मथुरा को राहत, आगरा में यमुना का बढ़ता जलस्तर संकट
मथुरा में यमुना का जलस्तर धीरे-धीरे गिरावट दर्ज कर रहा है, हालांकि यह अब भी खतरे के निशान 166 मीटर से ऊपर 167.43 मीटर पर मंगलवार दोपहर 3 बजे दर्ज किया गया। वहीं आगरा में यमुना का जलस्तर खतरे के निशान पार करने के बाद मंगलवार को स्थिर..
आगरा। मथुरा में यमुना का जलस्तर धीरे-धीरे गिरावट दर्ज कर रहा है, हालांकि यह अब भी खतरे के निशान 166 मीटर से ऊपर 167.43 मीटर पर मंगलवार दोपहर 3 बजे दर्ज किया गया। वहीं आगरा में यमुना का जलस्तर खतरे के निशान पार करने के बाद मंगलवार को स्थिर बना रहा।
मथुरा में राहत तब मिली जब हरियाणा के यमुनानगर स्थित हथिनी कुंड बैराज और दिल्ली के ओखला बैराज से पानी छोड़ना बंद कर दिया गया। हालांकि, मथुरा के गोकुल बैराज से पानी का डिस्चार्ज जारी रहा और मंगलवार शाम 4 बजे तक 1,52,658 क्यूबिक मीटर पानी छोड़ा गया।
मंगलवार सुबह 8 बजे मथुरा के प्रयाग घाट पर यमुना का जलस्तर 167.54 मीटर था, जो शाम 6 बजे तक घटकर 167.41 मीटर हो गया। इससे राहत कार्यों में जुटी एजेंसियों को थोड़ी राहत मिली।
आगरा में मंगलवार को यमुना का जलस्तर पूरे दिन 152.835 मीटर पर स्थिर रहा, जो खतरे के निशान 152.400 मीटर से ऊपर था। यमुना किनारा रोड के कई हिस्से जलमग्न हो गए, जबकि नदी किनारे स्थित श्मशान घाट डूब गया। यमुना का पानी ताजमहल की चारदीवारी तक पहुंच गया।
आगरा जिला प्रशासन की ओर से एडीएम (वित्त एवं राजस्व) शुभांगी शुक्ला ने प्रभावित इलाकों के निवासियों के लिए परामर्श जारी किया। इसमें महत्वपूर्ण दस्तावेज़ों को वाटरप्रूफ बैग में रखने, पशुओं को ऊंचे स्थानों पर ले जाने, नदी से दूर रहने और बच्चों पर विशेष ध्यान देने की अपील की गई है ताकि किसी भी तरह की अनहोनी से बचा जा सके।
प्रशासन ने आगरा में आईटीआई बल्केश्वर और कैलाश मंदिर क्षेत्र (नदी किनारे) पर राहत शिविर स्थापित किए हैं। सोमवार शाम तक लगभग 100 लोगों को आईटीआई बल्केश्वर राहत शिविर और 200 लोगों को कैलाश राहत शिविर में शिफ्ट किया गया।
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