मणिपुर में और अधिक समुदायों ने केंद्र से की कुकी उग्रवादियों के साथ समझौता खत्म करने की मांग, अमित शाह को लिखा पत्र

मणिपुर के चार प्रमुख समुदायों की प्रभावशाली नागरिक संगठनों ने पहली बार एकजुट होकर केंद्र सरकार से 25 कुकी, ज़ोमी और ह्मार उग्रवादी संगठनों के साथ किए गए त्रिपक्षीय ‘सस्पेंशन ऑफ ऑपरेशंस’ (SoO) समझौते को समाप्त करने की मांग..

मणिपुर में और अधिक समुदायों ने केंद्र से की कुकी उग्रवादियों के साथ समझौता खत्म करने की मांग, अमित शाह को लिखा पत्र
04-07-2025 - 12:14 PM

इम्फाल। मणिपुर के चार प्रमुख समुदायों की प्रभावशाली नागरिक संगठनों ने पहली बार एकजुट होकर केंद्र सरकार से 25 कुकी, ज़ोमी और ह्मार उग्रवादी संगठनों के साथ किए गए त्रिपक्षीय ‘सस्पेंशन ऑफ ऑपरेशंस’ (SoO) समझौते को समाप्त करने की मांग की है। इन संगठनों ने इस समझौते को त्रुटिपूर्ण और बार-बार उल्लंघन किया गया” बताते हुए इसे आगे न बढ़ाने की अपील की है।

अब तक इस समझौते के खिलाफ मीतेई समुदाय का वैश्विक मंच 'Meitei Alliance' और थाडो जनजाति का संगठन 'Thadou Inpi Manipur' लगातार विरोध कर रहे थे, लेकिन अब दो और बड़े संगठनों – Foothills Naga Coordination Committee और Indigenous Peoples' Forum Manipur – ने भी इसका विरोध शुरू कर दिया है।

क्या है SoO समझौता?

यह समझौता केंद्र, मणिपुर सरकार और 25 कुकी-ज़ोमी-ह्मार उग्रवादी संगठनों के बीच हुआ था। समझौते के तहत..

  • उग्रवादियों को निर्धारित कैंपों में रहना होता है,
  • हथियार लॉक करके रखने होते हैं,
  • नए सदस्यों की भर्ती नहीं की जा सकती।

 संगठनों के आरोप

चारों संगठनों ने गृहमंत्री अमित शाह को दिए ज्ञापन में कहा कि..

  • SoO के अंतर्गत आने वाले उग्रवादी संगठन नियमों का लगातार उल्लंघन कर रहे हैं।
  • ये समूह सभी समुदायों की सुरक्षा और शांति को खतरे में डाल रहे हैं।
  • समझौते में स्पष्ट है कि हिंसा, हत्या, अपहरण, हथियार लेकर चलना, जबरन टैक्स वसूलना आदि प्रतिबंधित है, लेकिन इसका पालन नहीं हो रहा।

ज्ञापन में उठाए गए मुख्य बिंदु

  1. SoO समझौते का ढांचा त्रुटिपूर्ण है क्योंकि जिन संगठनों पर कार्रवाई होनी चाहिए, वे ही संयुक्त निगरानी समिति (JMC) में शामिल हैं और कार्रवाई की सिफारिश खुद पर ही करते हैं।
  2. राज्य सरकार ही कानून-व्यवस्था की जिम्मेदार होती है, लेकिन इस समझौते के चलते वह कार्रवाई नहीं कर पा रही है।
  3. मणिपुर सरकार ने मार्च 2023 में KNA और ZRA के साथ SoO को समाप्त कर दिया था और जनवरी 2024 में इसके नवीनीकरण की सिफारिश नहीं की थी।
  4. अतः जब तक राज्य सरकार सिफारिश न करे, तब तक SoO समझौते का नवीनीकरण असंवैधानिक होगा।

संभावित समाधान जो सुझाए गए

  1. पिछले मणिपुर सरकार की सिफारिश के अनुसार SoO समझौता समाप्त किया जाए, या फिर नई निर्वाचित सरकार बनने तक कोई फैसला न लिया जाए।
  2. यदि समझौता बढ़ाया जाए तो इसका ढांचा पूरी तरह पुनरीक्षित किया जाए।
  3. किसी भी हित-संघर्ष की स्थिति में स्वतंत्र और निष्पक्ष मध्यस्थ की नियुक्ति की जाए।
  4. जिन उग्रवादियों ने हिंसक गतिविधियों में भाग लिया है, उन्हें कानून के अनुसार दंडित किया जाए – चाहे वे KNO या UPF से जुड़े हों।
  5. SoO को हिंसा रोकने का माध्यम माना जाए, न कि हिंसा को संरक्षण देने वाला तंत्र।

हालिया घटनाएं जो उल्लंघन को साबित करती हैं

  • जनवरी 2024 में मोरेह में दो कमांडोज की हत्या के मामले में NIA ने KNA के एक उग्रवादी को गिरफ्तार किया।
  • सितंबर 2024 में मणिपुर पुलिस ने ज़िरीबाम में मुठभेड़ में तीन Kuki Liberation Army (KLA) उग्रवादियों को मार गिराया।
  • इसी मुठभेड़ में पहली बार मणिपुर पुलिस ने एक Meitei उग्रवादी समूह UNLF (P) की संलिप्तता भी मानी, जिसका पहले केंद्र से संघर्षविराम हुआ था।

परस्पर आरोप

हालांकि सिर्फ दो मामलों की आधिकारिक पुष्टि हुई है, लेकिन मणिपुर में दोनों पक्ष  Meitei और Kuki – एक-दूसरे पर अपने-अपने उग्रवादी संगठनों की भूमिका को छुपाने का आरोप लगा रहे हैं।

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THE NEWS THIKANA, संपादकीय डेस्क यह द न्यूजठिकाना डॉट कॉम की संपादकीय डेस्क है। डेस्क के संपादकीय सदस्यों का प्रयास रहता है कि अपने पाठकों को निष्पक्षता और निर्भीकता के साथ विभिन्न विषयों के सच्चे, सटीक, विश्वसनीय व सामयिक समाचारों के अलावाआवश्यक उल्लेखनीय विचारों को भी सही समय पर अवगत कराएं।