राजस्थान: सियासी सरगर्मियों के बीच चर्चा में आए पायलट और राजे, क्या होगा दोनों महारथियों का भविष्य..!

<p><em><strong>राजस्थान की राजनीति में एक ही सवाल उभरकर आ रहा है कि पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट और पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की अगली भूमिका क्या होगी! अटकलों और सस्पेंस के बीच राजनीतिक पंडित इसी पर चर्चा कर रहे हैं कि ये दोनों राज्य की राजनीति में वापस आएंगे या नहीं?</strong></em></p>

राजस्थान: सियासी सरगर्मियों के बीच चर्चा में आए पायलट और राजे, क्या होगा दोनों महारथियों का भविष्य..!
27-12-2022 - 10:45 AM
21-04-2026 - 12:04 PM

राजस्थान में विधानसभा चुनाव के बाद 2018 में तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष सचिन पायलट को उपमुख्यमंत्री बनाया गया था। इसके बाद उनके और 18 अन्य विधायकों द्वारा मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के खिलाफ विद्रोह करने के बाद उनके विभागों को छीन लिया गया था।
हालांकि, बाद में उन्हें एक अच्छा पोर्टफोलियो दिए जाने के वादे के साथ पार्टी में वापस लाया गया। तब से, एक संगठन के रूप में कांग्रेस बाद की तारीखें देती रही है, लेकिन कुछ भी हासिल नहीं हुआ है। कोविड महामारी, अन्य राज्यों में विधानसभा चुनाव, राज्य में बजट आदि के मद्देनजर पायलट के अगले पोर्टफोलियो में देरी हुई है।
गहलोत समर्थकों ने दी इस्तीफे की धमकी
जब कांग्रेस आलाकमान ने एक बैठक बुलाई थी और 25 सितंबर को सभी सीएलपी सदस्यों को इस मामले पर चर्चा करने के लिए आमंत्रित किया था, तो गहलोत खेमे के नेताओं ने अन्य स्थान पर एक समानांतर बैठक बुला ली। यहां लगभग 91 विधायकों ने अपने इस्तीफे के साथ पार्टी को धमकी दी थी, जो विधानसभा अध्यक्ष सी.पी. जोशी को सौंपे गए थे।
पायलट खेमा है लगातार सक्रिय
इस सारे ड्रामे के बीच यह सवाल अभी भी बना हुआ है कि क्या पायलट को राज्य का नेतृत्व करने का मौका दिया जाएगा और यह अटकलें आने वाले महीनों में भी बनी रहेगी क्योंकि पायलट खेमा बार-बार अपनी मांगों को सामने लाता रहा है।
भाजपा में भी घमासान
केवल कांग्रेस के मामले में ही ऐसा नहीं है, विपक्षी भाजपा को भी राजे को दरकिनार किए जाने के साथ इसी तरह की चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। राजे के समर्थक भी उन्हें अगले मुख्यमंत्री के रूप में पेश कर रहे हैं, जबकि पार्टी आलाकमान ने 2023 के विधानसभा चुनावों के लिए किसी भी मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार की घोषणा करने से इनकार कर दिया है।
हटाए गए थे राजे के पोस्टर
इससे पहले उनके पोस्टर पार्टी कार्यालय के साथ-साथ उपचुनावों के दौरान भी हटाए गए थे। पार्टी पदाधिकारियों ने कहा कि केंद्रीय नेतृत्व ने निर्देश दिया था कि पोस्टरों पर सिर्फ प्रदेश अध्यक्ष, राष्ट्रीय अध्यक्ष और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीर ही लगाई जाएगी।
जनाक्रोश यात्रा बनी राजे का मंच
राजे को उपचुनावों के प्रचार और कई सभाओं से भी नदारद देखा गया है। पोस्टरों में राजे की तस्वीरों की वापसी के लिए भाजपा की जनाक्रोश यात्रा एक मंच बन गई। एक बार फिर चर्चा है कि क्या वह वापस आएंगी या उन्हें अलग-थलग रखा जाएगा, जैसा कि वह गुजरात चुनावों में थीं। गुजरात में स्टार प्रचारकों की सूची में राजे का नाम नहीं था।
राजनीतिक शब्दजाल में उलझते नेता
पायलट और केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत के खिलाफ मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की ओर से इस्तेमाल किए गए ‘गद्दार’, ‘निक्कमा’, ‘नकारा’ जैसे अपशब्द राजस्थान में राजनीतिक शब्दजाल बन गए। गहलोत ने शुरूआत में इन शब्दों का इस्तेमाल 2020 में राजनीतिक विद्रोह के दौरान पायलट के खिलाफ किया था। यहां तक कि हाल ही में, गहलोत ने राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा की शुरूआत से पहले पायलट को ‘गद्दार’ करार दिया था।
राजनीतिक पंडितों को चकराते गहलोत
जब भी मुख्यमंत्री ने पायलट के खिलाफ इन शब्दों का इस्तेमाल किया, तो राजनीतिक पंडितों को इसका अर्थ और संकेत समझने के लिए काफी मेहनत करनी पड़ी। हाल ही में, जब गहलोत ने भारत जोड़ो यात्रा से पहले पायलट को लेकर कहा कि एक ‘गद्दार’ मुख्यमंत्री नहीं हो सकता, तो राजनीतिक विशेषज्ञों ने कहा कि यह आलाकमान को सीधा संदेश था कि वह कभी नहीं चाहेंगे कि पायलट शीर्ष पद पर आसीन हों।
गहलोत के शब्दों के मायने कुछ और
दरअसल सवाल उठ रहे हैं कि अपनी सधी हुई भाषा के लिए जाने जाने वाले ‘गांधीवादी’ मुख्यमंत्री ने अपने डिप्टी के खिलाफ इन कठोर शब्दों का इस्तेमाल क्यों किया। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने कहा, इन शब्दों का प्रयोग राजनीतिक शब्दजाल की तरह है। मुख्यमंत्री ने केंद्रीय मंत्री गजेंद्रसिंह शेखावत के लिए भी ईआरसीपी मामले में निकम्मा का इस्तेमाल किया है और यह मामला अब आगामी चुनावों में एक राष्ट्रीय मुद्दा बन गया है।
पिछले कई महीनों से राजस्थान के राजनीतिक हलकों में  सवाल उठाया जा रहा है कि क्या पूर्व डिप्टी मुख्यमंत्री सचिन पायलट को राज्य का नेतृत्व करने का मौका मिलेगा। क्या ‘गद्दार’, ‘निकम्मा’ और ‘नकारा’ जैसे और शब्द राज्य को हिला देंगे या 2023 के विधानसभा चुनावों में लौट के आएंगे? फिलहाल इनके जवाब चुनाव में ही मिलने की संभावना है।

What's Your Reaction?

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow

THE NEWS THIKANA, संपादकीय डेस्क यह द न्यूजठिकाना डॉट कॉम की संपादकीय डेस्क है। डेस्क के संपादकीय सदस्यों का प्रयास रहता है कि अपने पाठकों को निष्पक्षता और निर्भीकता के साथ विभिन्न विषयों के सच्चे, सटीक, विश्वसनीय व सामयिक समाचारों के अलावाआवश्यक उल्लेखनीय विचारों को भी सही समय पर अवगत कराएं।