पाकिस्तान ने सिंधु जल समझौते को छेड़ने को बताया 'युद्ध की घोषणा', शिमला समझौते को किया निलंबित
पाकिस्तान ने गुरुवार को भारत के खिलाफ कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कई प्रतिरोधात्मक कदम उठाए। इनमें सबसे गंभीर रहा सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty - IWT) को बाधित करने को 'युद्ध की कार्यवाही' बताना, 1972 के शिमला समझौते को निलंबित करना..
इस्लामाबाद/नयी दिल्ली। पाकिस्तान ने गुरुवार को भारत के खिलाफ कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कई प्रतिरोधात्मक कदम उठाए। इनमें सबसे गंभीर रहा सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty - IWT) को बाधित करने को 'युद्ध की कार्यवाही' बताना, 1972 के शिमला समझौते को निलंबित करना और भारत के साथ सभी व्यापार, यात्रा और राजनयिक संबंधों को समाप्त करना, जिसमें भारतीय विमानों के लिए हवाई क्षेत्र बंद करना भी शामिल है।
पाकिस्तान ने चेतावनी दी कि यदि भारत ने सिंधु जल संधि के अंतर्गत जल प्रवाह में कोई बाधा डाली, तो वह "अपने संपूर्ण राष्ट्रीय शक्ति तंत्र के साथ पूरी ताकत से जवाब देगा।"
यह बयान ऐसे देश की तरफ से आया है जिसने पहले परमाणु हथियारों के उपयोग की 'रेड लाइन' स्पष्ट कर रखी है, जिसमें एक यह भी है कि अगर पाकिस्तान की आर्थिक नाकेबंदी होती है—जैसे जल प्रवाह रोकना या नौसेना द्वारा नाकाबंदी—तो वह निर्णायक प्रतिक्रिया देगा।
भारत की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई, लेकिन सरकारी सूत्रों ने कहा कि “पाकिस्तान को पहले सीमा पार आतंकवाद पर पूरी ताकत लगानी चाहिए।”
क्या है पाकिस्तान का दावा?
- पाकिस्तान का कहना है कि 1960 की सिंधु जल संधि, जो विश्व बैंक की मध्यस्थता से बनी थी, कोई भी देश एकतरफा रूप से रद्द नहीं कर सकता।
- पाकिस्तान के अनुसार, भारत ऊपरी जलप्रवाह देश है और संधि के तहत जल के बहाव को रोकना अवैध है।
- इस समझौते से पाकिस्तान की 24 करोड़ आबादी की कृषि निर्भरता जुड़ी है, और भारत की कोई भी कार्रवाई उसे "अस्तित्व का संकट" दे सकती है।
पाकिस्तान की आपातकालीन बैठक और जवाबी कदम:
22 अप्रैल को पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत द्वारा लिए गए फैसलों के जवाब में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की अध्यक्षता में राष्ट्रीय सुरक्षा समिति (NSC) की आपात बैठक हुई, जिसमें इन कदमों की घोषणा की गई:
- IWT की एकतरफा समाप्ति को "अवैध" बताया गया।
- भारत से सभी व्यापार और आवाजाही बंद, जिसमें वाघा बॉर्डर का बंद होना शामिल है।
. 30 अप्रैल तक वैध यात्रा को छूट, फिर पूर्ण बंद।
- भारतीय विमानों के लिए पाकिस्तानी हवाई क्षेत्र बंद।
- सार्क वीज़ा छूट रद्द, सिर्फ सिख श्रद्धालुओं को अपवाद।
- भारत के रक्षा सलाहकारों को निष्कासित किया गया, 30 अप्रैल तक देश छोड़ने का आदेश।
- इस्लामाबाद स्थित भारतीय उच्चायोग के स्टाफ की संख्या घटाकर 30 कर दी गई।
भारत के कदम:
पहलगाम हमले में पाकिस्तान-समर्थित आतंकी संगठन The Resistance Front (TRF) की संलिप्तता को लेकर भारत ने:
- सिंधु जल संधि को स्थगित कर दिया।
- अटारी-वाघा सीमा बंद की।
- सार्क वीजा छूट रद्द की।
- पाकिस्तानी सैन्य सलाहकारों को निष्कासित किया।
- इस्लामाबाद स्थित भारतीय उच्चायोग स्टाफ को घटाया।
संकट के गंभीर नतीजे:
- सिंधु जल संधि का निलंबन – जो तीन युद्धों के बाद भी बरकरार रही थी – अब दोनों देशों के बीच सबसे संवेदनशील मुद्दा बन गई है।
- पाकिस्तान की कृषि अर्थव्यवस्था पर सीधा प्रभाव पड़ सकता है।
- शिमला समझौते के निलंबन से LOC पर संचार तंत्र टूट सकता है, जिससे मामूली झड़पें बड़े संघर्ष का रूप ले सकती हैं।
- सार्क सहयोग और क्षेत्रीय समन्वय पहले से ही नाजुक स्थिति में था, और यह संकट उसे और कमजोर कर सकता है।
यह पूरी स्थिति दक्षिण एशिया में सुरक्षा और स्थायित्व के लिए एक गंभीर चेतावनी है, और कूटनीतिक संवाद बहाल न होने की स्थिति में संकट और गहरा हो सकता है।
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