'स्पष्ट विश्वासघात': ममता के मंदिर कार्यक्रम में दिलीप घोष की उपस्थिति से बंगाल BJP में हड़कंप
दिल्ली। पश्चिम बंगाल बीजेपी में उस समय बड़ा राजनीतिक भूचाल आ गया जब पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष ने दीघा में आयोजित जगन्नाथ धाम मंदिर के उद्घाटन कार्यक्रम में अपनी पत्नी के साथ भाग लिया..
नयी दिल्ली। पश्चिम बंगाल बीजेपी में उस समय बड़ा राजनीतिक भूचाल आ गया जब पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष ने दीघा में आयोजित जगन्नाथ धाम मंदिर के उद्घाटन कार्यक्रम में अपनी पत्नी के साथ भाग लिया और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से मुलाकात की। इस कार्यक्रम में उनकी उपस्थिति और टीएमसी सुप्रीमो की तारीफ ने बीजेपी के भीतर तीखी प्रतिक्रियाएं पैदा कर दी हैं। बीजेपी नेता स्वपन दासगुप्ता ने इसे साफ तौर पर एक "विश्वासघात" बताया।
स्वपन दासगुप्ता ने 'एक्स' (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, "पूर्व प्रदेश अध्यक्ष द्वारा किए गए इस स्पष्ट विश्वासघात से बंगाल बीजेपी के जमीनी कार्यकर्ताओं में जो आक्रोश है, उसे राष्ट्रीय नेतृत्व अब नजरअंदाज नहीं कर सकता।"
यह विवाद ऐसे समय पर खड़ा हुआ है जब बीजेपी ममता बनर्जी को मुर्शिदाबाद साम्प्रदायिक हिंसा को लेकर घेरे में लेने की रणनीति पर काम कर रही है। घोष ने बुधवार को मंदिर कार्यक्रम में हिस्सा लिया और बाद में ममता बनर्जी से बातचीत की, जिसकी तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गईं।
वहीं दूसरी ओर, विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी ने इस कार्यक्रम से पूरी तरह दूरी बना ली और दीघा से कुछ किलोमीटर दूर कांठी में एक धार्मिक सभा को संबोधित करना चुना।
बंगाल बीजेपी अध्यक्ष सुकांत मजूमदार ने घोष की इस कार्रवाई से पार्टी को अलग करते हुए इसे "व्यक्तिगत निर्णय" बताया और कहा कि पार्टी इस निर्णय का समर्थन नहीं करती।
दिलीप घोष ने कहा कि वे अपनी पत्नी के साथ भगवान जगन्नाथ के दर्शन के लिए गए थे और पार्टी ने इस पर कोई रोक नहीं लगाई थी। उन्होंने आगे कहा, "मुझे मंदिरों में जाना पसंद है। पार्टी मुझे भगवान जगन्नाथ को श्रद्धांजलि देने से नहीं रोक सकती। और अगर कोई व्हिप भी होता, तो मैं उस पर ध्यान नहीं देता।"
उन्होंने राज्य सरकार के निमंत्रण को "सम्मान" बताया और कहा कि मंदिर दर्शन हिंदू सांस्कृतिक जीवन का हिस्सा है।
इसके विपरीत, सुकांत मजूमदार ने मुर्शिदाबाद हिंसा की ओर इशारा करते हुए कहा कि बीजेपी ने सामूहिक रूप से मंदिर उद्घाटन समारोह में न जाने का फैसला लिया था ताकि विरोध दर्ज किया जा सके।
सुवेंदु अधिकारी ने घोष पर सीधे टिप्पणी करने से इनकार किया और केवल इतना कहा कि वे ममता बनर्जी के बयानों या कार्यों पर ही प्रतिक्रिया देते हैं।
बीजेपी के कुछ अन्य नेताओं ने भी घोष की आलोचना की। सांसद सौमित्र खान ने सोशल मीडिया पर घोष के फैसले पर हमला बोला। अब स्वपन दासगुप्ता भी आलोचना के स्वर में शामिल हो गए हैं।
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