दीवाली बाद धुंध में घिरा गुरुग्राम, AQI में रातोंरात 75 अंकों की उछाल, हवा ‘बेहद खराब’ श्रेणी में पहुंची
दीवाली के बाद मंगलवार सुबह गुरुग्राम घने धुएं और धूल की चादर में लिपटा नजर आया। आतिशबाज़ी से भरी रात के बाद शहर ने जब आंखें खोलीं, तो हवा इतनी भारी और धुंधली थी कि कई इलाकों में दृश्यता 1,000 मीटर से भी कम रह
गुरुग्राम। दीवाली के बाद मंगलवार सुबह गुरुग्राम घने धुएं और धूल की चादर में लिपटा नजर आया। आतिशबाज़ी से भरी रात के बाद शहर ने जब आंखें खोलीं, तो हवा इतनी भारी और धुंधली थी कि कई इलाकों में दृश्यता 1,000 मीटर से भी कम रह गई। रातभर के पटाखों और रासायनिक धुएं ने वायु गुणवत्ता को बुरी तरह प्रभावित किया, जिससे गुरुग्राम का वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) “बेहद खराब (Very Poor)” श्रेणी में पहुंच गया।
मंगलवार शाम 4 बजे तक AQI 370 दर्ज किया गया, जो सोमवार के 295 से 75 अंकों की बढ़ोतरी है। सोमवार को भी यह रविवार की तुलना में 50 अंक बढ़ा था। यह वही परंपरागत स्थिति है जो हर साल दीवाली के बाद देखने को मिलती है.. उत्सव की रात और दमघोंटू सुबह।
शहर के निवासियों ने हवा को “साँस लेने लायक नहीं” बताया। आंखों में जलन, गले में खराश और सांस लेने में तकलीफ़ जैसी शिकायतें शहरभर से आईं।
हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (HSPCB) के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, PM2.5 और PM10 के स्तर अनुमेय सीमा से क्रमशः 211.9% और 170.7% अधिक पाए गए। यह आंकड़े 19 से 21 अक्टूबर के बीच के हैं। पिछले साल इसी अवधि में PM2.5 में 198.76% और PM10 में 43% की बढ़ोतरी दर्ज हुई थी।
भारतीय मौसम विभाग (IMD) के एक अधिकारी ने बताया कि आमतौर पर दृश्यता 6,000–7,000 मीटर होती है, लेकिन धुंध और धुएं के कारण यह 1,000 मीटर से नीचे गिर गई। हालांकि पूर्वी हवाओं ने सोमवार रात की तुलना में हल्का सुधार किया, लेकिन 7–10 किमी/घंटा की कम रफ्तार वाली हवाएं प्रदूषकों को फैलाने में नाकाम रहीं।
IMD के अनुसार, पूरे सप्ताह मौसम शुष्क रहेगा और हवा की गति दक्षिण-पश्चिम दिशा में कमजोर बनी रहेगी। अधिकारी ने कहा, “रविवार तक वायु गुणवत्ता में सुधार की बहुत कम संभावना है।”
मंगलवार को शहर का अधिकतम तापमान 31.8°C और न्यूनतम 20.9°C दर्ज किया गया। स्थिति को और बिगाड़ने वाला तत्व था “तापमान उलटाव” (Temperature Inversion), जिसमें गर्म हवा प्रदूषकों को ज़मीन के करीब फंसा देती है। 300 मीटर की ऊंचाई पर तापमान 19.9°C और 580 मीटर पर 25°C दर्ज किया गया। साथ ही वायुदाब (Atmospheric Pressure) भी शनिवार को 1007.5 hPa और रविवार को 1008.1 hPa रहा, जिससे प्रदूषकों के फैलाव की संभावना और घट गई।
पर्यावरण संगठनों ने प्रशासन की तैयारी और कार्रवाई पर सवाल उठाए। “प्रशासन प्रदूषण नियंत्रण के हर मोर्चे पर विफल रहा — चाहे नियमों का पालन कराना हो या लोगों को जागरूक करना,”
ऐसा कहना था रुचिका सेठी टक्कर, सदस्य, Citizens for Clean Air का। उन्होंने बताया कि कई सोसाइटियों में प्रदूषण स्तर में अत्यधिक वृद्धि दर्ज की गई, जहां निजी मॉनिटर्स ने AQI स्तर 1000 µg/m³ से अधिक दिखाया।
उन्होंने यह भी कहा कि लोगों ने पटाखे जलाने की तीन घंटे की सीमा का उल्लंघन किया, जिससे कार्बन मोनोऑक्साइड और सल्फर डाइऑक्साइड जैसी हानिकारक गैसें फैलीं, जो श्वसन रोगों को बढ़ा सकती हैं और शरीर में ऑक्सीजन की आपूर्ति घटा देती हैं।
HSPCB के क्षेत्रीय अधिकारी कृष्ण कुमार ने बताया कि उन्होंने शहर में आतिशबाज़ी गोदामों से पाँच सैंपल लिए हैं ताकि सुनिश्चित किया जा सके कि केवल CSIR-NEERI द्वारा प्रमाणित “ग्रीन क्रैकर्स” ही बेचे जा रहे हैं।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि 60 फ्लाइंग स्क्वॉड टीमों को तैनात किया गया है, जो खुले में कचरा जलाने पर रोक और निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण नियमों के पालन की निगरानी कर रही हैं।
हालांकि पर्यावरण कार्यकर्ताओं का कहना है कि ये कदम अल्पकालिक और प्रतिक्रियात्मक हैं।
“हमें तात्कालिक उपायों जैसे स्प्रिंकलर या स्मॉग गन के बजाय कठोर अनुपालन और सतत निगरानी के माध्यम से प्रणालीगत बदलावों की ज़रूरत है,”
ऐसा कहना था भावरीन कंधारी, पर्यावरण अधिकार कार्यकर्ता और My Right To Breathe संगठन की सदस्य का।
उन्होंने कहा, “यह एक उत्सर्जन चक्र है — हम पहले प्रदूषक सामग्री बनाते हैं, फिर उन्हें जलाते हैं, और अंत में वेस्ट-टू-एनर्जी संयंत्रों में उनका पुनर्चक्रण करते हैं, जो स्वयं प्रदूषक उत्सर्जित करते हैं।”
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