15 दिन में खत्म हो जाएगा किसान आंदोलन! घर वापसी करेंगे किसान
<p>किसान नेताओं और सरकार के बीच बैठकों के दौर जारी हैं। उम्मीद की जा रही है कि इन बैठकों में कोई न कोई हल जरूर निकलेगा। हालांकि अगर हल नहीं निकला तो क्या किसान आंदोलन दिल्ली की तरफ कूच करेगा या फिर वापस पंजाब चला जाएगा, क्योंकि आने वाले 15 दिन काफी अहम हैं। ये 15 दिन किसानों के लिए क्यों अहम हैं।</p>
किसान आंदोलन जारी है और किसान पंजाब-हरियाणा के शंभु बॉर्डर पर जमा हैं। दो दिन वहां किसानों और सुरक्षाकर्मियों के बीच गतिरोध देखने को मिला। दिल्ली और हरियाणा के बीच दो प्रमुख सीमाओं पर वाहनों की आवाजाही बंद है, जबकि दिल्ली में महत्वपूर्ण स्थानों पर सुरक्षाकर्मी तैनात हैं।
हरियाणा से लगी दो सीमाएं टिकरी और सिंघू बंद हैं, जबकि यूपी से लगे गाजीपुर बॉर्डर पर सुरक्षाकर्मियों की निगरानी में आवाजाही जारी है। गुरुवार को किसानों और सरकार के बीच बैठक तों हुई लेकिन इसमें कोई हल नहीं निकल पाया। हालांकि आगे भी अगर कोई हल नहीं भी निकलता है तो भी ये आंदोलन आने वाले 15 दिन में खत्म हो सकता है, जानें आखिर कैसे?
दरअसल, रबी की प्रमुख फसलों में एक गेहूं की कटाई का समय धीरे-धीरे नजदीक आ रहा है। बात अगर पंजाब की करें तो यहां किसान गेहूं की बुआई समय से कर लेते हैं। ऐसे में मार्च के महीने में ही इनकी फसल कटाने लायक हो जाती है। ऐसे में अगर किसान संगठन धरने पर बैठ भी गए हैं तो ये लोग अपने आंदोलन को 15 दिनों से ज्यादा नहीं खींच पाएंगे। उन्हें अपनी फसलों की वजह से घर वापसी करनी ही पड़ेगी। इसमें बड़े और छोटे, दोनों तरह के किसानों को अपने खेतों की तरफ रुख करना पड़ेगा।
पंजाब में कितने हेक्टेयर में होती है गेहूं की खेती?
गेहूं पंजाब की प्रमुख अनाज की फसल है। इसे 2020-21 के दौरान 35.30 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में उगाया गया था। कुल उत्पादन 171.85 लाख टन और औसत उपज 48.68 क्विंटल प्रति हेक्टेयर (19.7 क्विंटल प्रति एकड़) था। खरीफ की प्रमुख फसल धान की कटाई के बाद पंजाब के किसान गेहूं की बुआई पर ही जोर देते हैं। अक्टूबर महीने में धान की कटाई खत्म करके किसान जल्दी-जल्दी गेहूं की बुआई कर देते हैं। गेहूं की फसल को तैयार होने में 4 से 5 महीने का समय लगता है। ऐसे में मार्च के महीने में ही पंजाब के किसान गेहूं की फसल काटना शुरू कर देते हैं।
किसानों की क्या-क्या मांग?
किसान ‘स्वामीनाथन आयोग’ की सिफारिशों को लागू करने, एमएसपी पर कानून, किसानों और कृषि श्रमिकों के लिए पेंशन, कृषि ऋण माफी, पुलिस मामलों को वापस लेने और लखीमपुर खीरी हिंसा के पीड़ितों के लिए न्याय की मांग को लेकर धरने पर बैठे हुए हैं। धरना शुरू करने से पहले किसानों की केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा और पीयूष गोयल के साथ सोमवार को एक बैठक भी हुई थी, जो बेनतीजा रही। इसी के बाद मंगलवार को किसानों ने दिल्ली की तरफ कूच कर दिया था, लेकिन किसानों को पंजाब-हरियाणा के शंभु बॉर्डर पर रोक दिया गया था।
किसान आंदोलन के समर्थन में कहां हुई खाप पंचायत?
इस बार के किसान आंदोलन में पूरे भारत के किसानों का समर्थन नहीं मिला है। खाप पंचायतों और कई बड़े किसान संगठनों ने अभी तक इस आंदोलन पर अपना रुख साफ नहीं किया है। हालांकि हरियाणा के हिसार में गुरुवार को किसानों के समर्थन में सिसाय गांव में हुई महापंचायत में फैसला लिया गया। यहां के किसान पंजाब के किसानों के समर्थन में खनोरी बॉर्डर पर जाएंगे। 16 फरवरी से गांव में किसान आंदोलन का प्रचार करेंगे। 18 तारीख को अपने-अपने गांव में ट्रैक्टर मार्च निकालेंगे। 20 फरवरी को खेड़ी चैपटा में इकट्ठा होकर पंजाब के किसानों के समर्थन में खनोरी बॉर्डर के लिए रवाना होंगे।
इस भाकियू नेता ने किसान आंदोलन का किया समर्थन
कुरुक्षेत्र भाकियू नेता गुरनाम सिंह चढ़ूनी की बैठक में भी बड़ा फैसला लिया गया है। गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने बताया कि 16 फरवरी को हरियाणा के किसान प्रदेश भर में 3 घंटे टोल बंद रखेंगे। 17 फरवरी को तहसील स्तर पर ट्रैक्टर मार्च निकालेंगे। 18 फरवरी को ब्रह्मसरोवर पर सभी संगठनों की महापंचायत होगी। महापंचायत में किसान अंदोलन को लेकर कई महत्वपूर्ण फैसले लिए जाएंगे।
चडीगढ़ में केंद्रीय मंत्रियों के साथ बैठक
12 फरवरी को किसान नेताओं और केंद्र के बीच बातचीत के बेनतीजा रही थी। गुरुवार को फिर किसान नेताओं और केंद्रीय मंत्रियों के बीच बैठक में केंद्रीय मंत्री शामिल हुए लेकिन इसमें भी कोई सहमति नहीं बन सकी।
शंभू बॉर्डर पर किसानों का जमावड़ा
फिलहाल शंभू बॉर्डर पर किसानों का जमावड़ा लगा है। इधर, दिल्ली में हरियाणा की सीमा से लगा टिकरी और सिंघू बॉर्डर भी बंद है। टिकरी और सिंघू बॉर्डर पर दिल्ली पुलिस ने किसानों को राजधानी में प्रवेश करने से रोकने के लिए तगड़ी सुरक्षा-व्यवस्था की है। यहां बैडिकेड्स, कंटीले तार और कंक्रीट ब्लॉक तक लगाए गए हैं। वहीं यूपी के गाजीपुर बॉर्डर पर भी कड़ी निगरानी की जा रही है।
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