भारत दौरे को UNSC की मंज़ूरी: अफ़गान विदेश मंत्री अमीर खान मुत्ताक़ी 9 से 16 अक्टूबर तक नयी दिल्ली में
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) ने गुरुवार को अफ़गान तालिबान के विदेश मंत्री अमीर खान मुत्ताक़ी के भारत दौरे को मंज़ूरी दे दी है। सूत्रों ने बताया कि भारत ने इस दौरे के लिए अनुमति मांगी थी, जिसके बाद UNSC की स्वीकृति..
नयी दिल्ली। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) ने गुरुवार को अफ़गान तालिबान के विदेश मंत्री अमीर खान मुत्ताक़ी के भारत दौरे को मंज़ूरी दे दी है। सूत्रों ने बताया कि भारत ने इस दौरे के लिए अनुमति मांगी थी, जिसके बाद UNSC की स्वीकृति मिली।
मुत्ताक़ी 6 अक्टूबर को रूस की यात्रा पूरी करने के बाद 9 से 16 अक्टूबर तक नई दिल्ली में रहेंगे। यह मंज़ूरी इसलिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि UNSC ने इससे पहले उनकी यात्रा की अनुमति देने से इनकार कर दिया था।
UNSC के रेज़ोल्यूशन 1988 व्यवस्था के तहत मुत्ताक़ी पर प्रतिबंध (sanction) लगे हैं। इस व्यवस्था में तालिबान नेताओं पर यात्रा और अन्य पाबंदियां शामिल हैं। ऐसे में उनके अंतरराष्ट्रीय दौरे के लिए समिति से पूर्व स्वीकृति आवश्यक होती है।
सूत्रों का कहना है कि मुत्ताक़ी का भारत दौरा भारत-तालिबान रिश्तों में अहम पड़ाव होगा। माना जा रहा है कि वह यहां कई उच्चस्तरीय बैठकों में शामिल होंगे। यह भारत का एक रणनीतिक कदम भी माना जा रहा है, खासकर पाकिस्तान और चीन के प्रभाव को संतुलित करने के लिहाज से।
ग़ौरतलब है कि अमीर खान मुत्ताक़ी अगस्त 2021 में काबुल पर तालिबान के क़ब्ज़े के बाद से अफ़गानिस्तान के विदेश मंत्री के तौर पर काम कर रहे हैं।
अफ़गान विदेश मंत्री अमीर खान मुत्ताक़ी के भारत दौरे का रणनीतिक महत्व
1. भारत-तालिबान रिश्तों में नया मोड़
- अब तक भारत तालिबान सरकार को औपचारिक मान्यता नहीं देता, लेकिन मुत्ताक़ी का यह दौरा रिश्तों को अप्रत्यक्ष राजनीतिक वैधता प्रदान करता है।
- यह संकेत है कि भारत अब अफ़गानिस्तान में सीधे तालिबान नेतृत्व से संवाद की नीति अपना रहा है।
2. पाकिस्तान की भूमिका पर चोट
- अफ़गानिस्तान के मुद्दे पर लंबे समय से पाकिस्तान “प्रमुख खिलाड़ी” रहा है।
- मुत्ताक़ी का भारत दौरा यह दिखाता है कि तालिबान अब केवल पाकिस्तान पर निर्भर नहीं रहना चाहता।
- भारत को अफ़गान मामलों में प्रत्यक्ष भूमिका मिल सकती है, जिससे पाकिस्तान की “रणनीतिक गहराई” (strategic depth) की अवधारणा कमजोर होगी।
3. चीन को संतुलित करने की रणनीति
- चीन तालिबान के साथ आर्थिक और सुरक्षा समझौते कर रहा है (खनिज संसाधन, बेल्ट एंड रोड परियोजनाएँ)।
- भारत मुत्ताक़ी से बातचीत कर चीन के प्रभाव को काउंटर-बैलेंस करना चाहता है।
4. सुरक्षा और आतंकवाद पर सहयोग
- भारत की चिंता है कि अफ़गानिस्तान की धरती भारत-विरोधी आतंकी गुटों (जैसे लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद) के लिए सुरक्षित पनाहगाह न बने।
- इस दौरे में आतंकवाद-रोधी सहयोग और सुरक्षा गारंटी पर चर्चा हो सकती है।
5. कूटनीतिक बढ़त
- UNSC से अनुमति लेकर भारत ने दिखा दिया कि वह वैश्विक स्तर पर तालिबान से संवाद का जिम्मेदार और वैध मंच बन सकता है।
- यह भारत की उस नीति का हिस्सा है जिसमें वह सीधी बातचीत करके क्षेत्रीय स्थिरता और अपने रणनीतिक हितों को सुरक्षित करना चाहता है।
6. भारत की “मानवीय सहायता” कूटनीति
- भारत पहले ही अफ़गान जनता को गेहूं, दवाइयाँ और टीके उपलब्ध कराता रहा है।
- मुत्ताक़ी के दौरे से यह संभावना है कि मानवीय सहायता को आर्थिक सहयोग में बदला जाए।
संभावित चुनौतियाँ
- तालिबान को औपचारिक मान्यता देने का दबाव भारत पर बढ़ सकता है।
- यदि तालिबान भारत की सुरक्षा चिंताओं पर ठोस आश्वासन नहीं देता तो रिश्ते केवल प्रतीकात्मक रह सकते हैं।
- पश्चिमी देशों (खासकर अमेरिका) और भारत के बीच नीति में तालमेल बैठाना चुनौतीपूर्ण होगा।
निष्कर्ष
अमीर खान मुत्ताक़ी का भारत दौरा भारत की अफ़गान नीति में बड़ा बदलाव है। यह भारत के लिए अवसर भी है और चुनौती भी।
भारत अगर इस संवाद का सही उपयोग करे तो वह अफ़गानिस्तान में चीन-पाकिस्तान प्रभाव को कम करके अपनी रणनीतिक स्थिति मजबूत कर सकता है।
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