश अनुकूलता सूचकांक शुरू करने का प्रस्ताव, ताकि प्रतिस्पर्धी सहकारी संघवाद को बढ़ावा मिले।

बायोफार्मा (जैव-औषधि)

केंद्रीय बजट 2026–27 में बायोफार्मास्यूटिकल्स को रणनीतिक और उभरते क्षेत्रों में विनिर्माण विस्तार की केंद्रबिंदु रणनीति बनाया गया है। भारत को वैश्विक बायोफार्मा विनिर्माण केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए एक व्यापक ढांचा प्रस्तावित किया गया है।

1. बायोफार्मा शक्ति

(स्वास्थ्य उन्नयन हेतु ज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार की रणनीति)

  • भारत को वैश्विक बायोफार्मा विनिर्माण केंद्र बनाने का लक्ष्य।
  • अगले पांच वर्षों में ₹10,000 करोड़ का परिव्यय।
  • बायोलॉजिक्स और बायोसिमिलर्स के घरेलू उत्पादन के लिए पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण।
  • तीन नए राष्ट्रीय औषधि शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (NIPER) की स्थापना और सात मौजूदा संस्थानों का उन्नयन।
  • 1,000 से अधिक मान्यता प्राप्त क्लिनिकल ट्रायल साइट्स का नेटवर्क।

2. संस्थागत और प्रतिभा क्षमता विकास

  • उन्नत फार्मास्यूटिकल शिक्षा, अनुसंधान और कौशल विकास को मजबूत करना।
  • उद्योग आवश्यकताओं और वैश्विक मानकों के अनुरूप शैक्षणिक संरेखण।

3. क्लिनिकल अनुसंधान और नियामक ढांचा

  • देशभर में 1,000 क्लिनिकल ड्रग ट्रायल साइट्स।
  • अनुमोदन प्रक्रियाओं को तेज करना और वैश्विक स्वीकृति बढ़ाना।

विनिर्माण (Manufacturing)

लक्षित योजनाओं और क्लस्टर-आधारित विकास के माध्यम से दीर्घकालिक औद्योगिक निवेश को प्रोत्साहन। प्रमुख पहलें:

  • बायोफार्मा शक्ति योजना
  • इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0: ₹40,000 करोड़ का परिव्यय।
  • इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स विनिर्माण योजना: परिव्यय बढ़ाकर ₹40,000 करोड़।
  • रेयर अर्थ कॉरिडोर: ओडिशा, केरल, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में।
  • रसायन विनिर्माण अवसंरचना: तीन रासायनिक पार्क।
  • निर्माण एवं अवसंरचना उपकरण योजना
  • कंटेनर विनिर्माण योजना: ₹10,000 करोड़ (5 वर्ष)।
  • पुराने औद्योगिक क्लस्टरों का पुनर्जीवन: 200 क्लस्टर।

वस्त्र (Textiles)

वस्त्र क्षेत्र को रोजगार और निर्यात से जुड़ा प्राथमिक क्षेत्र मानते हुए समेकित वस्त्र कार्यक्रम:

  • राष्ट्रीय फाइबर योजना
  • वस्त्र विस्तार एवं रोजगार योजना
  • राष्ट्रीय हथकरघा एवं हस्तशिल्प कार्यक्रम
  • टेक्स-इको पहल
  • समर्थ 2.0 (कौशल उन्नयन)

अवसंरचना (Infrastructure)

  • FY27 में ₹12.2 लाख करोड़ का सार्वजनिक पूंजीगत व्यय।
  • सात हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर।
  • 20 नए राष्ट्रीय जलमार्ग।
  • टियर–II और टियर–III शहरों पर विशेष फोकस।
  • सिटी इकोनॉमिक रीजन (CER) – प्रति क्षेत्र ₹5,000 करोड़ (5 वर्ष)।

