नुसरत भरूचा की महाकालेश्वर मंदिर यात्रा पर विवाद, मुस्लिम नेता ने बताया ‘गंभीर गुनाह’, सोशल मीडिया पर मचा बवाल
बॉलीवुड अभिनेत्री नुसरत भरूचा द्वारा मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में दर्शन, पूजा-अर्चना और भस्म आरती में भाग लेने को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। एक मुस्लिम धार्मिक नेता ने अभिनेत्री की इस यात्रा की आलोचना करते हुए इसे “गंभीर गुनाह” करार दिया, जिसके बाद सोशल मीडिया पर तीखी बहस छिड़..
नयी दिल्ली। बॉलीवुड अभिनेत्री नुसरत भरूचा द्वारा मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में दर्शन, पूजा-अर्चना और भस्म आरती में भाग लेने को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। एक मुस्लिम धार्मिक नेता ने अभिनेत्री की इस यात्रा की आलोचना करते हुए इसे “गंभीर गुनाह” करार दिया, जिसके बाद सोशल मीडिया पर तीखी बहस छिड़ गई है।
ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रज़वी बरेलवी ने नुसरत भरूचा की मंदिर यात्रा पर आपत्ति जताते हुए कहा कि शरीयत के अनुसार किसी मुस्लिम महिला का पूजा करना, दुपट्टा ओढ़ना और चंदन लगाना “गुनाह-ए-अज़ीम” (गंभीर पाप) है। उन्होंने दावा किया कि ऐसे धार्मिक कर्म इस्लाम के मूल सिद्धांतों के खिलाफ हैं।
मौलाना शहाबुद्दीन रज़वी बरेलवी ने यह भी कहा कि अभिनेत्री को अपने इस कृत्य के लिए तौबा (पश्चाताप) करनी चाहिए और कलमा पढ़ना चाहिए।
उन्होंने कहा, “नुसरत भरूचा उज्जैन के महाकाल मंदिर गईं और वहां पूजा-अर्चना की। शरीयत के मुताबिक ऐसे कर्म गंभीर गुनाह (गुनाह-ए-अज़ीम) हैं।”
जहां मौलाना रज़वी ने अभिनेत्री के इस कदम को “गंभीर गुनाह” बताया, वहीं कुछ अन्य लोगों ने उनकी धार्मिक आस्था को लेकर भी टिप्पणियां कीं।
हालांकि, सोशल मीडिया पर कई यूज़र्स ने मौलाना के बयान का कड़ा विरोध किया। एक यूज़र ने लिखा, “क्या नुसरत भरूचा को आपकी सलाह की ज़रूरत है? अगर नहीं, तो चुप रहिए और दूसरों की निजी या सार्वजनिक ज़िंदगी में दखल देना बंद कीजिए।”
एक अन्य यूज़र ने ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, “यह देश संविधान से चलता है, शरीयत से नहीं। सभी को संविधान का सम्मान करना चाहिए।”
गौरतलब है कि रविवार सुबह उज्जैन के महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में भस्म आरती का आयोजन हुआ था, जिसमें नुसरत भरूचा भी शामिल हुई थीं। इस धार्मिक यात्रा के बाद उठे विवाद ने एक बार फिर व्यक्तिगत आस्था, धार्मिक स्वतंत्रता और संवैधानिक अधिकारों को लेकर बहस को तेज कर दिया है।
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