'जय श्री राम बोलो': तमिलनाडु के राज्यपाल आरएन रवि के बयान से विवाद, कांग्रेस ने कहा - 'BJP-RSS के प्रचार प्रमुख बन चुके हैं'
तमिलनाडु के राज्यपाल आर. एन. रवि एक बार फिर विवादों में घिर गए हैं। इस बार उन्होंने मदुरै के थियागराजर इंजीनियरिंग कॉलेज में एक कार्यक्रम के दौरान छात्रों से "जय श्री राम" के नारे लगवाए।..
नयी दिल्ली। तमिलनाडु के राज्यपाल आर. एन. रवि एक बार फिर विवादों में घिर गए हैं। इस बार उन्होंने मदुरै के थियागराजर इंजीनियरिंग कॉलेज में एक कार्यक्रम के दौरान छात्रों से "जय श्री राम" के नारे लगवाए। उनके इस बयान पर कांग्रेस ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए उन्हें "RSS और BJP के प्रचार प्रमुख" की संज्ञा दी है।
राज्यपाल रवि ने शनिवार को कॉलेज में छात्रों को संबोधित करते हुए कहा, “मैं कहूंगा, और आप कहेंगे - जय श्री राम।” उनके इस आह्वान के बाद वहां मौजूद छात्रों ने सामूहिक रूप से "जय श्री राम" के नारे लगाए।
कांग्रेस विधायक जेएमएच हसन मौलाना ने इस बयान की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि यह बयान न केवल आपत्तिजनक है, बल्कि यह स्पष्ट रूप से RSS और भाजपा की विचारधारा को दोहराता है। उन्होंने कहा:
“राज्यपाल देश के सर्वोच्च संवैधानिक पदों में से एक पर बैठे हैं, लेकिन वे एक धार्मिक नेता की तरह बोल रहे हैं। वे BJP और RSS के प्रचारक बन चुके हैं। राज्यपाल इस तरह का व्यवहार नहीं कर सकते।”
हसन मौलाना ने कहा कि तमिलनाडु के राज्यपाल RSS का चेहरा बनकर राज्य में उसकी विचारधारा को फैलाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा, “राज्यपाल का पद एक संवैधानिक पद है, इसलिए उन्हें तटस्थ रहना चाहिए।”
कांग्रेस नेता ने यह भी याद दिलाया कि सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में राज्यपाल रवि की कार्यप्रणाली पर कड़ी टिप्पणी की थी। अदालत ने उन्हें राज्य विधानसभा द्वारा पारित 10 विधेयकों पर कार्रवाई नहीं करने के लिए असंवैधानिक, अवैध और अनुचित करार दिया था।
शनिवार को आए सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले में अदालत ने उन सभी 10 राज्य विधेयकों को मंजूरी दे दी, जिन्हें राज्यपाल ने राष्ट्रपति की अनुमति के लिए लंबित रखा था। कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा कि राज्यपाल को एक महीने और राष्ट्रपति को तीन महीने के भीतर ऐसे विधेयकों पर निर्णय लेना होगा।
इस पूरे घटनाक्रम ने राज्यपाल रवि की भूमिका को लेकर एक बार फिर राजनीतिक और संवैधानिक बहस को तेज कर दिया है, खासकर दक्षिण भारत जैसे राज्य में, जहां संघ परिवार की विचारधारा को लेकर पहले से ही गंभीर असहमतियां मौजूद हैं।
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