राष्ट्रीय प्रतीकों और चिह्नों के दुरुपयोग पर सख्ती हो: कर्नाटक हाईकोर्ट का आदेश
कर्नाटक उच्च न्यायालय ने राज्य और केंद्र सरकार को आदेश दिया है कि वे राष्ट्रीय प्रतीकों और चिह्नों (Emblems and Symbols) के अनधिकृत उपयोग और दुरुपयोग को रोकने के लिए सख्ती से कानूनों को लागू करें..
बेंगलुरु। कर्नाटक उच्च न्यायालय ने राज्य और केंद्र सरकार को आदेश दिया है कि वे राष्ट्रीय प्रतीकों और चिह्नों (Emblems and Symbols) के अनधिकृत उपयोग और दुरुपयोग को रोकने के लिए सख्ती से कानूनों को लागू करें। अदालत ने कहा कि ऐसे उल्लंघनकर्ताओं पर कड़े जुर्माने लगाए जाएं।
यह आदेश हाईकोर्ट लीगल सर्विसेज कमेटी द्वारा दायर एक जनहित याचिका (PIL) की सुनवाई करते हुए दिया गया। मुख्य न्यायाधीश एन.वी. अंजारिया और न्यायमूर्ति एम.आई. अरुण की पीठ ने यह फैसला सुनाया।
कोर्ट ने जिन कानूनों के सख्त पालन का निर्देश दिया:
- Emblems and Names (Prevention of Improper Use) Act, 1950
- Emblems and Names (Prevention of Improper Use) Rules, 1982
- State Emblem of India (Prohibition of Improper Use) Act, 2005
- State Emblem of India (Regulation of Use) Rules, 2007
- State Emblem Rules, 2010
- Central Motor Vehicle Rules, 1989 – खासकर नियम 50 और 51
- Karnataka Motor Vehicle Rules, 1989 – खासकर नियम 145-A
कोर्ट की मुख्य टिप्पणियां:
- सार्वजनिक स्थानों और सड़कों पर राष्ट्रीय प्रतीकों और सरकारी विभागों के नामों का अनधिकृत उपयोग नियमों का उल्लंघन है।
- पूर्व सांसदों और विधायकों समेत पूर्व पदाधिकारियों द्वारा वाहनों और लेटरहेड्स पर प्रतीकों, झंडों और नामों का गलत इस्तेमाल किया जा रहा है, जो "दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय" है।
- अदालत ने कहा, "झंडों, मुहरों, प्रतीकों, और नामों के अवैध और अनधिकृत प्रदर्शन को सख्ती से रोका जाना चाहिए।"
निर्देश और सुझाव:
- प्रशासन को आदेश दिया गया है कि वे प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के माध्यम से सार्वजनिक सूचना जारी करें, जिसमें लोगों से चार हफ्तों के भीतर सभी अनधिकृत प्रतीकों, झंडों, स्टिकरों और नामों को हटाने की अपील की जाए।
- सही शिकायत मिलने पर संबंधित कानूनों के अंतर्गत केस दर्ज किए जाएं।
- नए नियम बनाए जाएं जिनमें उल्लंघन करने पर जुर्माना और ड्राइविंग लाइसेंस रद्द करने का प्रावधान हो।
- ट्रैफिक पुलिस को विशेष प्रशिक्षण दिया जाए ताकि वे ऐसे उल्लंघनों की पहचान कर कार्रवाई कर सकें।
यह आदेश राष्ट्रीय प्रतीकों की गौरव और गरिमा बनाए रखने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
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