रूसी तेल पर ट्रंप की बात भारत को ‘गंभीरता से’ लेनी चाहिए: निक्की हेली
रिपब्लिकन नेता निक्की हेली ने कहा है कि भारत को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की रूसी तेल पर उठाई गई बात को "गंभीरता से" लेना चाहिए और वॉशिंगटन के साथ मिलकर इसका समाधान "जल्दी से जल्दी" निकालना..
वॉशिंगटन। रिपब्लिकन नेता निक्की हेली ने कहा है कि भारत को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की रूसी तेल पर उठाई गई बात को "गंभीरता से" लेना चाहिए और वॉशिंगटन के साथ मिलकर इसका समाधान "जल्दी से जल्दी" निकालना चाहिए।
भारत-अमेरिका साझेदारी की अहमियत पर जोर देते हुए हेली ने कहा, "भारत को रूसी तेल पर ट्रंप की बात गंभीरता से लेनी चाहिए और व्हाइट हाउस के साथ मिलकर समाधान खोजना चाहिए। जितना जल्द हो उतना बेहतर।"
संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका की पूर्व राजदूत हेली ने कहा कि दुनिया की दो सबसे बड़ी लोकतांत्रिक ताकतों के बीच दशकों पुरानी दोस्ती और सद्भावना मौजूदा चुनौतियों से निकलने की ठोस नींव है।
उन्होंने कहा, "दुनिया की दो सबसे बड़ी लोकतंत्रों के बीच दशकों से चली आ रही दोस्ती और सद्भाव हमें मौजूदा उतार-चढ़ाव से आगे बढ़ने का मजबूत आधार देती है।"
हेली ने यह भी स्पष्ट किया कि चीन का मुकाबला करने के लिए अमेरिका के पास भारत जैसा दोस्त होना बेहद ज़रूरी है। उन्होंने कहा, "व्यापार विवादों और रूसी तेल आयात जैसे मुद्दों पर कठिन बातचीत की ज़रूरत है। लेकिन हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि सबसे महत्वपूर्ण हमारी साझा प्राथमिकताएँ हैं। चीन का सामना करने के लिए अमेरिका को भारत जैसे मित्र की आवश्यकता है।"
“भारत को ‘मूल्यवान स्वतंत्र और लोकतांत्रिक साझेदार’ की तरह मानें”: हेली
इससे पहले हेली ने कहा था कि वॉशिंगटन की प्राथमिकता भारत के साथ रिश्तों में आई "गिरावट" को रोकना होनी चाहिए और अमेरिका को भारत को एक "मूल्यवान स्वतंत्र और लोकतांत्रिक साझेदार" की तरह मानना चाहिए।
उन्होंने कहा, "भारत को वैसे ही मूल्यवान स्वतंत्र और लोकतांत्रिक साझेदार की तरह ट्रीट किया जाना चाहिए, जैसा वह है – न कि चीन जैसा विरोधी, जिस पर अब तक उसके रूसी तेल खरीदने को लेकर कोई पाबंदी नहीं लगी है, जबकि वह मास्को का सबसे बड़ा ग्राहक है।"
हेली और बिल ड्रेक्सल ने न्यूज़वीक के लिए लिखे एक विचार लेख में भारत की रणनीतिक भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने कहा..
- भारत अमेरिका को चीन से अपनी अहम सप्लाई चेन हटाने में मदद करने में अहम है।
- भारत "ऐसा अकेला देश है जो चीन जैसी बड़ी उत्पादन क्षमता हासिल करने में सक्षम है, खासकर उन उत्पादों के लिए जिन्हें अमेरिका में न तो जल्दी और न ही कुशलता से बनाया जा सकता है – जैसे वस्त्र, सस्ते मोबाइल फोन और सौर पैनल।"*
अमेरिकी टैरिफ पर बोले जयशंकर
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने शनिवार को कहा कि अमेरिका का टैरिफ "अनुचित और अव्यावहारिक" है और इसे ग़लत ढंग से "तेल का मुद्दा" बताकर पेश किया जा रहा है। उन्होंने दोहराया कि भारत की कुछ "रेड लाइन्स" हैं और देश किसानों व छोटे उत्पादकों के हितों से समझौता नहीं करेगा।
हालांकि, उन्होंने यह भी बताया कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर बातचीत जारी है।
"हम दो बड़े देश हैं, बातचीत ज़रूरी है… लाइनें कटी नहीं हैं, लोग बातचीत कर रहे हैं और देखेंगे यह कहां तक जाता है।" इससे पहले अगस्त के दूसरे पखवाड़े में भारत आने वाला अमेरिकी वार्ता दल अपनी यात्रा "फिलहाल रोक" चुका है।
इकोनॉमिक टाइम्स वर्ल्ड लीडर्स फोरम 2025 में जयशंकर ने कहा,"हमने कभी ऐसा अमेरिकी राष्ट्रपति नहीं देखा जिसने इतनी खुलकर विदेश नीति चलाई हो। यह अपने आप में एक बड़ी बदलाव है और यह केवल भारत तक सीमित नहीं है। राष्ट्रपति ट्रंप का दुनिया से डील करने का तरीका बहुत बड़ा बदलाव है… इस तरह से व्यापार पर टैरिफ लगाना नया है… और गैर-व्यापार क्षेत्रों में टैरिफ लगाना तो और भी अनोखा है।"
भारत पर ट्रंप का सबसे बड़ा टैरिफ
ट्रंप ने भारतीय उत्पादों पर 50 प्रतिशत का टैरिफ लगाने का ऐलान किया है, जो दुनिया में किसी भी देश पर सबसे अधिक है।
- 25% टैरिफ पहले ही लागू हो चुका है।
- शेष 25% टैरिफ – जो रूस से ऊर्जा आयात पर है – 27 अगस्त से लागू होगा।
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