सुखोई से दागी ब्रह्मोस ने बंगाल की खाड़ी में उड़ाए टारगेट के परखच्चे, 400 किलोमीटर तक रेंज
<p><em><strong>मिसाइल के परीक्षण का ये फाइल फुटेज इंडियन एयरफोर्स से अपने अकाउंट से जारी किया है। इंडियन एयरफोर्स ने बंगाल की खाड़ी में ब्रह्मोस एयर लॉन्च मिसाइल का सफल परीक्षण किया। यह 400 किलोमीटर तक के टारगेट को निशाना बना सकती है। वायुसेना ने अपने ऑफिशियल बयान में कहा- इस मिसाइल को सुखोई एन-30 फाइटर एयरक्राफ्ट से टेस्ट किया गया है।</strong></em></p>
रक्षा विभाग ने बताया कि टेस्ट के दौरान मिसाइल ने टारगेट की गई शिप को बीचोंबीच मारा। यह मिसाइल के एयर-लॉन्च वर्जन का एंटी-शिप वर्जन है। ब्रह्मोस के साथ-साथ सुखोई की भी क्षमताओं का टेस्ट हुआ। यह फाइटर एयरक्राफ्ट एयरफोर्स के साथ नेवी की भी ताकत बना है।
इस टेस्ट के मायने क्या है
इंडियन नेवी अपने वॉरशिप से 400 किलोमीटर दूर तक के दुश्मन जहाजों को ध्वस्त कर सकेगी। वॉरशिप से सुखोई इस मिसाइल को लेकर उड़ेगा और दुश्मन के जहाज को आसानी से निशाना बना लेगा।
सेना की ताकत बढ़ी
इस मिसाइल के परीक्षण से एयरफोर्स ने जमीन और समुद्री टारगेटों को लंबी दूरी से निशाना बनाने की उपलब्धि हासिल कर ली है। अगर कभी युद्ध की स्थिति बनी तो इंडियन एयरफोर्स की रणनीतिक को सुखोई और यह मिसाइल मजबूती प्रदान करेगी।
टेस्ट-दर-टेस्ट बढ़ी ब्रह्मोस की ताकत
ब्रह्मोस की शुरुआती रेंज 290 किलोमीटर दूर के टारगेट को मारने की थी। जो पहले बढ़कर 350 किमी हुई और अब गुरुवार को हुई टेस्ट के बाद 400 किलोमीटर दूर तक का निशाना लगाने में यह सफल हुआ।
कैसे नाम पड़ा ब्रह्मोस?
रक्षा विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, ब्रह्मोस का नाम भगवान ब्रह्मा के ताकतवर शस्त्र ब्रह्मास्त्र के नाम पर दिया गया। हालांकि, कुछ रिपोर्ट्स में ये भी दावा किया गया है कि इस मिसाइल का नाम दो नदियों भारत की ब्रह्मपुत्र और रूस की मोस्कवा नदी के नाम पर रखा गया है। ऐसा माना जाता है कि ये एंटी-शिप क्रूज मिसाइल के रूप में दुनिया में सबसे तेज है।
ब्रह्मोस पर एक नजर
ब्रह्मोस एक सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल है, जिसे पनडुब्बी, शिप, एयरक्राफ्ट या जमीन कहीं से भी छोड़ा जा सकता है।
ब्रह्मोस मिसाइल को भारतीय सेना के तीनों अंगों, आर्मी, नेवी और एयरफोर्स को सौंपा जा चुका है।
ब्रह्मोस मिसाइल के लैंड-लॉन्च, शिप-लॉन्च, सबमरीन-लॉन्च एयर-लॉन्च वर्जन की टेस्टिंग हो चुकी है।
जमीन या समुद्र से दागे जाने पर ब्रह्मोस 290 किलोमीटर की रेंज में मैक 2 स्पीड से (2500किमी प्रति घंटे) की स्पीड से अपने टारगेट को नेस्तनाबूद कर सकती है।
पनडुब्बी से ब्रह्मोस मिसाइल को पानी के अंदर से 40-50 मीटर की गहराई से छोड़ा जा सकता है। पनडुब्बी से ब्रह्मोस मिसाइल दागने की टेस्टिंग 2013 में हुई थी।
पाकिस्तान में गिरी थी भारतीय मिसाइल
भारत की एक मिसाइल 9 मार्च को पाकिस्तान में 124 किलोमीटर अंदर उसके शहर चन्नू मियां के पास जा गिरी। पाकिस्तान का दावा है कि बिना हथियारों वाली यह एक सुपरसॉनिक यानी आवाज की रफ्तार से तेज उड़ने वाली मिसाइल थी।
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