केरल: स्कूल प्रबंधन ने हिजाब की अनुमति से इनकार किया, छात्रा बदलेगी स्कूल; विवाद में बढ़ी सामुदायिक तनातनी
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कोच्चि (केरल)। केरल के पलुरुथी स्थित सेंट रीटा स्कूल में हिजाब पहनने को लेकर चल रहा विवाद सुलझने के बजाय और गहराता जा रहा है।
स्कूल प्रबंधन ने ड्रेस कोड पर कोई समझौता करने से इनकार कर दिया है, जबकि कक्षा 8 की छात्रा के पिता ने घोषणा की है कि वह अपनी बेटी को किसी अन्य स्कूल में दाखिला दिलाएंगे।
परिवार का फैसला: “अब बेटी उस स्कूल में नहीं लौटेगी”
छात्रा के पिता पी. एम. अनस ने मीडिया से कहा, “हमने फैसला किया है कि बेटी को दूसरे स्कूल में शिफ्ट किया जाएगा। उसने कहा कि घटना के बाद अब वह अपने शिक्षकों और सहपाठियों का सामना नहीं कर पाएगी, क्योंकि इस विवाद ने उसे अलग-थलग कर दिया है।”
स्कूल प्रबंधन का रुख सख्त
स्कूल प्रशासन ने साफ कहा है कि छात्रा को तभी वापस स्वीकार किया जाएगा, जब वह संस्थान के नियमों और ड्रेस कोड का पालन करने के लिए तैयार हो।
स्कूल की प्रिंसिपल हेलीना अल्बी ने कहा, “अगर छात्रा स्कूल के नियमों और विनियमों का पालन करने को तैयार है, तो हम उसका स्वागत उसी प्यार और स्नेह के साथ करेंगे, जैसा प्रवेश के पहले दिन किया था।
यूनिफॉर्म ड्रेस कोड का मामला न्यायालय के अधीन है, इसलिए मैं इस पर टिप्पणी नहीं कर सकती।
हम कानून और सरकार दोनों का सम्मान करते हैं। कोई भी शैक्षणिक संस्थान शिक्षा विभाग के सहयोग के बिना नहीं चल सकता। कृपया शांति, प्रेम और सौहार्द की संस्कृति को फैलाएं।”
मंत्री सिवनकुट्टी की प्रतिक्रिया: “शिक्षक खुद हेडस्कार्फ पहनते हैं”
केरल के सामान्य शिक्षा मंत्री वी. सिवनकुट्टी ने स्कूल प्रबंधन के रवैये पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा, “यह विडंबना है कि वही शिक्षक जो खुद हेडस्कार्फ पहनते हैं, वे अपने संस्थान की छात्राओं को हिजाब पहनने की अनुमति नहीं दे रहे।”
उन्होंने आगे कहा, “अगर कोई निजी स्कूल यह सोचता है कि वह शिक्षा प्रशासन की शक्तियों को अपने हाथ में ले सकता है, तो यह बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
अगर छात्रा को स्कूल छोड़ने के लिए मजबूर किया जाता है, तो जिम्मेदार लोगों को जवाब देना होगा।”
सिवनकुट्टी ने यह भी सुझाव दिया कि “स्कूल प्रबंधन और अभिभावक संघ (PTA) को छात्रा के परिवार से बातचीत करनी चाहिए थी और बिना यूनिफॉर्म के नियम से समझौता किए मुद्दे का हल निकालना चाहिए था।
प्रबंधन चाहें तो छात्रा को यूनिफॉर्म के समान रंग और डिज़ाइन वाला हिजाब पहनने की अनुमति दे सकता है।
शांति और सौहार्द बनाए रखने के लिए शिक्षा विभाग को तत्काल हस्तक्षेप करना चाहिए।”
कैथोलिक कांग्रेस ने मंत्री पर निशाना साधा
सिवनकुट्टी के हेडस्कार्फ वाले बयान से नाराज होकर कैथोलिक कांग्रेस ने मंत्री पर ईसाई समुदाय और ननों का अपमान करने का आरोप लगाया।
संगठन के ग्लोबल डायरेक्टर फादर फिलिप कवीयिल ने कहा, “मंत्री ने कुछ कट्टरपंथियों के तर्कों का समर्थन किया है। उन्होंने ननों का अपमान किया है, जिसके लिए उन्हें माफी मांगनी चाहिए। मुख्यमंत्री को उनसे इस्तीफा लेना चाहिए।”
उन्होंने यह भी बताया कि 2022 के गृह विभाग के एक आदेश में छात्र पुलिस कैडेट्स के लिए हिजाब पहनने पर रोक लगाई गई थी।
आदेश में कहा गया था कि
“पुलिस बल की वर्दी उसकी गरिमा और अनुशासन को बनाए रखने के लिए होती है, और इसका उद्देश्य लिंग समानता तथा धार्मिक या नस्लीय भेदभाव से मुक्त माहौल सुनिश्चित करना है।
यदि धार्मिक प्रतीकों को वर्दी के साथ जोड़ा गया तो अन्य संस्थानों में भी ऐसी मांगें उठेंगी, जिससे अनुशासन और धर्मनिरपेक्षता प्रभावित होगी।”
विवाद की जड़: सड़क के नाम को लेकर सामुदायिक तनाव
सूत्रों के अनुसार, इस पूरे विवाद की पृष्ठभूमि में एक सड़क के नाम को लेकर हुआ विवाद भी शामिल है, जिसने दो समुदायों के बीच खाई गहरी कर दी।
सीपीएम वार्ड सदस्य पी. आर. रचना ने बताया कि एक वर्ष पहले स्कूल के पीटीए अध्यक्ष जोशी कैथावलप्पिल के नेतृत्व में कुछ लोगों ने वार्ड समिति में प्रस्ताव पारित कर ‘कल्लुचिरा रोड’ का नाम बदलकर ‘सेंट ऑगस्टीन कॉन्वेंट रोड’ कर दिया था।
“इसके बाद कुछ स्थानीय निवासियों ने विरोध किया, क्योंकि उनके दस्तावेज़ों में पुराना नाम ‘कल्लुचिरा रोड’ दर्ज था, जिससे उन्हें दिक्कतें हुईं। जनता की मांग पर बाद में पुराना नाम बहाल किया गया, लेकिन इससे समुदायों में विभाजन पैदा हो गया। उन्होंने कहा, जब हिजाब विवाद भड़का, तो कुछ सामुदायिक नेता छात्रा के परिवार के समर्थन में उतर आए।”
निष्कर्ष:
केरल में यह हिजाब विवाद केवल ड्रेस कोड तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे सामुदायिक असहमति और राजनीतिक बयानबाजी ने भी स्थिति को जटिल बना दिया है।
अब सबकी निगाहें इस बात पर हैं कि राज्य सरकार और शिक्षा विभाग इस संवेदनशील मुद्दे को शांति और संवाद के माध्यम से कैसे सुलझाते हैं।
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