अमेरिकी दबाव पर पुतिन का पलटवार: “भारत-चीन अपमान कभी स्वीकार नहीं करेंगे”
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने गुरुवार को अमेरिका पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि भारत और चीन पर रूसी ऊर्जा सहयोग कम करने का दबाव डालना वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए हानिकारक होगा और अंततः वॉशिंगटन के लिए ही उल्टा साबित..
मॉस्को। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने गुरुवार को अमेरिका पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि भारत और चीन पर रूसी ऊर्जा सहयोग कम करने का दबाव डालना वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए हानिकारक होगा और अंततः वॉशिंगटन के लिए ही उल्टा साबित होगा।
पुतिन ने ब्लैक सी के सोची स्थित वाल्दाई डिस्कशन ग्रुप में बोलते हुए कहा कि यदि अमेरिका रूस के व्यापारिक साझेदारों पर ऊंचे टैरिफ थोपता है तो इससे वैश्विक ऊर्जा कीमतें बढ़ेंगी, अमेरिकी फेडरल रिजर्व को ब्याज दरें ऊंची रखनी पड़ेंगी और इससे अमेरिकी अर्थव्यवस्था धीमी हो जाएगी।
उन्होंने जोर देकर कहा,“भारत कभी अपमान स्वीकार नहीं करेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ऐसा कदम कभी नहीं उठाएंगे।”
भारत पर असर का दावा
पुतिन के मुताबिक, अगर भारत रूसी ऊर्जा खरीदना बंद कर देता है तो उसे 9 से 10 अरब डॉलर तक का नुकसान होगा। उन्होंने सवाल उठाया:
“अगर भारत नहीं खरीदेगा, तो उन पर ऊंचे टैरिफ लगेंगे। और फिर नुकसान होगा – वही नुकसान। तो फिर क्यों? क्यों राजनीतिक जोखिम लेकर रूसी ऊर्जा खरीद से पीछे हटना?”
उन्होंने कहा कि आर्थिक दृष्टि से यह फैसला “निरर्थक” है और अंततः भारत विदेशी दबाव में तेल खरीद बंद करने से इनकार करेगा।
ब्रिक्स और वैश्विक न्याय की बात
पुतिन ने कहा, “रूस भारत और चीन जैसे देशों का आभारी है जिन्होंने ब्रिक्स की नींव रखी। ये वे देश हैं जो किसी पक्ष में खड़े नहीं होते और एक न्यायपूर्ण विश्व व्यवस्था बनाने की आकांक्षा रखते हैं।”
लावरोव का अमेरिका पर कटाक्ष
रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने भी कहा कि अमेरिका अब समझ चुका है कि दबाव और टैरिफ की धमकी जैसी रणनीतियां भारत और चीन जैसी प्राचीन सभ्यताओं पर काम नहीं करतीं।
उन्होंने कहा, “भारत और चीन दोनों प्राचीन सभ्यताएं हैं। उनसे यह कहना कि ‘या तो वही करो जो मैं कहता हूं, वरना टैरिफ झेलो’ – यह काम नहीं करता। वॉशिंगटन और बीजिंग, वॉशिंगटन और नई दिल्ली के बीच चल रहे संवाद से यह साफ है कि अमेरिका भी अब यह समझ रहा है।”
अमेरिका का बदलता रुख
यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनकी प्रशासनिक टीम ने हाल ही में भारत के खिलाफ अपना तेज रुख थोड़ा नरम किया है।
- इस साल की शुरुआत में ट्रंप प्रशासन ने भारत को “Maharaja of Tariffs” कहकर तंज कसा था।
- ट्रंप ने भारत पर यूक्रेन युद्ध को फंड करने और रूसी तेल खरीदने का आरोप लगाते हुए टैरिफ और बढ़ा दिए थे।
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