टाटा संस पर नहीं पड़ेगा कर्ज का बोझ, पहले जैसी अधिग्रहण रणनीति से अलग दिशा
यूरोप में अपनी मौजूदगी को बढ़ाने की रणनीति के तहत और अब तक के सबसे बड़े विदेशी अधिग्रहण में, टाटा मोटर्स ने इटली की ट्रक निर्माता कंपनी Iveco को 3.8 अरब यूरो (करीब 4.4 अरब डॉलर) में खरीदने की घोषणा..
मुंबई। यूरोप में अपनी मौजूदगी को बढ़ाने की रणनीति के तहत और अब तक के सबसे बड़े विदेशी अधिग्रहण में, टाटा मोटर्स ने इटली की ट्रक निर्माता कंपनी Iveco को 3.8 अरब यूरो (करीब 4.4 अरब डॉलर) में खरीदने की घोषणा की है।
यह सौदा टाटा समूह के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन के नेतृत्व में अब तक का सबसे बड़ा अधिग्रहण होगा, भूषण स्टील और एयर इंडिया के बाद। चंद्रशेखरन ने बुधवार को टाटा संस के बोर्ड को इस सौदे की जानकारी दी।
टाटा मोटर्स Iveco के शेयरों पर पूरी तरह नकद आधारित टेंडर ऑफर लाएगी, जो कि Iveco के रक्षा व्यवसाय के बिक्री पर निर्भर होगा। Iveco का रक्षा विभाग लेओनार्डो को बेचा जाएगा।
Iveco के सबसे बड़े शेयरधारक Exor (जो Fiat के संस्थापक अग्नेली परिवार के स्वामित्व में है) अपनी 27.1% हिस्सेदारी और 43.1% वोटिंग अधिकार टाटा मोटर्स को बेचेगा। यह टेंडर ऑफर कम से कम 80% शेयरों की स्वीकृति पर आधारित होगा।
Iveco की मौजूदगी 30 से अधिक देशों में है जिनमें भारत, चीन, अमेरिका और रूस शामिल हैं। कंपनी ट्रकों, बसों और रक्षा वाहनों को डिजाइन, निर्माण और बिक्री करती है। साथ ही यह अपने डीलरों और ग्राहकों को वित्तीय सेवाएं और उत्पाद भी उपलब्ध कराती है।
टाटा संस नहीं लेगा कोई कर्ज, न देगा कोई गारंटी
टाटा मोटर्स और Iveco ने एक संयुक्त बयान में कहा, "यह प्रस्ताव दो ऐसी कंपनियों को एक साथ लाएगा जिनके उत्पाद पोर्टफोलियो और क्षमताएं एक-दूसरे को पूरक हैं, और जिनकी औद्योगिक व भौगोलिक मौजूदगी में कोई विशेष ओवरलैप नहीं है।"
संयुक्त इकाई की वैश्विक उपस्थिति मजबूत होगी, जिसमें सालाना बिक्री 5.4 लाख यूनिट्स और राजस्व 22 अरब यूरो तक पहुंचेगा, जिसमें से 50% यूरोप, 35% भारत और 15% अमेरिका से आएगा।
यह अधिग्रहण TML CV Holdings के जरिए किया जाएगा, जो डच कानून के तहत गठित एक इकाई है। टाटा मोटर्स ने कहा कि उसका इरादा है कि Iveco को Euronext Milan स्टॉक एक्सचेंज से डीलिस्ट कर दिया जाए।
इस सौदे के लिए Morgan Stanley Bank, Morgan Stanley Senior Funding और MUFG Bank ने 3.8 अरब यूरो की वित्तीय गारंटी प्रदान की है।
RBI के नए नियमों का असर और रणनीति में बदलाव
इस बार, टाटा समूह की होल्डिंग कंपनी टाटा संस न तो कोई कर्ज लेगी, और न ही किसी तरह की वित्तीय गारंटी देगी। यह बदलाव इसलिए किया गया है क्योंकि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के नियमों के अनुसार, "कोर इनवेस्टमेंट कंपनियों" को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से पब्लिक फंड्स तक पहुंच की अनुमति नहीं है। टाटा संस ने पहले ही अपना कोर इनवेस्टमेंट कंपनी (CIC) दर्जा छोड़ने के लिए आवेदन किया है। पहले के अधिग्रहणों में जैसे टेटली, कोरस, और VSNL (अब टाटा कम्युनिकेशंस) — में टाटा संस ने अपने खातों पर कर्ज लेकर और बैंकों को आश्वासन पत्र देकर सब्सिडियरी कंपनियों को सहारा दिया था। इस बार का 20 मिनट लंबी टाटा संस बोर्ड मीटिंग बिना किसी पूर्व-निर्धारित एजेंडा के हुई।
उद्योग विशेषज्ञों की राय, विशेषज्ञों का कहना है कि जगुआर लैंड रोवर के इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर बढ़ने, अमेरिका में लक्जरी कारों पर टैरिफ और यूरोप के नए नियमों के पालन में भारी निवेश के चलते टाटा मोटर्स पहले ही दबाव में है।
उन्हें आशंका है कि इस अधिग्रहण से टाटा मोटर्स की उधारी और बढ़ेगी, क्योंकि मौजूदा नकदी प्रवाह (cash flow) से यह सौदा पूरी तरह कवर नहीं किया जा सकता।
What's Your Reaction?