उत्तराखंड में लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर सियासी घमासान, कांग्रेस ने जनमत संग्रह अभियान शुरू किया

उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने के बाद लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर राजनीतिक विवाद गहराता जा रहा है। कांग्रेस ने इसे समाज के मूल्यों के खिलाफ बताया है और इसके विरोध में दो महीने लंबा जनमत संग्रह और आंदोलन शुरू किया है।

उत्तराखंड में लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर सियासी घमासान, कांग्रेस ने जनमत संग्रह अभियान शुरू किया
एआई द्वारा सृजित काल्पनिक चित्र
22-02-2025 - 12:35 PM

नयी दिल्ली। उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने के बाद लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर राजनीतिक विवाद गहराता जा रहा है। कांग्रेस ने इसे समाज के मूल्यों के खिलाफ बताया है और इसके विरोध में दो महीने लंबा जनमत संग्रह और आंदोलन शुरू किया है।

कांग्रेस का आरोप: बीजेपी लिव-इन को वैधता देकर बाहरी मतदाताओं की संख्या बढ़ा रही

कांग्रेस का आरोप है कि बीजेपी सरकार लिव-इन रिलेशनशिप को मान्यता देकर बाहरी लोगों को उत्तराखंड में बसाने की साजिश रच रही है। कांग्रेस ने गुरुवार को राज्य विधानसभा का घेराव किया और सरकार से पूछा कि क्या जनता लिव-इन रिलेशनशिप को स्वीकार करती है?

 उत्तराखंड कांग्रेस अध्यक्ष करन माहरा ने कहा, "लिव-इन रिलेशनशिप हमारी संस्कृति के खिलाफ है। कौन सा परिवार अपने बच्चों को लिव-इन में रहने देगा? बीजेपी सरकार इसे वैधता देकर समाज को बर्बाद कर रही है।"

उन्होंने सवाल उठाया कि जब सरकार दावा कर रही है कि 2 लाख लोगों से परामर्श के बाद यह कानून बनाया गया, तो कांग्रेस को इसकी सूची क्यों नहीं दी जा रही?

UCC में लिव-इन रजिस्ट्रेशन अनिवार्य, कोर्ट में चुनौती

उत्तराखंड सरकार ने 27 जनवरी को UCC लागू किया, जिसमें लिव-इन रिश्तों का अनिवार्य पंजीकरण शामिल है।

  • सरकार का दावा है कि यह महिलाओं के अधिकारों की रक्षा के लिए किया गया है।
  • कांग्रेस और अन्य सामाजिक संगठनों ने इसे गोपनीयता का उल्लंघन बताया है और इसे कोर्ट में चुनौती दी गई है।
  • 16 पेज के फॉर्म और धार्मिक नेता से प्रमाण पत्र लेने की अनिवार्यता पर भी विवाद हुआ है।

 उत्तराखंड हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जी. नरेंद्र ने कहा, "गोपनीयता क्या है? आप समाज में खुलेआम साथ रह रहे हैं। आपके पड़ोसी, समाज और दुनिया को पता है। क्या आप किसी गुफा में छिपकर रह रहे हैं?"

कांग्रेस का जनमत संग्रह: जनता लिव-इन को स्वीकार करती है या नहीं?

कांग्रेस ने लिव-इन पर 15 सवालों का एक फॉर्म जारी किया, जिसे कार्यकर्ता जनता के बीच भरवाएंगे।
 पूर्व मंत्री यशपाल आर्य ने कहा, "हम जानना चाहते हैं कि UCC लागू होने के बाद लोग कितने चिंतित हैं, खासकर लिव-इन प्रावधानों को लेकर।"

बीजेपी का जवाब: महिलाओं की सुरक्षा के लिए कानून जरूरी

 उत्तराखंड बीजेपी महासचिव राजेंद्र बिष्ट ने कहा, "राज्य सरकार किसी भी रिश्ते को बढ़ावा या हतोत्साहित नहीं कर रही। हमारा उद्देश्य महिलाओं को सुरक्षा और अधिकार देना है।"

  • "अन्य राज्यों में लिव-इन रिलेशनशिप में महिलाओं के खिलाफ अपराध हुए हैं। यह कानून समय पर अलर्ट देकर उनकी सुरक्षा करेगा।"
  • "अगर लिव-इन रिश्ते में कोई महिला अलग होती है, तो उसे शादी की तरह बराबर मुआवजा मिलेगा। इसमें क्या बुराई है?"

कांग्रेस की चिंता: लिव-इन से बढ़ेगी बहुविवाह की प्रवृत्ति?

कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि UCC में लिव-इन रिश्तों से जुड़े प्रावधान बहुविवाह (polygamy) को बढ़ावा देंगे।

  • 15 दिन में ब्रेकअप सर्टिफिकेट मिलने के बाद कोई भी बिना शादी किए नया रिश्ता बना सकता है।
  • तलाक में समय लगता है, लेकिन लिव-इन में मात्र 15 दिन में रिश्ता खत्म किया जा सकता है।

करन माहरा ने सवाल उठाया, "अगर लिव-इन जोड़ों का रजिस्ट्रेशन रद्द हो जाता है या वे अलग हो जाते हैं, तो उनके बच्चों के अधिकारों की क्या गारंटी होगी?"

बीजेपी की साजिश: वोट बैंक बढ़ाने के लिए बाहरी लोगों को बसा रही?

कांग्रेस ने आरोप लगाया कि बीजेपी सरकार लिव-इन को वैधता देकर बाहरी लोगों को उत्तराखंड में बसा रही है।  कांग्रेस अध्यक्ष माहरा बोले, "बीजेपी एक तरफ बाहरी लोगों के जमीन खरीदने पर सख्त कानून बना रही है, और दूसरी तरफ लिव-इन पंजीकरण के जरिए बाहरी लोगों को वोटर बना रही है।"

  • कांग्रेस का दावा है कि यह मुद्दा जनमत संग्रह में प्रमुख रहेगा।
  • क्या लोग बाहरी लिव-इन जोड़ों को उत्तराखंड का मतदाता बनने देंगे?

अन्य राज्यों में भी विरोध तेज

कांग्रेस ने महाराष्ट्र में मतदाता सूची में धांधली का आरोप लगाया है।

  • राहुल गांधी ने सवाल उठाया कि कैसे 7,000 वोटर एक ही पते पर रजिस्टर्ड हैं?
  • कांग्रेस ने चुनाव आयोग से पूरी वोटर लिस्ट मांगी है ताकि गड़बड़ी की जांच हो सके।

अब देखना यह है कि जनमत संग्रह के बाद जनता इस मुद्दे पर क्या फैसला लेती है और क्या यह चुनावी मुद्दा बनता है या नहीं।

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THE NEWS THIKANA, संपादकीय डेस्क यह द न्यूजठिकाना डॉट कॉम की संपादकीय डेस्क है। डेस्क के संपादकीय सदस्यों का प्रयास रहता है कि अपने पाठकों को निष्पक्षता और निर्भीकता के साथ विभिन्न विषयों के सच्चे, सटीक, विश्वसनीय व सामयिक समाचारों के अलावाआवश्यक उल्लेखनीय विचारों को भी सही समय पर अवगत कराएं।