तमिलनाडु पर यूपी से ज्यादा कर्ज? कांग्रेस नेता के बयान से सियासी विवाद
कांग्रेस के एक पदाधिकारी के बयान ने तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। 2026 के विधानसभा चुनाव से पहले इस टिप्पणी ने डीएमके–कांग्रेस गठबंधन को असहज स्थिति में ला दिया..
चेन्नई। कांग्रेस के एक पदाधिकारी के बयान ने तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। 2026 के विधानसभा चुनाव से पहले इस टिप्पणी ने डीएमके–कांग्रेस गठबंधन को असहज स्थिति में ला दिया है।
कांग्रेस नेता प्रवीन चक्रवर्ती द्वारा तमिलनाडु के कर्ज की तुलना उत्तर प्रदेश से किए जाने पर डीएमके नेताओं की तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं।
प्रवीन चक्रवर्ती ने दावा किया कि तमिलनाडु पर बकाया कर्ज अब उत्तर प्रदेश से भी ज्यादा हो गया है और इसे उन्होंने “चिंताजनक स्थिति” बताया।
यह विवाद ऐसे समय सामने आया है, जब कुछ दिन पहले टीवीके (TVK) नेता आधव अर्जुन ने भविष्य में कांग्रेस के साथ संभावित गठबंधन के संकेत दिए थे, जिससे राज्य में बदलते राजनीतिक समीकरणों को लेकर अटकलें तेज हो गई थीं।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर किए गए एक पोस्ट में प्रवीन चक्रवर्ती ने कहा कि वर्षों में तमिलनाडु का कर्ज उत्तर प्रदेश से आगे निकल गया है। उन्होंने यह भी दावा किया कि राज्य पर ब्याज का बोझ देश में सबसे अधिक में से एक है। इसके अलावा, उन्होंने कहा कि तमिलनाडु का कर्ज-से-जीडीपी अनुपात अब भी कोविड-पूर्व स्तरों से काफी ऊपर बना हुआ है।
दरअसल, प्रवीन चक्रवर्ती यह टिप्पणी डीएमके नेता कनिमोझी के उस बयान के जवाब में कर रहे थे, जिसमें उन्होंने कहा था कि डीएमके ने कर्ज में डूबे तमिलनाडु को एक विकसित और विकासोन्मुख राज्य में बदल दिया है।
प्रवीन चक्रवर्ती के पोस्ट पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए डीएमके नेता एम.एम. अब्दुल्ला ने उन पर “डर फैलाने” का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि राज्य द्वारा लिया गया कर्ज पूंजी निवेश और परिसंपत्ति निर्माण के लिए है। अब्दुल्ला ने बताया कि पिछले पांच वर्षों में तमिलनाडु की अर्थव्यवस्था लगभग 39 प्रतिशत बढ़ी है और अब यह 17.3 लाख करोड़ रुपये की अर्थव्यवस्था बन चुकी है। उन्होंने “खराब कर्ज” और “उत्पादक निवेश” के बीच अंतर को भी रेखांकित किया।
दिलचस्प बात यह है कि आलोचना केवल डीएमके तक सीमित नहीं रही। कांग्रेस के भीतर से भी कई नेताओं ने प्रवीन चक्रवर्ती की तुलना से दूरी बना ली।
कांग्रेस सांसद जोथिमणि ने कहा कि तमिलनाडु की तुलना उत्तर प्रदेश से करना उचित नहीं है। उन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य, औद्योगिक निवेश, सामाजिक न्याय और कल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में तमिलनाडु की उपलब्धियों को गिनाया। उन्होंने यह भी कहा कि कर्ज का आकलन उसके नतीजों और दीर्घकालिक विकास संकेतकों के साथ मिलाकर किया जाना चाहिए।
इस बीच, भाजपा ने प्रवीन चक्रवर्ती के बयान का समर्थन किया है। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष के. अन्नामलाई ने डीएमके पर आंकड़ों को तोड़-मरोड़ कर पेश करने का आरोप लगाया और दावा किया कि डीएमके के कार्यकाल में तमिलनाडु का कर्ज दोगुना हो गया है। उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि क्या यह सार्वजनिक टकराव INDIA गठबंधन के भीतर गहरे तनाव का संकेत है।
इससे पहले, तमिलनाडु कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष सेल्वापेरुंथगई ने अटकलों को शांत करने की कोशिश करते हुए कहा था कि डीएमके–कांग्रेस गठबंधन पूरी तरह मजबूत है और जल्द ही सीट बंटवारे को लेकर बातचीत शुरू होगी।
हालांकि, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस चुनाव से पहले अपनी सौदेबाजी की स्थिति मजबूत करने के लिए टीवीके सहित अन्य विकल्पों पर भी विचार कर सकती है।
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