भारत गैर पश्चिमी जरूर है लेकिन पश्चिम का विरोधी नहीः एस जयशंकर
<p><em><strong>भारत के </strong>विदेश मंत्री एस जयशंकर बहुत ही बेबाक नेता हैं। वे अपनी बात बिना लाग-लपेट के रखते हैं और भारत के नजरिये को दुनिया के सामने बिना किसी हिचकिचाहच के रखते हैं। अमेरिका के वॉशिंगटन में हडसन इंस्‍टीट्यूट और इंडिया फाउंडेशन की ओर से आयोजित परिचर्चा में भारत-कनाडा के ताजा विवाद पर उन्होंने भारत का पक्ष रखा और बताया कि इसे लेकर उनकी जेक सुलिवन और एंटनी ब्लिंकन दोनों के साथ बात हुई। जयशंकार ने कहा कि कनाडा को आतंकवाद और तस्करी का जहरीला कॉम्बिनेशन बताते हुए कहा वह अमेरिकियों के लिए बहुत अलग दिखता है। जयशंकर ने पश्चिमी देशों को लेकर भारत के दृष्टिकोण को भी बारीकी से समझाया और कहा कि भारत गैर-पश्चिमी देश जरूर है लेकिन पश्चिम विरोधी नहीं।</em></p>
कनाडा के साथ भारत के रिश्तों में आई कड़वाहट का जयशंकर ने खुलकर कहा कि कनाडाई प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने पहले निजी तौर पर और फिर सार्वजनिक रूप से कुछ आरोप लगाए। निजी और सार्वजनिक दोनों में हमारी प्रतिक्रिया यह रही कि उनके आरोप भारत की नीति से मेल नहीं खाते हैं। अगर कोई प्रासंगिक और विशिष्ट बात है जिस पर वह भारत से उसका ध्यान आकृष्ट कराना चाहते हैं तो उसके लिए सरकार तैयार है। फिलहाल, इस समय बातचीत यहीं है।
जयशंकर साफ शब्दों में कहा, आतंकवादियों और चरमपंथियों के प्रति कनाडा का रवैया बहुत उदार है। राजनीतिक मजबूरियों के कारण उन्हें कनाडा में काम करने की जगह दी गई है। लेकिन ताजा विवाद के दौर में यह भी समझना जरूरी है कि कनाडा के साथ 1980 के दशक से कई सालों तक ये सभी बातें तनातनी का मुद्दा रही हैं। हालांकि पिछले कुछ वर्षों में ये दब गई थीं लेकिन दोबारा इनकी चर्चा गर्मजोशी से हुई है।
विदेश मंत्री की खरी-खरी
विदेश मंत्री ने दो-टूक कहा कि अमेरिकियों के लिए कनाडा बहुत अलग दिखता है। लेकिन भारत के लिए कनाडा एक ऐसा देश है जहां संगठित अपराध, लोगों की तस्करी के साथ अलगाववाद, हिंसा, आतंकवाद का जहरीला कॉम्बिनेशन है। लिहाजा, कनाडा के साथ भारत के रिश्तों में तनाव ट्रूडो ने जो कहा उससे काफी पहले से थे। आज भारत के डिप्लोमैट कनाडा में दूतावास या वाणिज्य दूतावासों में जाने में असुरक्षित हैं। उन्हें सार्वजनिक रूप से डराया-धमकाया गया। इस परिस्थिति ने भारत को कनाडा में वीजा सेवा को अस्थायी रूप से निलंबित करने के लिए मजबूर किया। अक्सर देश बहुत अलग दिखते हैं। यह इस बात पर निर्भर करता है कि आप उन्हें कैसे देखते हैं और आपके हित क्या हैं और उन्हें कनाडा के साथ यह समस्या नजर आती है।
पश्चिम को लेकर भारत और इसका दृष्टिकोण
विदेश मंत्री ने पश्चिम को लेकर भारत के रुख के बारे में बारीक फर्क भी समझाया। उन्होंने कहा कि भारत गैर-पश्चिमी है, पश्चिम विरोधी नहीं। उन्होंने कहा कि जिस दुनिया में आज हम रह रहे हैं, वह मुख्य रूप से पश्चिमी नजरिये से बनी है। पिछले 80 सालों में दुनिया बहुत ज्यादा बदली है। जी20 की लिस्ट बदलती दुनिया की ओर से इशारा करती है।
जयशंकर ने कहा, हम आज यह मानते हैं कि जब सबसे अधिक आबादी वाला देश संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में नहीं है, जब पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वहां नहीं है, जब 50 से अधिक देशों का महाद्वीप वहां नहीं है तो संयुक्त राष्ट्र में जाहिर तौर पर विश्वसनीयता की कमी है और काफी हद तक प्रभावशीलता की भी कमी है। जयशंकर ने कहा कि जब हम दुनिया के पास जाते हैं तो हम उसको नीचे गिराने जैसे दृष्टिकोण के साथ नहीं जाते। यह अहम है कि हम इसे बेहतर, कुशल, उद्देश्यपूर्ण बनाने के लिए क्या कर सकते हैं।
What's Your Reaction?