ईरान युद्ध में पाकिस्तान की ‘तटस्थता’ पर सवाल, रिपोर्ट में बड़ा खुलासा

ईरान युद्ध के बीच पाकिस्तान की “शांतिदूत” की छवि पर अब गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। Financial Times की एक रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान खुद पहल करने वाला मध्यस्थ नहीं था बल्कि White House के दबाव में उसने ईरान के साथ अस्थायी युद्धविराम कराने की भूमिका..

ईरान युद्ध में पाकिस्तान की ‘तटस्थता’ पर सवाल, रिपोर्ट में बड़ा खुलासा
10-04-2026 - 11:42 AM

ईरान युद्ध के बीच पाकिस्तान की “शांतिदूत” की छवि पर अब गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। Financial Times की एक रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान खुद पहल करने वाला मध्यस्थ नहीं था बल्कि White House के दबाव में उसने ईरान के साथ अस्थायी युद्धविराम कराने की भूमिका निभाई।

रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिका ने इस्लामाबाद को एक “सुविधाजनक माध्यम” के तौर पर इस्तेमाल किया, ताकि ईरान पर दबाव बनाकर युद्धविराम कराया जा सके। यह खुलासा उस समय हुआ है जब अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump लगातार ईरान को धमकी दे रहे थे और दावा कर रहे थे कि तेहरान युद्धविराम के लिए “गिड़गिड़ा रहा है”।

अमेरिका का दबाव और पाकिस्तान की भूमिका

रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप प्रशासन कई हफ्तों से पाकिस्तान पर दबाव बना रहा था कि वह ईरान को लड़ाई रोकने और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने के लिए राजी करे।

पाकिस्तान, एक मुस्लिम-बहुल पड़ोसी देश होने के नाते, ईरान के सामने इस प्रस्ताव को “बेचने” की भूमिका निभा रहा था।

पाकिस्तान के रक्षा प्रमुख Asim Munir की अगुवाई में बैक-चैनल कूटनीति के बाद मंगलवार रात अमेरिका, इज़राइल और ईरान के बीच दो हफ्ते के युद्धविराम पर सहमति बनी।

अमेरिका की चिंता: तेल कीमतें और ईरान की मजबूती

रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप युद्धविराम को लेकर पहले से ही इच्छुक थे। इसके पीछे दो बड़े कारण थे:

  • वैश्विक तेल कीमतों में तेज उछाल
  • ईरानी शासन की अपेक्षा से अधिक मजबूती

ट्रंप ने इससे पहले 21 मार्च को ईरान के पावर प्लांट्स को “पूरी तरह तबाह” करने की धमकी भी दी थी।

अमेरिका को पाकिस्तान की जरूरत क्यों पड़ी

रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका और पाकिस्तान दोनों का मानना था कि अगर कोई मुस्लिम-बहुल पड़ोसी देश प्रस्ताव देगा, तो ईरान उसे अधिक स्वीकार करेगा। यही वजह थी कि इस्लामाबाद को मध्यस्थ बनाया गया।

घटनाक्रम (Timeline)

  • ट्रंप की डेडलाइन से पहले Asim Munir ने अमेरिकी नेताओं—ट्रंप, उपराष्ट्रपति JD Vance और विशेष दूत Steve Witkoff—से बातचीत की।
  • इसके बाद उन्होंने ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi से दो हफ्ते के युद्धविराम प्रस्ताव पर चर्चा की।
  • पाकिस्तान के प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif ने इस प्रस्ताव को सार्वजनिक किया।

हालांकि, The New York Times के अनुसार, इस बयान को जारी करने से पहले ही व्हाइट हाउस इसकी मंजूरी दे चुका था।

दिलचस्प बात यह रही कि शरीफ ने अपने पोस्ट में “draft — Pakistan's PM message on X” शीर्षक हटाना भूल गए, जिससे पर्दे के पीछे की प्रक्रिया उजागर हो गई।

बैक-चैनल बातचीत और प्रस्ताव

पाकिस्तानी अधिकारियों ने अमेरिका और ईरान के बीच संदेश पहुंचाने का काम किया।

  • अमेरिका की ओर से 15 बिंदुओं का प्रस्ताव दिया गया
  • ईरान ने 5 और 10 बिंदुओं के जवाब भेजे
  • युद्धविराम की अवधि 45 दिन से लेकर 2 हफ्ते तक प्रस्तावित की गई

धीरे-धीरे ईरान यूरेनियम भंडार पर सीमाएं स्वीकार करने के लिए तैयार होता दिखा।

IRGC की चुनौती

ईरान में सबसे बड़ी बाधा Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) रही।

हालांकि राजनीतिक नेतृत्व सिद्धांततः सहमत था, लेकिन IRGC के भीतर मतभेद थे। कुछ धड़े युद्ध खत्म करने और अमेरिका से बातचीत के खिलाफ थे।

आखिरी क्षणों में तनाव

मंगलवार को सऊदी अरब के जुबैल पेट्रोकेमिकल हब पर ईरानी ड्रोन हमले ने स्थिति को और बिगाड़ दिया।

पाकिस्तान, जिसका सऊदी अरब के साथ रक्षा समझौता है, ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया दी और संकेत दिया कि ऐसे हमले शांति प्रयासों को विफल कर सकते हैं।

आगे क्या?

इन घटनाओं के बाद ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif से बातचीत में इस्लामाबाद में वार्ता के लिए प्रतिनिधि भेजने पर सहमति जताई।

निष्कर्ष:
इस रिपोर्ट ने पाकिस्तान की तटस्थता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सामने आया है कि वह स्वतंत्र मध्यस्थ कम और अमेरिका के लिए एक रणनीतिक माध्यम ज्यादा था, जिससे क्षेत्रीय कूटनीति की वास्तविक तस्वीर उजागर होती है।

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THE NEWS THIKANA, संपादकीय डेस्क यह द न्यूजठिकाना डॉट कॉम की संपादकीय डेस्क है। डेस्क के संपादकीय सदस्यों का प्रयास रहता है कि अपने पाठकों को निष्पक्षता और निर्भीकता के साथ विभिन्न विषयों के सच्चे, सटीक, विश्वसनीय व सामयिक समाचारों के अलावाआवश्यक उल्लेखनीय विचारों को भी सही समय पर अवगत कराएं।