तेलंगाना हाईकोर्ट ने मंदिर भूमि पर स्वामित्व दावा खारिज किया
तेलंगाना हाईकोर्ट ने शुक्रवार को स्पष्ट किया कि धर्मार्थ विभाग (Endowments Department) द्वारा प्रबंधित मंदिर की भूमि पर कब्जा जमाए हुए व्यक्ति न तो स्वामित्व का दावा कर सकते हैं और न ही एंडोमेंट्स एक्ट के तहत किसी प्रकार की सुरक्षा की मांग कर सकते हैं।
हैदराबाद। तेलंगाना हाईकोर्ट ने शुक्रवार को स्पष्ट किया कि धर्मार्थ विभाग (Endowments Department) द्वारा प्रबंधित मंदिर की भूमि पर कब्जा जमाए हुए व्यक्ति न तो स्वामित्व का दावा कर सकते हैं और न ही एंडोमेंट्स एक्ट के तहत किसी प्रकार की सुरक्षा की मांग कर सकते हैं।
न्यायमूर्ति नागेश भीमपका ने यह टिप्पणी बहादुरपुरा स्थित एक मंदिर की भूमि पर अवैध रूप से कब्जा किए हुए एक पट्टेदार के खिलाफ जारी बेदखली आदेश को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज करते हुए दी।
विवादित भूमि को 1980 में एक व्यवसायी को लीज़ पर दिया गया था, और वर्षों तक समझौते के अनुसार लीज़ बढ़ाई जाती रही। 2020 में व्यवसायी की मृत्यु के बाद, उसका पुत्र उसी भूमि पर व्यवसाय जारी रखने के लिए लीज़ को आगे बढ़ाने की अनुमति मांग रहा था। हालांकि, धर्मार्थ विभाग ने इस अनुरोध को अस्वीकार कर दिया।
इस निर्णय को चुनौती देते हुए याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट में एक रिट याचिका दायर की थी। वर्ष 2021 में अदालत ने उसे प्रशासन के समक्ष औपचारिक आवेदन प्रस्तुत करने का निर्देश दिया, जिसे बाद में अधिकारियों ने अस्वीकृत कर दिया।
2025 के अपने निर्णय में, अदालत ने पाया कि याचिकाकर्ता को इस अस्वीकृति की पूरी जानकारी थी और वह संबंधित कार्यवाही में भाग भी ले चुका था।
अदालत ने कहा, "जब याचिकाकर्ता स्वयं कार्यवाही का हिस्सा रहा है और अस्वीकृति से अवगत है, तो वह न तो मंदिर की भूमि पर अनधिकृत रूप से कब्जा बनाए रख सकता है और न ही एंडोमेंट्स एक्ट के तहत कोई विशेष अधिकार मांग सकता है।"
याचिका को खारिज करते हुए, न्यायमूर्ति भीमपका ने कहा कि याचिकाकर्ता के पास बेदखली के खिलाफ कोई वैध शिकायत नहीं है, और अधिकारियों द्वारा की गई कार्रवाई उचित है।
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