ओएनजीसी की सहायक कंपनी ऑयल इंडिया को 2027 तक रूस में निवेश की पूरी वसूली की उम्मीद
सरकारी तेल और गैस अन्वेषण एवं उत्पादन कंपनी ऑयल इंडिया लिमिटेड (OIL) ने अब तक रूस में अपनी परिसंपत्तियों से 942 मिलियन डॉलर का लाभांश प्राप्त किया है, जो कि वेंकोरनेफ्ट और तास-यूर्याख परियोजनाओं में किए गए मूल निवेश का 91% से अधिक..
नयी दिल्ली। सरकारी तेल और गैस अन्वेषण एवं उत्पादन कंपनी ऑयल इंडिया लिमिटेड (OIL) ने अब तक रूस में अपनी परिसंपत्तियों से 942 मिलियन डॉलर का लाभांश प्राप्त किया है, जो कि वेंकोरनेफ्ट और तास-यूर्याख परियोजनाओं में किए गए मूल निवेश का 91% से अधिक है। कंपनी के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक (सीएमडी) रंजीत रथ ने गुरुवार को कहा कि आने वाले वर्षों में पूरे निवेश की वसूली की उम्मीद है।
वर्तमान में रूस में OIL के बैंक खातों में लगभग 330 मिलियन डॉलर का लाभांश अटका हुआ है। कंपनी ने इन दोनों परियोजनाओं में करीब 1 अरब डॉलर का निवेश किया था। रथ ने कहा कि अमेरिकी शुल्कों (टैरिफ) का अब तक इसकी रूसी परिसंपत्तियों पर कोई असर नहीं पड़ा है और अगले एक साल में वहां से ड्रिलिंग शुरू हो जाएगी।
ऑयल इंडिया की हिस्सेदारी
- ऑयल इंडिया, ओएनजीसी विदेश और भारत पेट्रो रिसोर्सेज लिमिटेड ने रूस की राष्ट्रीय तेल कंपनी रोसनेफ्ट से
- 23.9% हिस्सेदारी जेएससी वेंकोरनेफ्ट में
- और 29.9% हिस्सेदारी एलएलसी तास-यूर्याख में खरीदी थी।
- रोसनेफ्ट इन दोनों क्षेत्रों का संचालन करती है और ये उसकी पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनियां हैं।
- कंपनी की उपस्थिति मोज़ाम्बिक और वेनेज़ुएला जैसे देशों में भी है, जहां यह संयुक्त उपक्रमों के जरिए उत्पादन और विकास में सक्रिय है।
- वित्त वर्ष 2024-25 में कंपनी की विदेशी परिसंपत्तियों से मुख्य रूप से रूस से 2.097 एमएमटीओई तेल और गैस का उत्पादन हुआ।
मोज़ाम्बिक एलएनजी परियोजना
- ऑयल इंडिया को उम्मीद है कि मोज़ाम्बिक एलएनजी परियोजना 2025 की दूसरी छमाही में फिर शुरू होगी, क्योंकि सुरक्षा हालात बेहतर हुए हैं।
- इस परियोजना में कंपनी ने विश्वस्तरीय 13.12 एमएमटीपीए लो-कार्बन, इंटीग्रेटेड एलएनजी सुविधा में निवेश किया है।
- रथ के अनुसार, यह परियोजना भारतीय गैस बाज़ार की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए उपयुक्त स्थिति में है।
- परियोजना अप्रैल 2021 से फोर्स मेज्योर (आपात स्थिति) में थी, जब उत्तरी मोज़ाम्बिक के काबो डेलगाडो प्रांत में आईएस आतंकियों ने हमला किया था।
- इसमें ऑयल इंडिया, ओएनजीसी विदेश और भारत पेट्रो रिसोर्सेज की कुल 30% हिस्सेदारी है।
- थाईलैंड की पीटीटीईपी शेष हिस्सेदारी की मालिक है।
- संचालन की जिम्मेदारी टोटल एनर्जीज़ (26.5% हिस्सेदारी) के पास है, जबकि मित्सुई एंड कंपनी (20%) और मोज़ाम्बिक की राज्य कंपनी ENH (15%) अन्य साझेदार हैं।
ऑयल इंडिया की भविष्य की योजनाएं
- कंपनी अगले दो महीने में असम के बरेकरी क्षेत्र में मल्टीलेटरल ड्रिलिंग शुरू करने की तैयारी कर रही है ताकि भूमि की कमी की चुनौती से निपटा जा सके।
- कंपनी का लक्ष्य है कि..
- 2030 तक ₹1 लाख करोड़ की वार्षिक आय प्राप्त करे।
- ₹1.3 लाख करोड़ का संचयी पूंजीगत व्यय (कैपेक्स) करे।
- वर्तमान वित्त वर्ष (2025-26) में ₹17,000-18,000 करोड़ खर्च करने की योजना है।
- उत्पादन लक्ष्य:
- 2030 तक 10 मिलियन मीट्रिक टन ऑयल इक्विवेलेंट (MMTOE) तेल और गैस उत्पादन।
- 2027 तक ₹10,000 करोड़ का समेकित कर-उपरांत लाभ (PAT)।
- चालू वित्त वर्ष 2025-26 में
- 4 मिलियन टन तेल और
- 5 बिलियन क्यूबिक मीटर गैस उत्पादन का लक्ष्य है।
- 2024-25 में तेल उत्पादन 3.5 मिलियन टन रहा था।
- कंपनी FY26 में 80 से अधिक कुओं की ड्रिलिंग करेगी और अपतटीय (offshore) अन्वेषण का विस्तार करेगी, जिसमें डीप वॉटर और अल्ट्रा डीप वॉटर क्षेत्र भी शामिल होंगे।
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