चैंपियन एमएसएमई

  • लक्षित इक्विटी, तरलता और पेशेवर समर्थन।
  • जोखिम पूंजी तक बेहतर पहुंच।
  • टियर–II और टियर–III क्षेत्रों में संस्थागत सहयोग।

शिक्षा, कौशल और सेवा-आधारित विकास

  • एजुकेशन टू एम्प्लॉयमेंट एंड एंटरप्राइज’ स्थायी समिति।
  • 2047 तक वैश्विक सेवाओं में 10% हिस्सेदारी का लक्ष्य।
  • एआई सहित उभरती तकनीकों के रोजगार प्रभाव का आकलन।
  • आईटी सेवाओं के लिए एकीकृत कर ढांचा।

एवीजीसी और रचनात्मक अर्थव्यवस्था

  • एवीजीसी क्षेत्र को समर्थन; 2030 तक 20 लाख पेशेवरों की आवश्यकता।
  • 15,000 स्कूलों और 500 कॉलेजों में कंटेंट क्रिएटर लैब।

जलवायु प्रौद्योगिकी और ऊर्जा संक्रमण

  • कार्बन कैप्चर, उपयोग और भंडारण (CCUS)
  • ₹20,000 करोड़ (5 वर्ष)।
  • बिजली, स्टील, सीमेंट, रिफाइनरी और रसायन क्षेत्र पर फोकस।

स्वास्थ्य और मेडिकल वैल्यू टूरिज्म

  • सहयोगी स्वास्थ्य पेशेवरों के संस्थानों का विस्तार।
  • वृद्धावस्था और सहयोगी देखभाल सेवाएं।
  • आयुष और पारंपरिक चिकित्सा को सुदृढ़ करना।
  • ट्रॉमा केयर और जिला स्वास्थ्य ढांचे का विस्तार।
  • पांच क्षेत्रीय मेडिकल वैल्यू टूरिज्म हब।

पर्यटन

  • राष्ट्रीय आतिथ्य संस्थान की स्थापना।
  • 20 प्रतिष्ठित स्थलों पर 10,000 गाइडों का कौशल उन्नयन।
  • राष्ट्रीय डिजिटल डेस्टिनेशन नॉलेज ग्रिड।
  • 15 पुरातात्विक स्थलों का विकास।
  • क्षेत्रीय और विशेष पर्यटन को बढ़ावा।

कर सुधार

  • सरल और आधुनिक आयकर ढांचा।
  • भारत में डेटा सेंटर आधारित क्लाउड सेवाओं के लिए 2047 तक कर अवकाश।
  • मुकदमेबाजी में कमी और भरोसे-आधारित कर प्रशासन।
  • आईटी और आईटीईएस के लिए सेफ हार्बर प्रावधान।
  • विदेशी निवेश और वैश्विक गतिशीलता को समर्थन।

सीमा शुल्क सुधार

  • शुल्क संरचना का सरलीकरण।
  • अप्रचलित छूटों का चरणबद्ध समापन।
  • पारदर्शिता बढ़ाने हेतु प्रभावी दरों का समावेश।
  • निर्यातोन्मुख क्षेत्रों को रियायतें।
  • स्वचालन और जोखिम-आधारित मूल्यांकन।

निष्कर्ष:
केंद्रीय बजट 2026–27 का उद्देश्य निवेश, विनिर्माण, सेवाओं, अवसंरचना और मानव पूंजी के माध्यम से भारत को दीर्घकालिक, समावेशी और सतत विकास के पथ पर आगे बढ़ाना है।

What's Your Reaction?

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow

THE NEWS THIKANA, संपादकीय डेस्क यह द न्यूजठिकाना डॉट कॉम की संपादकीय डेस्क है। डेस्क के संपादकीय सदस्यों का प्रयास रहता है कि अपने पाठकों को निष्पक्षता और निर्भीकता के साथ विभिन्न विषयों के सच्चे, सटीक, विश्वसनीय व सामयिक समाचारों के अलावाआवश्यक उल्लेखनीय विचारों को भी सही समय पर अवगत कराएं।