विदेशी मुद्रा उधारी नियमों में ढील: आरबीआई का मसौदा प्रस्ताव जारी
भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने कंपनियों के लिए विदेशी मुद्रा में धन जुटाने के नियमों को आसान बनाने के उद्देश्य से शुक्रवार को मसौदा प्रस्ताव जारी किया। इस प्रस्ताव के तहत बाहरी वाणिज्यिक उधारी (External Commercial Borrowings - ECB) से जुड़े कई नियमों में ढील देने की बात कही..
मुंबई। भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने कंपनियों के लिए विदेशी मुद्रा में धन जुटाने के नियमों को आसान बनाने के उद्देश्य से शुक्रवार को मसौदा प्रस्ताव जारी किया। इस प्रस्ताव के तहत बाहरी वाणिज्यिक उधारी (External Commercial Borrowings - ECB) से जुड़े कई नियमों में ढील देने की बात कही गई है।
क्या है प्रस्ताव?
- उधारी सीमा (Borrowing Limit):
कंपनियों को उनकी वित्तीय क्षमता के आधार पर विदेशी मुद्रा में कर्ज लेने की अनुमति दी जाएगी। नई व्यवस्था के तहत कंपनियाँ अधिकतम 1 अरब डॉलर या अपनी नेटवर्थ के 300% तक उधार ले सकेंगी। - ब्याज दरें (Interest Rates):
ECB को बाज़ार आधारित ब्याज दरों पर ही जुटाने की अनुमति होगी। - नियमों में ढील (Relaxations):
- एंड-यूज़ (End-use) से जुड़ी पाबंदियों को सरल किया जाएगा।
- न्यूनतम औसत परिपक्वता अवधि (Minimum Average Maturity) के नियमों को भी आसान बनाया जाएगा।
- उधारकर्ता और ऋणदाता (Borrower & Lender) के दायरे का विस्तार किया जाएगा।
- रिपोर्टिंग आवश्यकताओं को भी सरल किया जाएगा ताकि अनुपालन बोझ (Compliance Burden) घटे।
सुझावों की समयसीमा
आरबीआई ने इस मसौदे पर सुझाव और प्रतिक्रिया देने की समयसीमा 24 अक्टूबर तय की है। इसके बाद अंतिम नियम जारी किए जाएंगे।
ईसीएल फ्रेमवर्क और अन्य सुधार
आरबीआई ने हाल ही में हुई मौद्रिक नीति समिति (MPC) की 1 अक्टूबर की बैठक में घोषणा की थी कि..
- Expected Credit Loss (ECL) Framework और Basel III Norms को 1 अप्रैल 2027 से लागू किया जाएगा।
- जल्द ही मानकीकृत क्रेडिट रिस्क, सावधानी संबंधी विनियम और जोखिम-आधारित बीमा प्रीमियम पर भी मसौदा पेश किया जाएगा।
- इसके अलावा, बैंकों और उनके समूह संस्थानों के बीच कारोबार की समानता पर लगी नियामकीय पाबंदियाँ हटाने का भी प्रस्ताव है।
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