वक्फ कानून को लागू करने से इनकार नहीं कर सकते राज्य: बीजेपी

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने सोमवार को संविधानिक प्रावधानों का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि राज्य वक्फ संशोधन अधिनियम को लागू करने से इनकार नहीं कर सकते..

वक्फ कानून को लागू करने से इनकार नहीं कर सकते राज्य: बीजेपी
15-04-2025 - 03:02 PM

नयी दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने सोमवार को संविधानिक प्रावधानों का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि राज्य वक्फ संशोधन अधिनियम को लागू करने से इनकार नहीं कर सकते। साथ ही पार्टी ने कांग्रेस और INDIA गठबंधन के अन्य दलों की इस कानून के खिलाफ जारी आपत्ति की आलोचना की।

यह बयान झारखंड के झामुमो विधायक और राज्य मंत्री हफीजुल हसन के उस कथित बयान के बाद आया जिसमें उन्होंने कहा कि उनके लिए पहले शरिया है, फिर संविधान। इसी तरह कर्नाटक के मंत्री बी ज़मीर अहमद खान ने कहा कि यह कानून राज्य में लागू नहीं किया जाएगा। इससे पहले शनिवार को पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी राज्य में इस कानून को लागू न करने की बात कही थी।

बीजेपी राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने इन बयानों को "गंभीर चिंता का विषय" बताते हुए कहा कि अगर ऐसे दल सत्ता में रहे तो संविधान खतरे में पड़ जाएगा। उन्होंने इसे संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर का अपमान बताया। त्रिवेदी ने कहा, "73वें और 74वें संविधान संशोधन के बाद केंद्र, राज्य और जिला स्तर की सरकारों के अधिकार स्पष्ट रूप से परिभाषित हैं। कोई जिला पंचायत राज्य विधानसभा द्वारा पारित कानून से ऊपर नहीं जा सकती और कोई राज्य संसद द्वारा पारित कानून को नजरअंदाज़ नहीं कर सकता।"

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि विपक्षी दलों को संविधान का कोई सम्मान नहीं है। "वे संविधान को अपनी जेब में रखते हैं जबकि भाजपा और एनडीए उसे अपने दिल में रखते हैं। यह लड़ाई जेब में संविधान रखने वालों और दिल में संविधान रखने वालों के बीच है।"

त्रिवेदी ने याद दिलाया कि 73वां और 74वां संशोधन कांग्रेस सरकार ने किया था, जिसे उस समय "क्रांतिकारी" कहा गया था। आज वही कांग्रेस इन्हीं संशोधनों को कमजोर कर रही है।

कांग्रेस और उसके सहयोगियों को चुनौती देते हुए, त्रिवेदी ने कहा कि "अगर वे कर्नाटक और झारखंड के मंत्रियों पर कोई कार्रवाई नहीं करते, तो यह स्पष्ट हो जाएगा कि कांग्रेस और INDIA गठबंधन के लिए शरिया संविधान से ऊपर है। हमारे लिए संविधान सर्वोच्च है।"

कांग्रेस सांसद इमरान मसूद के उस बयान पर भी त्रिवेदी ने तीखी प्रतिक्रिया दी जिसमें मसूद ने कहा था कि "अगर केंद्र में कांग्रेस की सरकार बनी तो वक्फ कानून एक घंटे में रद्द कर दिया जाएगा।" त्रिवेदी बोले, "यह संविधान का सबसे बड़ा उपहास है और यह दिखाता है कि कांग्रेस संविधान को सिर्फ एक औपचारिक दस्तावेज मानती है।"

अंबेडकर को लेकर आरोप-प्रत्यारोप
जब कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने बीजेपी और आरएसएस को अंबेडकर का दुश्मन बताया, तो त्रिवेदी ने पलटवार करते हुए कहा कि "डॉ. अंबेडकर भारत के संविधानिक इतिहास में पहले चुनावी धोखाधड़ी के शिकार बने थे और इसमें कांग्रेस और कम्युनिस्टों की भूमिका थी।"

उन्होंने दावा किया कि "1952 में अंबेडकर ने चुनाव में हार के बाद अदालत में याचिका भी दायर की थी। उन्हें 74,000 वोटों से हराया गया जबकि 75,000 वोट अमान्य घोषित किए गए थे।"

ममता बनर्जी पर निशाना
त्रिवेदी ने ममता बनर्जी पर हमला बोलते हुए कहा कि "उनका यह रुख राजनीतिक मजबूरी के कारण है। टीएमसी सरकार कट्टरपंथी तत्वों की बंधक बन चुकी है। पश्चिम बंगाल अराजकता की ओर बढ़ रहा है।" उन्होंने सवाल उठाया कि क्या  "ममता बनर्जी किसी जिला पंचायत को राज्य विधानसभा द्वारा पारित कानून को लागू करने से मना करने देंगी?"

वक्फ संशोधन कानून की संवैधानिक वैधता को चुनौती
पूर्व मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी के नेतृत्व वाली वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (YSRCP) ने सोमवार को वक्फ संशोधन अधिनियम, 2025 की संवैधानिक वैधता को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी।

इससे पहले कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (CPI) ने भी कानून के खिलाफ याचिका दाखिल की थी। YSRCP की याचिका में अधिवक्ता महतफूज अहसन नाज़की के माध्यम से कहा गया है कि "यह अधिनियम संविधान के अनुच्छेद 13, 14, 25 और 26 का उल्लंघन करता है।"

कानून में गैर-मुस्लिम सदस्यों को वक्फ बोर्ड में शामिल करने को मुस्लिम संस्थाओं के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप बताया गया।

वहीं CPI ने अपनी याचिका में कहा कि "जनता के विरोध और संयुक्त संसदीय समिति की आपत्तियों के बावजूद यह विधेयक पास किया गया, जिससे वक्फ बोर्ड की स्वायत्तता में कटौती होती है।"

कानून केंद्र सरकार को वक्फ बोर्ड पर असीम अधिकार देता है, जो धार्मिक स्वतंत्रता और अल्पसंख्यक अधिकारों का उल्लंघन है।

16 अप्रैल को सुनवाई

CJI संजीव खन्ना की अध्यक्षता वाली तीन जजों की पीठ इस मामले में 16 अप्रैल को सुनवाई करेगी। अन्य न्यायमूर्ति हैं संजय कुमार और केवी विश्वनाथन

अब तक याचिका दाखिल करने वालों में शामिल हैं:

  • AIMIM सांसद असदुद्दीन ओवैसी
  • AAP विधायक अमानतुल्लाह खान
  • Association for Protection of Civil Rights
  • अर्शद मदनी, समस्थ केरल जमीयत उल उलेमा, मनोच झा (RJD)
  • अभिनेता-राजनीतिक नेता विजय (TVK अध्यक्ष)
  • अन्य कई याचिकाएं पंजीकृत होने की प्रक्रिया में हैं।

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THE NEWS THIKANA, संपादकीय डेस्क यह द न्यूजठिकाना डॉट कॉम की संपादकीय डेस्क है। डेस्क के संपादकीय सदस्यों का प्रयास रहता है कि अपने पाठकों को निष्पक्षता और निर्भीकता के साथ विभिन्न विषयों के सच्चे, सटीक, विश्वसनीय व सामयिक समाचारों के अलावाआवश्यक उल्लेखनीय विचारों को भी सही समय पर अवगत कराएं।