कान्हा पिचकारी मत मार..मेरे घर सास लड़ैगी रे..
<p><em>भारत में सोमवार 6 मार्च की शाम से ही होली की ही धूम मची है। एक बड़े इलाके में होलिका दहन हो चुका है और जहां 6 मार्च को सूर्यास्त छह बजकर 9 मिनट से पहले ही हो गया, वहां होलिका दहन आज मंगलवार यानी 7 मार्च को होने जा रहा है। लेकिन, होली के हुलियारों को इस ज्योतिषीय गणना से से विशेष लेना-देना नहीं है। वे तो होलियां गाने और होली खेलने की शुरुआत कर चुके हैं। उत्तर प्रदेश के आगरा मंडल विशेषतौर पर मैनपुरी में तो बसंत पंचमी वाले दिन से ही होलियां गाने की शुरुआत हो गयी।</em></p>
देश में अलग-अलग स्थानों की अलग-अलग रीतियां हैं और उनका अपना अलग ही लुत्फ है। यही वजह है कि लोग होली का महापर्व मनाने के लिए अपने-अपने घरों को लौट जाना चाहते हैं। शेखावाटी क्षेत्र में फाल्गुन के इस महापर्व के दौरान फाग गाये जाते हैं तो उत्तर प्रदेश में होलियां..लेकिन समानता यही है कि सबके केंद्र में होते तो राधा और कृष्ण ही हैं। यह होली ही तो है रंग चढ़ने के साथ यह बुजुर्गों को भी युवा और युवाओं को भी बच्चा बनाने का दम रखती है। हमने चुने हैं आपके लिए होली के मौके पर अलग-अलग अंदाज में नोंक-झोंक भरे फाल्गुन गीत, चतुर्वेदी समाज की होलियां और नृत्य... हमारा दावा है कि आपको इनमें लोकरंग के साथ अनूठे अंदाज में शास्त्रीय गायन भी सुनने को मिलेगा। आप भी इनका लुत्फ लीजिये..
देखिये फाल्गुन में शेखावाटी नृत्य
फाल्गुन में बदलते युग की पत्नी को लेकर शिकायतें
हठीले घनश्याम..
श्याम मत मारो पिचकारी..
अकेला तुझे जानें ना दूंगी
मेरे घर सास ल़ड़ेगी रे..
जो श्याम आएंगे पलट के..
फाग खेलन को मेरो जिया..
बहियां पकरि के मरोरि..
गुजरिया जाहे मत मारो..
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