डीआरडीओ ने बनाया खास एयरड्राॅप कंटेनर, नौसेना को मिलेगी मदद
<p><em><strong>डीआरडीओ ने 150 किलोग्राम क्षमता वाला एयर ड्रॉपेबल कंटेनर विकसित किया है। इस कंटेनर के माध्यम से तट से दो हजार किलोमीटर या इससे अधिक दूरी पर स्थित जहाज तक संकट के समय जरूरी उपकरण कम समय में पहुंचाए जा सकेंगे।</strong></em></p>
भारत ने रक्षा के क्षेत्र में एक और बड़ी कामयाबी हासिल की है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) और भारतीय नौसेना ने स्वदेशी कंटेनर का सफल परीक्षण किया है, जिसे हवा से गिराया जा सकता है। स्वदेशी रूप से डिजाइन और विकसित किए गए इस एयर ड्रॉपेबल कंटेनर की क्षमता 150 किलोग्राम भार की है। इस कंटेनर को एडीसी 150 नाम दिया गया है।
बताया जाता है कि एयर ड्रॉपेबल कंटेनर एडीसी-150 का पहला सफल परीक्षण 27 अप्रैल को गोवा के तट पर किया गया. इस कंटेनर को आईएल 38 एसडी विमान से गिराया गया. इस कंटेनर के सफल परीक्षण से नौसेना की रसद परिचालन क्षमता में इजाफा होगा. डीआरडीओ की तीन प्रयोगशाला ने मिलकर इसे विकसित किया है.
अत्याधुनिक तकनीकी का बेजोड़ उदाहरण
नवल साइंट एंड टेक्नोलॉजी लेबोरेटरी (एनएसटीएल) विशाखापत्तनम, एरियल डिलीवरी रिसर्च एंड डेवलपमेंट इस्टैब्लिशमेंट (एडीआरडीई) आगरा और एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट इस्टैब्लिशमेंट (एडीई) बेंगलुरु ने संयुक्त रूप से मिलकर इस कंटेनर को विकसित किया है।
नौसेना को यह होगा लाभ
इसका मकसद तट से दो हजार किलोमीटर या इससे अधिक दूरी पर तैनात जहाज तक संकट के समय तत्काल जरूरी इंजीनियरिंग सामग्री पहुंचे, ये सुनिश्चित करना है। इस कंटेनर के विकसित होने के बाद जरूरी पुर्जे और अन्य वस्तुओं का भंडार कम होने पर उसके लिए जहाज को तट के करीब लाने की जरूरत कम हो जाएगी। रीजनल सेंटर फॉर मिलिट्री एयरवर्दीनेस कानपुर की ओर से इसे लेकर महत्वपूर्ण फ्लाइट क्लीयरेंस सर्टिफिकेशन दिया गया था। रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के सचिव और डीआरडीओ के अध्यक्ष ने एडीसी-150 के सफल परीक्षण के लिए वैज्ञानिकों और भारतीय नौसेना को बधाई दी है।
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