‘कुरान में कुर्बानी का आदेश’: बंगाल में पशु वध नियंत्रण पर एजेयूपी प्रमुख हुमायूं कबीर के बयान से विवाद
Humayun Kabir ने यह कहकर नया राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया कि “गाय की कुर्बानी भी होगी”। उन्होंने दावा किया कि कुरान में कुर्बानी का आदेश है और राज्य सरकार द्वारा ईद से पहले पशु वध पर लगाए गए प्रतिबंधों के बावजूद धार्मिक बलि की परंपरा जारी..
नयी दिल्ली। Humayun Kabir ने यह कहकर नया राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया कि “गाय की कुर्बानी भी होगी”। उन्होंने दावा किया कि कुरान में कुर्बानी का आदेश है और राज्य सरकार द्वारा ईद से पहले पशु वध पर लगाए गए प्रतिबंधों के बावजूद धार्मिक बलि की परंपरा जारी रहेगी।
हुमायूं कबीर ने कहा कि “किसी भी कीमत पर कुर्बानी होगी” और प्रशासन पर धार्मिक प्रथाओं में हस्तक्षेप करने का आरोप लगाया।
उनके बयान पर भाजपा ने तीखी प्रतिक्रिया दी और कहा कि मुद्दा किसी समुदाय को निशाना बनाना नहीं बल्कि कानून लागू करने और अवैध गौ-हत्या रोकने का है।
कबीर ने कहा, “हम कानून का सम्मान करते हैं लेकिन कुर्बानी होगी। कुरान में जो लिखा है वही होगा। मैं सीधे Suvendu Adhikari से कहना चाहता हूं कि आग से मत खेलिए। यह आपके लिए खतरनाक साबित हो सकता है। मुस्लिम समुदाय कुर्बानी पर कोई समझौता नहीं करेगा।”
बंगाल सरकार के आदेश को खुली चुनौती
एजेयूपी प्रमुख ने पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा हाल ही में जारी उस सार्वजनिक नोटिस को खुली चुनौती दी, जो West Bengal Animal Slaughter Control Act, 1950 के तहत जारी किया गया था।
उन्होंने कहा, “सरकार मुसलमानों को बीफ न खाने का नियम बना सकती है लेकिन कुर्बानी जारी रहेगी। हम किसी आपत्ति को नहीं मानेंगे।”
इसे 1400 साल पुरानी परंपरा बताते हुए कबीर ने कहा, “यह परंपरा 1400 वर्षों से चली आ रही है और दुनिया रहने तक चलती रहेगी।” उन्होंने आगे कहा, “गाय, बकरी और ऊंट की कुर्बानी जारी रहेगी।”
कबीर ने सड़कों पर नमाज पढ़ने पर लगाई गई पाबंदियों पर भी नाराजगी जताई और ईद की नमाज के लिए पर्याप्त स्थान उपलब्ध कराने की मांग की। उन्होंने कहा, “अगर व्यवस्था नहीं की जाती तो फिर सड़कों पर पूजा की अनुमति भी नहीं दी जानी चाहिए।”
भाजपा ने नियमों का किया बचाव
कबीर के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष Samik Bhattacharya ने कहा कि मुद्दा कानून लागू करने और अवैध गतिविधियों को रोकने का है।
उन्होंने कहा, “अवैध बूचड़खानों को चलने नहीं दिया जाएगा।” उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा लोगों की खान-पान की व्यक्तिगत पसंद में हस्तक्षेप नहीं करती, लेकिन सार्वजनिक रूप से गायों की हत्या का विरोध करती है।
पश्चिम बंगाल के मंत्री Dilip Ghosh ने दावा किया कि “गौ-हत्या किसी धर्म से जुड़ी नहीं है।” उन्होंने कहा, “जहां इस्लाम की उत्पत्ति हुई वहां गायें नहीं थीं। यहां गौ-हत्या हिंदू समुदाय को आहत करने के लिए की जाती थी।”
वहीं भाजपा तेलंगाना अध्यक्ष N Ramchander Rao ने भी पश्चिम बंगाल में गौ-हत्या विरोधी कानूनों को सख्ती से लागू करने का समर्थन किया।
उन्होंने कहा, “कुछ लोग जानबूझकर दो समुदायों के बीच दरार पैदा करने के लिए गायों को वध के लिए ले जाते हैं। बंगाल में हुमायूं कबीर जैसे लोग इसे मुद्दा बनाने की कोशिश करते हैं। सुवेंदु अधिकारी द्वारा गौ-हत्या रोकने का प्रयास स्वागतयोग्य कदम है।”
बीफ नीति पर दोहरे मापदंड का आरोप
Toha Siddiqui ने बीफ से जुड़ी नीतियों पर “दोहरे मापदंड” का सवाल उठाया। उन्होंने पूछा कि जब बीफ निर्यात की अनुमति है, तो घरेलू स्तर पर प्रतिबंध क्यों लगाए जा रहे हैं।
उन्होंने कहा, “कानून जो कहता है, उसका पालन होना चाहिए। लेकिन कानून सबके लिए समान होना चाहिए। अगर गौ-हत्या नहीं होगी, तो हम मान लेंगे। लेकिन भारत बीफ निर्यात में दूसरे स्थान पर है। आम आदमी कुर्बानी करे तो वह गलत है, लेकिन देश की गायों को काटकर विदेश भेजना सही है?”
उन्होंने आगे कहा, “भारत के दूसरे राज्यों में बीफ बिकता है। वहां अनुमति है और यहां नहीं? पूरे देश में एक समान कानून होना चाहिए।”
इकबाल अंसारी ने गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग की
दूसरी ओर, बाबरी मस्जिद-राम जन्मभूमि मामले के पूर्व वादी Iqbal Ansari ने मुसलमानों से गाय का सम्मान करने की अपील की और गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग की।
उन्होंने कहा, “गाय की कुर्बानी बिल्कुल नहीं होनी चाहिए। हिंदू धर्म में उसकी पूजा होती है।” अंसारी ने कहा, “हम भारतीय मुसलमान हैं और गाय को ‘गौमाता’ कहा जाता है। मुसलमानों को गाय का सम्मान करना चाहिए। सरकार को इसे राष्ट्रीय पशु घोषित करना चाहिए।”
कलकत्ता हाईकोर्ट ने रोक लगाने से इनकार किया
यह विवाद उस समय और बढ़ गया जब Calcutta High Court ने गुरुवार को पश्चिम बंगाल सरकार के उस आदेश पर रोक लगाने से इनकार कर दिया, जिसमें ईद-उल-जुहा से पहले बिना अनिवार्य फिटनेस प्रमाणपत्र के मवेशियों और भैंसों के वध पर प्रतिबंध दोहराया गया था।
अदालत ने कहा कि “गाय की कुर्बानी ईद-उल-जुहा का अनिवार्य हिस्सा नहीं है और न ही यह इस्लाम की धार्मिक आवश्यकता है।” अदालत ने इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट की पूर्व टिप्पणियों का भी हवाला दिया।
राज्य सरकार की 13 मई की अधिसूचना में कहा गया था कि सार्वजनिक स्थानों पर खुले में पशु वध पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा और केवल अधिकृत केंद्रों पर ही इसकी अनुमति होगी।
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