कुवैत ने घटाया तेल उत्पादन, होर्मुज जलडमरूमध्य संकट से वैश्विक ऊर्जा बाजार में हलचल.. भारत पर क्या होगा असर?
खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच Kuwait ने तेल उत्पादन और रिफाइनिंग आउटपुट घटाने की घोषणा की है। यह कदम उस समय उठाया गया है जब Strait of Hormuz के रास्ते तेल टैंकरों की आवाजाही लगभग पूरी तरह ठप हो ..
नयी दिल्ली। खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच Kuwait ने तेल उत्पादन और रिफाइनिंग आउटपुट घटाने की घोषणा की है। यह कदम उस समय उठाया गया है जब Strait of Hormuz के रास्ते तेल टैंकरों की आवाजाही लगभग पूरी तरह ठप हो गई है।
कुवैत, जो Organization of the Petroleum Exporting Countries (OPEC) का पांचवां सबसे बड़ा तेल उत्पादक है, ने कहा कि Iran की ओर से नौवहन सुरक्षा पर खतरे के कारण यह फैसला एहतियाती तौर पर लिया गया है। सरकार ने यह भी कहा कि हालात सामान्य होते ही उत्पादन दोबारा बढ़ाया जा सकता है।
जनवरी में कुवैत प्रतिदिन लगभग 26 लाख बैरल तेल का उत्पादन कर रहा था, हालांकि अब यह नहीं बताया गया कि बाजार से कितनी मात्रा रोकी गई है।
तेल कीमतों में 35% उछाल
इस संकट के कारण वैश्विक तेल बाजार में बड़ी तेजी देखने को मिली है।
- West Texas Intermediate (WTI) क्रूड फ्यूचर्स में एक सप्ताह में 35.63% की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जो 1983 के बाद सबसे बड़ी साप्ताहिक उछाल है।
- वैश्विक मानक Brent Crude भी लगभग 28% चढ़कर करीब ₹7,953 प्रति बैरल पर पहुंच गया।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह उछाल मुख्य रूप से US-Iran conflict के कारण है, जिसने खाड़ी क्षेत्र में तेल परिवहन को प्रभावित कर दिया है।
दुनिया के तेल का 20% इसी रास्ते से गुजरता है
Strait of Hormuz फारस की खाड़ी से निकलने वाला एक संकरा समुद्री मार्ग है, जिसके जरिए दुनिया के कुल तेल उपभोग का लगभग 20% प्रतिदिन गुजरता है।
ईरान के संभावित हमलों के डर से कई शिपिंग कंपनियों ने अपने टैंकरों को रोक दिया है। इसके कारण तेल का निर्यात बंदरगाहों पर जमा होने लगा है और उत्पादक देशों को उत्पादन घटाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
इराक ने भी घटाया उत्पादन
खाड़ी क्षेत्र में संकट के कारण Iraq पहले ही 15 लाख बैरल प्रतिदिन उत्पादन कम कर चुका है।
विश्लेषकों का अनुमान है कि अगर होर्मुज जलडमरूमध्य बंद रहा तो अगले सप्ताह तक खाड़ी देशों का कुल उत्पादन कटौती 40 लाख बैरल प्रतिदिन से ज्यादा हो सकती है।
कतर में LNG उत्पादन भी प्रभावित
ऊर्जा संकट केवल तेल तक सीमित नहीं है। दुनिया के सबसे बड़े LNG निर्यातकों में से एक Qatar ने भी ईरानी हमलों के बाद तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) उत्पादन रोक दिया है।
कतर वैश्विक LNG निर्यात का लगभग 20% हिस्सा सप्लाई करता है, जिसका उपयोग एशिया और यूरोप में बिजली उत्पादन और घरेलू हीटिंग के लिए होता है।
भारत पर क्या असर पड़ेगा?
भारत के लिए यह संकट केवल भू-राजनीतिक घटना नहीं बल्कि सीधा आर्थिक खतरा है।
- भारत की कुल तेल खपत का लगभग 88% आयात से आता है।
- वित्त वर्ष 2025 में भारत ने कच्चे तेल आयात पर करीब 137 अरब डॉलर (लगभग ₹11.78 लाख करोड़) खर्च किए।
भारत के तेल आयात का बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आता है:
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देश |
भारत के आयात में हिस्सेदारी |
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रूस |
36% |
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इराक |
20% |
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सऊदी अरब |
13% |
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यूएई |
9% |
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कुवैत |
3% |
इनमें से इराक, सऊदी अरब, कुवैत और यूएई से आने वाले लगभग 45–50% भारतीय तेल आयात Strait of Hormuz के रास्ते से गुजरते हैं।
तेल महंगा होने से भारत को कितना नुकसान
विशेषज्ञों के अनुसार..
- कच्चे तेल की कीमत में हर $10 प्रति बैरल बढ़ोतरी से भारत के आयात बिल में लगभग $13–14 अरब (₹1.1–1.2 लाख करोड़) का अतिरिक्त बोझ पड़ता है।
- इससे चालू खाता घाटा (Current Account Deficit) लगभग 0.35% GDP तक बढ़ सकता है।
अगर Brent Crude की कीमत $120 प्रति बैरल तक पहुंचती है, तो भारत का तेल व्यापार घाटा $220 अरब तक जा सकता है।
भारत के पास कितने दिन का तेल भंडार
भारत के पास रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार भी मौजूद है, जिनमें मुख्य रूप से शामिल हैं..
- Mangalore Strategic Petroleum Reserve
- Padur Strategic Petroleum Reserve
- Visakhapatnam Strategic Petroleum Reserve
इन भंडारों और वाणिज्यिक स्टॉक को मिलाकर देश के पास लगभग 40–45 दिन की जरूरत पूरी करने जितना तेल मौजूद है।
हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि यह केवल अस्थायी आपूर्ति संकट से निपटने के लिए है। अगर US-Iran conflict लंबे समय तक चलता है, तो वैश्विक ऊर्जा बाजार में गंभीर संकट पैदा हो सकता है।
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