मीरवाइज उमर फारूक नजरबंद, जामा मस्जिद में जुमा का खुतबा देने से रोका गया

वरिष्ठ धार्मिक और अलगाववादी नेता मीरवाइज उमर फारूक को शुक्रवार को नज़रबंद कर दिया गया। उन्होंने दावा किया कि प्रशासन ने उन्हें पुराने श्रीनगर स्थित जामा मस्जिद में साप्ताहिक जुमा का खुतबा (उपदेश) देने की अनुमति..

मीरवाइज उमर फारूक नजरबंद, जामा मस्जिद में जुमा का खुतबा देने से रोका गया
19-07-2025 - 03:15 PM

श्रीनगर। वरिष्ठ धार्मिक और अलगाववादी नेता मीरवाइज उमर फारूक को शुक्रवार को नज़रबंद कर दिया गया। उन्होंने दावा किया कि प्रशासन ने उन्हें पुराने श्रीनगर स्थित जामा मस्जिद में साप्ताहिक जुमा का खुतबा (उपदेश) देने की अनुमति नहीं दी।

मीरवाइज ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, "लगातार दूसरे शुक्रवार मैं नज़रबंद हूं। मेरे आवास तक आने वाली हर गली और रास्ते को बैरिकेड्स लगाकर बंद कर दिया गया है, जिससे पूरे मोहल्ले को परेशानी हो रही है।"

उन्होंने आगे कहा, "शासकों को स्पष्ट रूप से बता देना चाहता हूं कि हमारे शहीदों की यादें न तो उनके आदेशों से नियंत्रित की जा सकती हैं और न ही मिटाई जा सकती हैं। ये हमारे दिलों में बसी हुई हैं। इतिहास और तथ्य लॉकडाउन, कब्रिस्तानों तक पहुंच रोकने या मुझे जामा मस्जिद जाने से रोकने से मिटाए नहीं जा सकते।"

मीरवाइज ने 13 जुलाई 1931 के शहीदों को याद करते हुए कहा, "ये शहीद कश्मीर में राजनीतिक आंदोलन के अग्रदूत थे। यह एक अन्याय के खिलाफ लोगों की न्यायपूर्ण लड़ाई थी। वे हमारे लिए प्रेरणा हैं और हमेशा रहेंगे।"

केंद्र सरकार की सख्ती

गौरतलब है कि गृह मंत्रालय (MHA) ने हाल ही में मीरवाइज उमर फारूक द्वारा संचालित संगठन 'अवामी एक्शन कमेटी' (AAC) को "राष्ट्रविरोधी संगठन" घोषित करते हुए उस पर प्रतिबंध लगा दिया है। मंत्रालय का आरोप है कि यह संगठन भारत विरोधी भावनाएं भड़काता है और युवाओं को हिंसा के लिए उकसाता है।

अवामी एक्शन कमेटी की स्थापना वर्ष 1963 में मीरवाइज के पिता मौलाना मोहम्मद फारूक ने की थी, जब कश्मीर में 'रिलिक आंदोलन' (Relic Agitation) चल रहा था।

वर्ष 1990 में जब आतंकियों ने मौलाना फारूक की हत्या उनके निवास निगीन में कर दी थी, तब मीरवाइज उमर फारूक ने संगठन की कमान संभाली।

हर शुक्रवार की परंपरा और हुर्रियत की भूमिका

श्रीनगर के नौहट्टा क्षेत्र स्थित जामा मस्जिद में मीरवाइज उमर फारूक हर शुक्रवार को धार्मिक उपदेश दिया करते हैं — यह एक पारंपरिक भूमिका रही है जिसे अब दो हफ्तों से रोका गया है।

मीरवाइज अलगाववादी संगठन हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के "उदारवादी धड़े" के प्रमुख हैं। हुर्रियत का विभाजन 2003 में हुआ था, जिसमें "कट्टरपंथी धड़े" का नेतृत्व स्वर्गीय सैयद अली शाह गिलानी और उदारवादी धड़े का नेतृत्व मीरवाइज उमर फारूक करते हैं।

स्थिति का महत्व

  • 13 जुलाई के शहीदों को कश्मीर के राजनीतिक आंदोलन की शुरुआत का प्रतीक माना जाता है, और मीरवाइज हर साल उनकी याद में विशेष कार्यक्रम में शामिल होते रहे हैं।
  • उनकी नजरबंदी और धार्मिक गतिविधियों पर रोक को लेकर स्थानीय स्तर पर नाराजगी देखी जा रही है।
  • यह घटनाक्रम सरकार की कश्मीर में आतंक और अलगाववाद पर नियंत्रण की नीति और धार्मिक गतिविधियों की निगरानी को दर्शाता है।

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THE NEWS THIKANA, संपादकीय डेस्क यह द न्यूजठिकाना डॉट कॉम की संपादकीय डेस्क है। डेस्क के संपादकीय सदस्यों का प्रयास रहता है कि अपने पाठकों को निष्पक्षता और निर्भीकता के साथ विभिन्न विषयों के सच्चे, सटीक, विश्वसनीय व सामयिक समाचारों के अलावाआवश्यक उल्लेखनीय विचारों को भी सही समय पर अवगत कराएं।