इस्लामाबाद आत्मघाती हमले के बाद पाकिस्तान का ‘पूरी ताकत से जवाब’ देने का ऐलान, अफगान तालिबान पर लगाया आरोप
पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने शुक्रवार को इस्लामाबाद में एक शिया मस्जिद में हुए संदिग्ध आत्मघाती हमले के बाद कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि शहबाज़ शरीफ के नेतृत्व वाली सरकार इसका “पूरी ताकत से” जवाब..
पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने शुक्रवार को इस्लामाबाद में एक शिया मस्जिद में हुए संदिग्ध आत्मघाती हमले के बाद कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि शहबाज़ शरीफ के नेतृत्व वाली सरकार इसका “पूरी ताकत से” जवाब देगी। इस हमले में कम से कम 31 लोगों की मौत हो गई, जबकि 169 लोग घायल हुए हैं। पाकिस्तान ने इस हमले के लिए अफगानिस्तान की तालिबान सरकार को जिम्मेदार ठहराया है।
यह आत्मघाती हमला शुक्रवार की नमाज़ के दौरान संघीय राजधानी इस्लामाबाद स्थित इमामबारगाह ख़दीजा-तुल-कुबरा में हुआ। संयोग से यह हमला ऐसे समय में हुआ, जब उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शावकत मिर्ज़ियोयेव दो दिवसीय आधिकारिक दौरे पर पाकिस्तान में मौजूद थे।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए ख्वाजा आसिफ ने अफगानिस्तान की भूमिका की ओर इशारा करते हुए कहा कि “यह साबित हो चुका है कि हमले में शामिल आतंकवादी अफगानिस्तान से आया था और वहीं वापस गया था।”
उन्होंने अफगान तालिबान शासन पर पाकिस्तान में आतंकवाद को बढ़ावा देने का आरोप लगाया।
पाकिस्तानी रक्षा मंत्री ने कहा कि सुरक्षा गार्डों ने हमलावर को “चुनौती दी”, जिसके जवाब में उसने फायरिंग शुरू कर दी।
आसिफ ने कहा, “इसके बाद वह नमाज़ियों की आख़िरी पंक्ति में खड़ा होकर खुद को उड़ा ले गया।”
उन्होंने दोहराया कि पाकिस्तान इस हमले का “पूरी ताकत से” जवाब देगा।
ख्वाजा आसिफ ने बिना कोई सबूत दिए इस आत्मघाती हमले में भारत की भूमिका का भी संकेत दिया और दावा किया कि “भारत और अफगानिस्तान के बीच मिलीभगत अब उजागर हो रही है।” उन्होंने अफगान तालिबान सरकार के साथ किसी भी तरह की बातचीत की संभावना को भी सिरे से खारिज कर दिया।
हालांकि, CNN-News18 से बात करने वाले शीर्ष खुफिया सूत्रों ने कहा कि मस्जिद के अंदर नमाज़ियों की शहादत पर बार-बार ज़ोर देकर ख्वाजा आसिफ नैतिक बढ़त हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक, इस्लामाबाद में हुआ आत्मघाती हमला एक खुफिया नाकामी है, और मस्जिदों पर ऐसे हमले न सिर्फ आम जनता के लिए खतरनाक हैं, बल्कि पाकिस्तान की अपनी धार्मिक वैधता के लिए भी गंभीर चुनौती हैं।
सूत्रों ने यह भी कहा कि पाकिस्तान का “बातचीत नहीं, सिर्फ कार्रवाई” वाला रुख उसके पहले के तालिबान से संवाद की नीति से साफ़ तौर पर अलग है। पाकिस्तान कभी भी तालिबान के साथ शांतिपूर्ण समाधान को लेकर गंभीर नहीं रहा, क्योंकि कई दौर की शांति वार्ताएं नाकाम साबित हुई हैं।
गौरतलब है कि पाकिस्तान, जो कभी तालिबान का सहयोगी रहा है, लंबे समय से अफगानिस्तान पर तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) जैसे आतंकी संगठनों को पनाह देने का आरोप लगाता रहा है। इसके अलावा पाकिस्तान का कहना है कि अफगान धरती से बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) जैसे बलूच विद्रोही समूहों को भी समर्थन मिलता है।
टीटीपी के हमलों में बढ़ोतरी और पाकिस्तानी सुरक्षा बलों पर लगातार हमलों ने दोनों देशों के रिश्तों को और तनावपूर्ण बना दिया है। बीते साल सीमा पार झड़पें भी देखने को मिली थीं।
तुर्की की मध्यस्थता में क़तर और सऊदी अरब की मदद से हुई बातचीत के कई दौर भी बेनतीजा रहे हैं। काबुल ने पाकिस्तान की उन शर्तों को सिरे से खारिज कर दिया, जिन्हें उसने व्यापक शांति समझौते के लिए “अवैध” बताया। वहीं पाकिस्तान लगातार मांग करता रहा है कि अफगान तालिबान टीटीपी के आतंकियों को उसके हवाले करे और काबुल पर इस्लामाबाद की सुरक्षा प्राथमिकता को मान्यता दे।
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