एसआईआर विवाद पर घमासान: चुनाव आयोग ने टीएमसी पर लगाए आरोप, ममता बनर्जी ने केंद्र और पुलिस पर साधा निशाना
पश्चिम बंगाल में चल रही विशेष गहन पुनरीक्षण (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन – SIR) प्रक्रिया को लेकर विवाद और गहरा गया है। मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार ने तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के नेतृत्व को बताया कि पार्टी के विधायक खुले तौर पर आयोग और विशेष रूप से मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ अपमानजनक और धमकी भरी भाषा का इस्तेमाल कर..
नयी दिल्ली/कोलकाता। पश्चिम बंगाल में चल रही विशेष गहन पुनरीक्षण (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन – SIR) प्रक्रिया को लेकर विवाद और गहरा गया है। मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार ने तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के नेतृत्व को बताया कि पार्टी के विधायक खुले तौर पर आयोग और विशेष रूप से मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ अपमानजनक और धमकी भरी भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि टीएमसी कार्यकर्ताओं और विधायकों द्वारा निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों (Electoral Registration Officers) के साथ तोड़फोड़ की घटनाएं सामने आई हैं।
एक अधिकारी के अनुसार, मुख्य चुनाव आयुक्त ने टीएमसी प्रतिनिधिमंडल से स्पष्ट शब्दों में कहा,
“एसआईआर से जुड़े कार्यों में लगे अधिकारियों पर किसी भी तरह का दबाव, बाधा या हस्तक्षेप किसी के द्वारा नहीं किया जाना चाहिए। बूथ लेवल ऑफिसर्स (बीएलओ) को देय मानदेय बिना किसी और देरी के समय पर जारी किया जाना चाहिए।”
बंगा भवन में सुरक्षा को लेकर ममता की आपत्ति
इससे पहले सुबह, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी चाणक्यपुरी स्थित बंग भवन पहुंचीं और वहां की “भारी” सुरक्षा व्यवस्था पर आपत्ति जताई। उन्होंने दावा किया कि पश्चिम बंगाल से टीएमसी द्वारा राष्ट्रीय राजधानी लाए गए “एसआईआर से प्रभावित परिवारों” को पुलिस द्वारा “धमकाया” जा रहा है।
हालांकि ममता बनर्जी ने यह भी कहा कि वह पुलिस को दोष नहीं देतीं बल्कि “ऊपर बैठे लोगों” को जिम्मेदार मानती हैं।
उन्होंने आरोप लगाया, “यह अक्षमता है… वे देश की रक्षा नहीं कर पा रहे हैं लेकिन बंगाल और आम लोगों को प्रताड़ित कर रहे हैं और एसआईआर के नाम पर अत्याचार कर रहे हैं।”
टीएमसी सुप्रीमो ने कहा, “जब मैं यहां आती हूं तो वे घबरा जाते हैं। मैं चाहती तो लाखों लोगों को यहां ला सकती थी।”
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया, “मैं यहां आंदोलन के लिए नहीं आई हूं। अगर ऐसा होता, तो आप लोगों की हालत खराब हो जाती। हम यहां न्याय के लिए आए हैं।” पुलिस ने बताया कि इस घटनाक्रम के बाद इलाके में सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई है।
टीएमसी सांसदों की सक्रियता
इस बीच, टीएमसी के सांसद—साकेत गोखले, डोला सेन, काकोली घोष दस्तीदार और बापी हलदार—दिल्ली के उन अलग-अलग स्थानों पर पहुंचे, जहां एसआईआर से प्रभावित परिवार ठहरे हुए हैं।
साकेत गोखले को दिल्ली के कैलाश कॉलोनी स्थित पश्चिम बंगाल पावर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड के गेस्टहाउस के बाहर तैनात पुलिसकर्मियों से बहस करते देखा गया। यहां पश्चिम बंगाल में पुनरीक्षण प्रक्रिया से प्रभावित 20 लोग ठहरे हुए हैं।
गोखले ने कहा कि सुबह दिल्ली पुलिस वहां रजिस्टर की जांच करने आई थी और करीब 25–30 पुलिसकर्मी, साथ ही कथित तौर पर बंदियों को ले जाने के लिए एक बस भी तैनात की गई थी।
उन्होंने आरोप लगाया, “दिल्ली पुलिस ने उनसे कहा था कि अगर वे बाहर निकले तो उन्हें हिरासत में ले लिया जाएगा और गेट बंद कर दिए गए थे। जब मैंने पुलिस से बात की तो उन्होंने कहा कि यह गणतंत्र दिवस के मद्देनजर सुरक्षा व्यवस्था है। जब मैंने कहा कि गणतंत्र दिवस तो निकल चुका है, तो मुझे बताया गया कि एआई शिखर सम्मेलन हो रहा है।”
राज्यसभा में उठा मुद्दा
इस मामले को टीएमसी की उपनेता सागरिका घोष ने राज्यसभा में उठाया। उन्होंने कहा,“एसआईआर प्रक्रिया के पीड़ितों का एक प्रतिनिधिमंडल, जिसने हर तरह का नुकसान झेला है, उसे दिल्ली पुलिस द्वारा परेशान किया गया और उनके साथ बदसलूकी की गई।”
दिल्ली पुलिस का खंडन
मुख्यमंत्री के आरोपों को खारिज करते हुए दिल्ली पुलिस के विशेष आयुक्त (परसेप्शन मैनेजमेंट एंड मीडिया सेल) देवेश चंद्र श्रीवास्तव ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि बंग भवन में कोई भी पुलिसकर्मी प्रवेश नहीं किया। दिल्ली पुलिस ने एक बयान में कहा कि प्रोटोकॉल के अनुसार राष्ट्रीय राजधानी में ममता बनर्जी की सुरक्षा की जिम्मेदारी दिल्ली पुलिस की है और पश्चिम बंगाल पुलिस पहले ही इस संबंध में उन्हें सूचित कर चुकी थी।
दिल्ली पुलिस के बयान के अनुसार, “प्राप्त जानकारी के अनुसार, पश्चिम बंगाल से एक राजनीतिक दल के लगभग 150–200 समर्थक दिल्ली आए थे और वे दक्षिण दिल्ली, नयी दिल्ली और मध्य दिल्ली क्षेत्रों के विभिन्न गेस्टहाउस और होटलों में ठहरे हुए हैं। यह भी जानकारी दी गई थी कि वीवीआईपी और वरिष्ठ नेता इन गेस्टहाउसों या होटलों का दौरा करेंगे। इसी के मद्देनजर इन स्थानों पर पर्याप्त सुरक्षा बल तैनात किया गया।”
सुप्रीम कोर्ट में चुनौती
ममता बनर्जी ने पश्चिम बंगाल में चल रही एसआईआर प्रक्रिया को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। उन्होंने 28 जनवरी को यह याचिका दायर की थी जिसमें भारत निर्वाचन आयोग और पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी को पक्षकार बनाया गया है। यह मामला अभी शीर्ष अदालत में सुनवाई के लिए सूचीबद्ध नहीं हुआ है।
उधर, सुप्रीम कोर्ट पहले से ही एसआईआर मुद्दे पर दायर कई याचिकाओं की सुनवाई कर रहा है।
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